चीन के सामने सवाल सिर्फ यह नहीं है कि AI डेटा सेंटरों को बिजली कहां से मिलेगी, बल्कि यह भी है कि कब मिलेगी। उसके परमाणु ऊर्जा प्रयास तीन अलग समय-सीमाओं पर चल रहे हैं: मौजूदा और निर्माणाधीन रिएक्टर सबसे पहले बिजली व्यवस्था में योगदान दे सकते हैं; छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) अगले दशक का लक्ष्य हैं; और न्यूक्लियर फ्यूजन अभी प्रयोगों के दौर में है। इन तीनों को 2030 तक उपलब्ध बिजली मान लेना गलत होगा।
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बिजली की मांग का अनुमान कितना बड़ा है?
ऊर्जा परामर्श कंपनी वुड मैकेंज़ी के मुताबिक, चीन के सभी डेटा सेंटरों की सालाना बिजली खपत 2030 तक लगभग चार गुना बढ़कर 774 टेरावाट-घंटे (TWh) हो सकती है। यह देश की कुल बिजली खपत का करीब 6% होगा। AI इस मांग पर बढ़ते ध्यान की बड़ी वजह है, लेकिन अनुमान केवल AI चलाने वाले कंप्यूटरों का नहीं, सभी डेटा सेंटरों का है। यह एक पूर्वानुमान है, तय नतीजा नहीं।
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4 कम कार्बन उत्सर्जन वाली बिजली बढ़ाना चीन के 2060 तक कार्बन तटस्थता हासिल करने के घोषित लक्ष्य से भी जुड़ता है।
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पहले से बन रहे रिएक्टर सबसे निकट का विकल्प
रिपोर्टों के अनुसार, चीन में 64 परमाणु रिएक्टर चालू हैं और 38 निर्माणाधीन हैं। निर्माणाधीन रिएक्टरों की कुल क्षमता लगभग 40 गीगावाट है। इसलिए 2030 के आसपास की मांग के लिहाज से मौजूदा न्यूक्लियर फिशन कार्यक्रम, प्रस्तावित फ्यूजन संयंत्रों से कहीं अधिक प्रासंगिक है।
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इसका मतलब यह नहीं कि नई क्षमता विशेष रूप से डेटा सेंटरों को मिलेगी। डेटा सेंटर व्यापक बिजली व्यवस्था से बिजली लेते हैं; नया उत्पादन उसी व्यवस्था में जुड़ता है।
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Junhe Nuclear: 2031 के आसपास SMR प्रदर्शन परियोजना का लक्ष्य
शंघाई की Junhe Nuclear को कथित तौर पर 30 करोड़ युआन का वेंचर निवेश मिला है। कंपनी अपने पहले छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर, यानी SMR, की प्रदर्शन परियोजना डिजाइन कर रही है और उसे 2031 के आसपास चालू करने का लक्ष्य रखती है। उसने पुराने कोयला बिजलीघरों की जगह और वहां के कर्मचारियों का उपयोग करने की संभावना पर भी बात की है।
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SMR एक छोटा फिशन रिएक्टर है; इसे NovaFusionX की प्रस्तावित फ्यूजन मशीनों से नहीं मिलाना चाहिए। Junhe की 2031 की तारीख विकास लक्ष्य है—इसका अर्थ यह नहीं कि संयंत्र बन चुका है या बिजली दे रहा है।
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NovaFusionX: बड़ी फंडिंग, लेकिन लक्ष्य अभी प्रयोगशाला के
फ्यूजन स्टार्टअप NovaFusionX ने कथित तौर पर कुल 240 करोड़ युआन जुटाए हैं: पहले 50 करोड़ युआन, फिर 70 करोड़ युआन और उसके बाद प्री-सीरीज़ A चरणों में 120 करोड़ युआन।
18 कंपनी फील्ड-रिवर्स्ड कॉन्फ़िगरेशन नामक फ्यूजन तकनीक पर काम कर रही है। उसका लक्ष्य 2026 के अंत तक ‘फर्स्ट प्लाज़्मा’ और 2029 तक प्रयोगात्मक ‘नेट एनर्जी गेन’ हासिल करना है। उसके संस्थापक ने फ्यूजन के व्यावसायीकरण की समय-सीमा घटाकर पांच से दस साल करने की महत्वाकांक्षा जताई है।
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लेकिन इन पड़ावों और बिजली देने वाले संयंत्र में फर्क है। ‘फर्स्ट प्लाज़्मा’ का मतलब मशीन में प्लाज़्मा पैदा करना होगा। प्रयोग में नेट एनर्जी गेन हासिल होने के बाद भी लगातार, उपयोगी बिजली उत्पादन की चुनौती बनी रहेगी। कंपनी की प्रदर्शन बिजली परियोजना की योजना 2030 के दशक के लिए है; इसलिए फ्यूजन को 2030 की अनुमानित मांग पूरी करने वाला भरोसेमंद स्रोत नहीं गिना जा सकता।
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अमेरिका से तुलना में चीन की स्थिति
चीन के पास बड़े पैमाने पर रिएक्टर निर्माण, घरेलू विनिर्माण और समन्वित सार्वजनिक निवेश को साथ लाने की क्षमता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन की एक परमाणु परियोजना में 90% से अधिक उपकरण घरेलू आपूर्तिकर्ताओं ने दिए थे।
50 फ्यूजन पर अमेरिकी शोध संस्था CSIS का अनुमान है कि चीन ने 2023 से 2025 के बीच कम-से-कम 6.5 अरब डॉलर का सार्वजनिक धन जुटाया। यह सरकारी समर्थन का अनुमान है, व्यावसायिक फ्यूजन के निकट होने का प्रमाण नहीं।
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अमेरिका में तकनीकी कंपनियों से जुड़े निवेश सहित बड़ा निजी फ्यूजन क्षेत्र है। उसके साथ संघीय शोध और तय तकनीकी पड़ाव हासिल करने पर मिलने वाला सरकारी समर्थन भी मौजूद है।
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32 अमेरिकी सरकार की रूपरेखा 2030 के दशक के मध्य तक शुरुआती फ्यूजन संयंत्र लगाने का लक्ष्य रखती है, लेकिन सामग्री, बुनियादी ढांचे, आपूर्ति शृंखला और कुशल कर्मचारियों की कमियों को भी पहचानती है।
28 इसलिए केवल सरकारी खर्च की तुलना से यह तय नहीं होता कि फ्यूजन को व्यावसायिक बिजली में कौन पहले बदलेगा।
मुख्य बात समय की है: चीन के पारंपरिक फिशन रिएक्टर अभी और नई परियोजनाएं पूरी होने पर बिजली व्यवस्था में योगदान दे सकते हैं। Junhe का SMR फिलहाल 2031 की प्रदर्शन परियोजना है; NovaFusionX अभी प्रयोगात्मक फ्यूजन लक्ष्य हासिल करने की कोशिश में है। AI से बढ़ती मांग तीनों में निवेश की वजह समझाती है, लेकिन तीनों की बिजली एक ही समय पर उपलब्ध नहीं होगी।
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