हालांकि AI को पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं किया गया है। आयोजक दो तरह के उपयोगों में अंतर करते हैं:
पहला तरीका तेजी से आम होता जा रहा है, जबकि दूसरा अभी भी प्रतियोगिता से बाहर है। आयोजकों का कहना है कि उद्देश्य सिनेमा को एक मानवीय कला रूप के रूप में सुरक्षित रखना है, भले ही डिजिटल तकनीक तेज़ी से आगे बढ़ रही हो।
फेस्टिवल में कई फिल्मकार AI को पूरी तरह नया माध्यम नहीं, बल्कि एक व्यावहारिक प्रोडक्शन टूल के रूप में देख रहे हैं।
फ्रांसीसी निर्देशक ज़ेवियर जेंस (Xavier Gens) ने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर आज के AI टूल पहले उपलब्ध होते, तो उनकी नेटफ्लिक्स फिल्म Under Paris के विजुअल इफेक्ट्स लगभग आधे खर्च और कई महीनों कम समय में पूरे हो सकते थे।
इसी तरह निर्देशक स्टीवन सोडरबर्ग ने जॉन लेनन पर बनी एक डॉक्यूमेंट्री में AI‑जनरेटेड इमेजरी का उपयोग किया, ताकि पुराने इंटरव्यू में वर्णित दृश्यों को विजुअल रूप दिया जा सके।
इन उदाहरणों से संकेत मिलता है कि पोस्ट‑प्रोडक्शन जैसे क्षेत्रों—जैसे विजुअल इफेक्ट्स, कम्पोज़िटिंग और सीन जनरेशन—में AI तेजी से उपयोगी होता जा रहा है।
AI पर बहस सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि रचनात्मक और दार्शनिक भी है।
कान्स जूरी सदस्य और अभिनेत्री डेमी मूर ने कहा कि AI का विरोध करना व्यावहारिक नहीं है। उनके मुताबिक, फिल्म इंडस्ट्री को इसके खिलाफ लड़ने के बजाय इसके साथ काम करने के तरीके ढूंढने होंगे, क्योंकि “AI अब आ चुका है।”
दूसरी ओर निर्देशक डैरेन एरोनोफ्स्की ने AI एनीमेशन प्रयोगों के बारे में कहा कि तकनीक की प्रगति की रफ्तार “mind‑blowing” है—यानि बेहद तेज़।
इन दोनों विचारों में एक समान बात है: AI शायद फिल्मकारों की जगह नहीं लेगा, लेकिन यह भविष्य में एक शक्तिशाली क्रिएटिव असिस्टेंट बन सकता है—कुछ उसी तरह जैसे डिजिटल एडिटिंग, CGI और मोशन‑कैप्चर तकनीकों ने पहले फिल्म निर्माण को बदल दिया था।
फिल्म उद्योग में अभी सबसे बड़ा सवाल यही है: क्या AI फिल्मकारों की मदद करेगा या उन्हें बदल देगा?
समर्थकों का मानना है कि AI फिल्म निर्माण को लोकतांत्रिक बना सकता है। छोटे क्रिएटिव टीमें भी अब बड़े‑पैमाने की दुनिया और दृश्य बना सकती हैं, जिनके लिए पहले बड़े स्टूडियो और भारी बजट चाहिए होते थे।
आलोचकों की चिंता अलग है—नौकरियों पर असर, कलाकारों की छवि का AI उपयोग, और यह सवाल कि क्या एल्गोरिद्म से बनी फिल्में उतनी ही भावनात्मक और प्रामाणिक हो सकती हैं जितनी मानव कलाकारों द्वारा बनाई गई फिल्में।
कान्स 2026 यह दिखाता है कि फिल्म उद्योग एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है। AI अब केवल प्रयोग नहीं है, लेकिन अभी इसे पूरी तरह रचनात्मक केंद्र भी नहीं माना गया है।
अभी के लिए फिल्म जगत एक मध्य रास्ता अपनाता दिख रहा है—जहां AI फिल्मकारों के काम को तेज़ और सस्ता बना सकता है, लेकिन अंतिम रचनात्मक नियंत्रण अभी भी इंसानों के पास रहेगा।
भविष्य में यह संतुलन कितना टिकेगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि तकनीक कितनी तेजी से विकसित होती है—और फिल्मकार उसे किस तरह इस्तेमाल करते हैं।
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