इस मॉडल में पारंपरिक एसेट मैनेजमेंट की संरचना और ब्लॉकचेन की तेज़ सेटलमेंट क्षमता को एक साथ जोड़ा गया है।
SAFO की एक अहम खासियत यह है कि यह पारंपरिक वित्तीय व्यवस्था के बाहर नहीं, बल्कि पूरी तरह रेगुलेटेड यूरोपीय ढांचे के भीतर काम करता है।
इसकी संरचना इस प्रकार है:
UCITS (Undertakings for Collective Investment in Transferable Securities) यूरोपीय संघ का एक नियामक ढांचा है, जो म्यूचुअल फंड जैसे निवेश उत्पादों को कई यूरोपीय देशों में एक ही नियामक व्यवस्था के तहत वितरित करने की अनुमति देता है। इससे निवेशकों को पारंपरिक फंड जैसी सुरक्षा और पारदर्शिता मिलती है।
रिटर्न उत्पन्न करने के लिए SAFO बड़े बैंकों के साथ पूर्ण रूप से कोलैटरलाइज्ड टोटल‑रिटर्न स्वैप्स का उपयोग करता है, जिससे फंड को अल्पकालिक तरलता बनाए रखने में मदद मिलती है।
इस तरह कानूनी और अनुपालन ढांचा पारंपरिक वित्त जैसा ही रहता है, जबकि स्वामित्व का प्रतिनिधित्व ब्लॉकचेन पर डिजिटल रूप में किया जाता है।
SAFO को शुरुआत में एथेरियम और स्टेलर नेटवर्क पर लॉन्च किया गया था। बाद में अमुंडी और स्पिको ने इसे स्पिको की टोकनाइज़ेशन इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए सोलाना ब्लॉकचेन तक विस्तारित किया।
सोलाना को चुनने के पीछे मुख्य कारण इसके तकनीकी गुण हैं:
ये विशेषताएँ उन वित्तीय उत्पादों के लिए उपयोगी हैं जिन्हें बार‑बार ट्रांसफर या ऑपरेशनल लेनदेन की जरूरत होती है।
इसके अलावा सोलाना पर टोकनाइज़्ड रियल‑वर्ल्ड एसेट (RWA) का इकोसिस्टम भी तेजी से बढ़ रहा है और उद्योग रिपोर्टों के अनुसार इसका ऑन‑चेन मूल्य कई अरब डॉलर तक पहुँच चुका है।
SAFO के तकनीकी और ऑपरेशनल ढांचे में स्पिको महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
स्पिको की जिम्मेदारियाँ शामिल हैं:
दूसरी ओर, अमुंडी—जो लगभग €2.3–€2.4 ट्रिलियन की परिसंपत्तियाँ प्रबंधित करता है—इस फंड का डेलीगेटेड इन्वेस्टमेंट मैनेजर है।
यह साझेदारी वित्तीय बाजार में उभरती एक बड़ी प्रवृत्ति को दिखाती है: पारंपरिक एसेट मैनेजर अक्सर ब्लॉकचेन इंफ्रास्ट्रक्चर खुद बनाने के बजाय विशेषज्ञ टोकनाइज़ेशन प्लेटफॉर्म के साथ काम करते हैं।
अमुंडी यूरोप की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी मानी जाती है और इसके पास ट्रिलियनों यूरो की परिसंपत्तियाँ हैं।
इस तरह की कंपनी का पब्लिक ब्लॉकचेन पर उत्पाद लाना कई संकेत देता है:
1. टोकनाइज़ेशन अब रेगुलेटेड वित्त में प्रवेश कर रहा है
SAFO दिखाता है कि टोकनाइज़्ड एसेट्स पारंपरिक नियामक ढांचे जैसे UCITS के भीतर भी काम कर सकते हैं।
2. पब्लिक ब्लॉकचेन संस्थागत इंफ्रास्ट्रक्चर बन रहे हैं
संस्थाएँ केवल प्राइवेट नेटवर्क तक सीमित नहीं हैं; वे एथेरियम, स्टेलर और सोलाना जैसे ओपन नेटवर्क का भी प्रयोग कर रही हैं।
3. ट्रेज़री और कोलैटरल उपयोग‑मामले पहले उभर रहे हैं
अल्पकालिक फंड और कैश‑इक्विवेलेंट उत्पाद टोकनाइज़ेशन के शुरुआती उम्मीदवार होते हैं क्योंकि उन्हें तेज़ सेटलमेंट और निरंतर ट्रांसफर से लाभ मिलता है।
SAFO एक बड़े रुझान का हिस्सा है—रियल‑वर्ल्ड एसेट्स (RWAs) जैसे फंड, बॉन्ड और मनी‑मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स को ब्लॉकचेन पर टोकनाइज़ करना।
इसका उद्देश्य है:
हालाँकि इस बदलाव का पूरा प्रभाव अभी विकसित हो रहा है, लेकिन SAFO जैसी पहलें दिखाती हैं कि टोकनाइज़ेशन अब केवल प्रूफ‑ऑफ‑कांसेप्ट नहीं रहा—यह पब्लिक ब्लॉकचेन पर चलने वाले वास्तविक संस्थागत वित्तीय उत्पादों की दिशा में बढ़ रहा है।
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