यह अंतर दिखाता है कि AI टूल्स की वजह से गाने बनाना बेहद आसान और सस्ता हो गया है। नतीजा यह है कि सप्लाई (अपलोड) तेज़ी से बढ़ रही है, लेकिन असली श्रोता मांग उतनी नहीं है।
Apple Music ने हाल ही में संगीत उद्योग के साझेदारों को एक संदेश भेजा जिसका शीर्षक था “What We’re Doing to Keep Music Fair”। इसमें कंपनी ने साफ किया कि AI तकनीक कलाकारों के लिए नई रचनात्मक संभावनाएँ खोल सकती है, लेकिन इसका इस्तेमाल भ्रामक तरीके से नहीं होना चाहिए।
Apple की नीति के मुख्य बिंदु:
इसका उद्देश्य यह है कि प्लेटफॉर्म के रिकमेंडेशन सिस्टम और रॉयल्टी भुगतान मॉडल को गलत तरीके से प्रभावित होने से बचाया जाए।
ये टैग मेटाडेटा की तरह काम करते हैं और बताते हैं कि किसी रिलीज़ में AI का इस्तेमाल हुआ है या नहीं। टैग इन हिस्सों को कवर करते हैं:
अगर किसी गाने के निर्माण में AI का “महत्वपूर्ण हिस्सा” शामिल रहा है, तो यह जानकारी इन टैग्स के जरिए दिखाई जा सकती है।
हालांकि एक महत्वपूर्ण सीमा भी है—यह प्रणाली अभी लेबल्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स द्वारा स्वयं घोषित जानकारी पर निर्भर करती है। यानी सही टैगिंग काफी हद तक कंटेंट अपलोड करने वाले पार्टनर्स पर निर्भर है।
सिर्फ लेबलिंग से समस्या पूरी तरह हल नहीं होती। सबसे बड़ा जोखिम है स्पैम अपलोड और कृत्रिम स्ट्रीमिंग।
Apple Music ने बताया है कि वह आंतरिक डिटेक्शन टूल्स विकसित कर रहा है जो AI‑जनरेटेड ट्रैक्स और संदिग्ध गतिविधियों की पहचान कर सकते हैं।
कार्रवाई मुख्य रूप से इन मामलों पर केंद्रित है:
यदि किसी ट्रैक की अधिकतर प्ले संख्या संदिग्ध या हेरफेर किए गए ट्रैफिक से आती है, तो Apple उसे प्लेटफॉर्म से हटा सकता है।
यह समस्या सिर्फ Apple Music तक सीमित नहीं है। अन्य स्ट्रीमिंग सेवाएँ भी इसी पैटर्न का सामना कर रही हैं।
Deezer के अनुसार:
Deezer ने यह भी पाया कि 2025 में पूरी तरह AI से बने गानों की लगभग 85% स्ट्रीमिंग फर्जी थी, जो रॉयल्टी सिस्टम से पैसा निकालने की कोशिशों से जुड़ी थी।
दूसरी ओर Spotify ने भी AI‑संबंधित स्पैम और धोखाधड़ी पर कार्रवाई करते हुए पिछले 12 महीनों में 75 मिलियन से अधिक “स्पैम” ट्रैक्स हटाने की जानकारी दी है।
दिलचस्प बात यह है कि कंपनियाँ AI संगीत के कारण इसलिए सक्रिय नहीं हुईं क्योंकि श्रोता इसे बड़ी संख्या में सुन रहे हैं। असली चिंता है:
AI टूल्स के कारण हजारों गाने बेहद कम लागत में बनाए जा सकते हैं। जब इन्हें बड़े पैमाने पर अपलोड किया जाता है—और कभी‑कभी बॉट स्ट्रीमिंग से बढ़ाया जाता है—तो यह रिकमेंडेशन सिस्टम और कलाकारों की आय दोनों को प्रभावित कर सकता है।
2026 तक स्ट्रीमिंग उद्योग का उभरता हुआ मॉडल तीन स्तरों पर आधारित दिख रहा है:
फिलहाल आंकड़े एक दिलचस्प वास्तविकता दिखाते हैं—AI संगीत अपलोड के मामले में तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन वास्तविक सुनने में उसका हिस्सा अभी भी बहुत छोटा है।
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