कुछ उद्योग अनुमानों के अनुसार High‑NA सिस्टम एक ही पास में लगभग 8 nm के पैटर्न बना सकते हैं, जबकि आज के EUV स्कैनर लगभग 13 nm तक सीमित हैं। वास्तविक उपयोगी आयाम अभी भी फोटोरेज़िस्ट, मास्क डिज़ाइन और चिप आर्किटेक्चर पर निर्भर करते हैं।
सरल शब्दों में, इसका मतलब है कि क्रिटिकल लेयर पर कम लिथोग्राफी स्टेप लगेंगे—जिससे त्रुटियाँ और निर्माण जटिलता दोनों घट सकती हैं।
ASML और Intel ने High‑NA EUV को मिड‑2020s में उत्पादन में लाने की योजना बनाई थी। Intel ने सबसे पहले TWINSCAN EXE:5200 सिस्टम का ऑर्डर दिया था।
पहली मशीनों की डिलीवरी 2025–2026 के दौरान शुरू हुई, जिनका इस्तेमाल परीक्षण, प्रक्रिया विकास और शुरुआती उत्पादन रैंप के लिए किया जा रहा है।
उद्योग के अनुमान बताते हैं कि समयरेखा कुछ इस तरह हो सकती है:
सेमीकंडक्टर उद्योग में यह सामान्य है—नई मशीन लगने के बाद भी फाउंड्री को प्रक्रिया अनुकूलन, उपकरण एकीकरण और yield परीक्षण में समय लगता है।
High‑NA EUV तकनीक पुराने EUV सिस्टम की तुलना में कई महत्वपूर्ण लाभ देती है।
उच्च रिज़ॉल्यूशन
0.33 से 0.55 NA तक की छलांग स्कैनर की ऑप्टिकल क्षमता को काफी बढ़ाती है, जिससे छोटे पैटर्न कम एक्सपोज़र में संभव होते हैं।
कम पैटर्निंग स्टेप
Multi‑patterning की आवश्यकता कम होने से प्रक्रिया सरल हो सकती है और उत्पादन चक्र भी छोटा हो सकता है।
बेहतर yield की संभावना
कम स्टेप और सरल पैटर्निंग से alignment और overlay जैसी समस्याएँ घट सकती हैं—जो उन्नत नोड्स में yield लॉस का बड़ा कारण होती हैं।
लागत का संतुलन
हर High‑NA EUV मशीन की कीमत लगभग $350 मिलियन है। इसलिए चिप निर्माता मशीन की भारी लागत को कम प्रोसेस स्टेप, कम मास्क और अधिक चिप घनत्व से मिलने वाली बचत के साथ संतुलित करते हैं।
इस तकनीक को सबसे पहले वे कंपनियाँ अपना रही हैं जो दुनिया के सबसे उन्नत चिप नोड्स विकसित कर रही हैं।
Intel
Intel को अक्सर पहला बड़ा अपनाने वाला माना जाता है। कंपनी ने ASML से पहला High‑NA EUV उत्पादन सिस्टम ऑर्डर किया और तकनीक को मैन्युफैक्चरिंग में लाने के लिए साझेदारी की।
Samsung
रिपोर्टों के अनुसार Samsung ने कई High‑NA सिस्टम ऑर्डर किए हैं, जिनकी डिलीवरी 2025 से 2026 के बीच शुरू होने की उम्मीद है।
SK hynix
मेमोरी निर्माता SK hynix ने भी भविष्य के DRAM प्रोसेस के लिए अपने विकास केंद्रों में High‑NA सिस्टम स्थापित किए हैं।
TSMC
दुनिया की सबसे बड़ी फाउंड्री TSMC इस तकनीक को लेकर अपेक्षाकृत सावधानी बरत रही है और बड़े पैमाने पर अपनाने से पहले लागत और प्रक्रिया लाभ का मूल्यांकन कर रही है।
उद्योग का सामान्य अनुमान दो चरणों में अपनाने का है:
यही वह समय है जिसे कई विश्लेषक “एंग्स्ट्रॉम युग” कहते हैं—जहाँ चिप प्रोसेस नोड नैनोमीटर के अंशों में मापे जाने लगते हैं।
ASML का विकास काफी हद तक AI कंप्यूटिंग के तेज विस्तार से जुड़ा हुआ है। कंपनी का कहना है कि उद्योग अब “chips everywhere” से आगे बढ़कर “AI chips everywhere” की दिशा में जा रहा है।
AI के बढ़ते उपयोग के कारण चिप निर्माताओं ने अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने की योजनाएँ तेज कर दी हैं, जिससे ASML की मशीनों की मांग भी बढ़ रही है।
क्योंकि अत्याधुनिक GPU और AI एक्सेलरेटर बनाने के लिए उन्नत लिथोग्राफी जरूरी है, इसलिए ASML की मशीनें आधुनिक चिप उत्पादन की सबसे महत्वपूर्ण कड़ियों में से एक बन चुकी हैं।
भारत भी अपना सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने की कोशिश कर रहा है। India Semiconductor Mission के तहत सरकार का लक्ष्य 2026 तक देश में वाणिज्यिक चिप उत्पादन शुरू करना है।
हालाँकि शुरुआती भारतीय फैब मुख्य रूप से बुनियादी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता स्थापित करने पर केंद्रित हैं। High‑NA EUV जैसी अत्याधुनिक तकनीक फिलहाल अमेरिका, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे स्थापित सेमीकंडक्टर हब में ही इस्तेमाल हो रही है।
भविष्य में जैसे‑जैसे भारत का चिप उद्योग बढ़ेगा, वैसे‑वैसे उपकरण सपोर्ट, सेवाओं और संभावित रूप से अधिक उन्नत लिथोग्राफी इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग भी पैदा हो सकती है।
High‑NA EUV सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। बेहतर ऑप्टिकल रिज़ॉल्यूशन और कम पैटर्निंग जटिलता के कारण यह तकनीक ट्रांजिस्टर स्केलिंग को एंग्स्ट्रॉम युग तक आगे बढ़ाने में मदद करेगी।
इन मशीनों से बनी पहली चिप्स 2025–2026 के आसपास सीमित उत्पादन में दिखाई दे सकती हैं, लेकिन इसका वास्तविक प्रभाव तब दिखेगा जब कई चिप निर्माता 2027–2028 के आसपास बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू करेंगे।
AI चिप्स की वैश्विक दौड़ में, इन लगभग $350 मिलियन की लिथोग्राफी मशीनों तक पहुंच भविष्य में प्रतिस्पर्धा का सबसे निर्णायक कारक बन सकती है।
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