2025–2026 में यूक्रेनी ड्रोन हमलों ने रूस की कई बड़ी रिफाइनरियों को अस्थायी रूप से बंद या धीमा किया, जिससे कुल रिफाइनिंग क्षमता का लगभग एक चौथाई प्रभावित हुआ। क्राइमिया के रूसी‑नियंत्रित सेवास्तोपोल में पेट्रोल पर 20 लीटर की सीमा और डीज़ल कूपन जैसी राशनिंग लागू करनी पड़ी, जबकि कुछ इलाकों में ईंधन की कमी और लंबी कतार...

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: How have Ukrainian drone strikes on Russian oil refineries in 2025–2026 affected Russia’s fuel supply and economy, including the shutdown of. Article summary: Yes—these strikes appear to be creating real, cumulative pressure on Russia’s fuel system and oil-dependent economy, though not a collapse. By May 2026, repeated Ukrainian drone attacks had forced shutdowns or partial st. Topic tags: general, general web. Reference image context from search candidates: Reference image 1: visual subject "Ukraine has carried out more than 20 strikes on Russian oil infrastructure since the beginning of the year, targeting refineries, export terminals and pipelines, costing Russia ove" source context "Impact of Ukrainian attacks on Russian refineries since start of year ..." Reference image 2: visual subject "Smoke rises from a fir
यूक्रेन‑रूस युद्ध में ड्रोन हमले अब केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहे। 2025–2026 के दौरान यूक्रेन ने रूस की तेल रिफाइनरियों, पाइपलाइनों और ईंधन भंडारण सुविधाओं को निशाना बनाकर ऊर्जा अवसंरचना पर दबाव बढ़ाने की रणनीति अपनाई।
विश्लेषकों के अनुसार इन हमलों का असर धीरे‑धीरे रूस की ईंधन आपूर्ति श्रृंखला और तेल‑आधारित अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है। कई रिफाइनरियों को बंद करना पड़ा, कुछ क्षेत्रों में ईंधन की कमी देखी गई और सरकार को घरेलू बाजार बचाने के लिए निर्यात सीमित करना पड़ा।
यूक्रेनी ड्रोन हमलों के बाद रूस की कई प्रमुख तेल रिफाइनरियाँ अस्थायी रूप से बंद या कम क्षमता पर चलने लगीं। प्रभावित संयंत्रों में रियाज़ान (Ryazan), मॉस्को और किरीशी (Kirishi) जैसी बड़ी रिफाइनरियाँ शामिल हैं, साथ ही यारोस्लाव्ल और निज़नी नोवगोरोद जैसे अन्य औद्योगिक केंद्र भी प्रभावित हुए।
मई 2026 के मध्य में:
इन प्रभावित संयंत्रों की संयुक्त प्रोसेसिंग क्षमता 83 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष से अधिक है, जो लगभग 238,000 टन प्रतिदिन के बराबर है। यह रूस की कुल रिफाइनिंग क्षमता का लगभग एक चौथाई माना जाता है।
क्योंकि ये रिफाइनरियाँ रूस के पेट्रोल और डीज़ल उत्पादन का बड़ा हिस्सा बनाती हैं, इसलिए इनका रुकना या धीमा होना पूरे देश में ईंधन आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है।
समय के साथ इन हमलों का पैमाना भी बढ़ा है। रॉयटर्स की गणनाओं के अनुसार जनवरी से मई 2026 के बीच यूक्रेनी ड्रोन कम से कम 16 रूसी रिफाइनरियों पर हमला कर चुके थे, जो 2025 की समान अवधि के मुकाबले लगभग दोगुना है।
इन हमलों के कारण वर्ष के विभिन्न समयों पर लगभग 700,000 बैरल प्रतिदिन की रिफाइनिंग क्षमता अस्थायी रूप से प्रभावित हुई।
ऊर्जा विशेषज्ञ बताते हैं कि रिफाइनरी बेहद जटिल औद्योगिक सिस्टम होती हैं। अगर किसी एक महत्वपूर्ण यूनिट या स्टोरेज सुविधा को नुकसान पहुँच जाए, तो पूरे संयंत्र को हफ्तों तक बंद रखना पड़ सकता है जब तक मरम्मत पूरी न हो जाए।
इसके अलावा ड्रोन हमलों ने केवल रिफाइनरियों को ही नहीं बल्कि:
को भी निशाना बनाया है, जिससे ईंधन की लॉजिस्टिक्स और परिवहन और जटिल हो गए।
इन व्यवधानों का असर कुछ क्षेत्रों में सीधे दिखाई देने लगा। क्राइमिया के रूसी‑नियंत्रित शहर सेवास्तोपोल में ईंधन की आपूर्ति घटने के बाद प्रशासन को बिक्री पर सीमाएँ लगानी पड़ीं।
नई व्यवस्था के तहत:
स्थानीय रिपोर्टों में बताया गया कि शहर में:
अधिकारियों ने इसे “लॉजिस्टिक समस्याएँ” बताते हुए कहा कि यह कदम घबराहट में ज्यादा खरीदारी रोकने के लिए उठाया गया।
हालाँकि यह संकट स्थानीय था, लेकिन इससे स्पष्ट हुआ कि रिफाइनरी बंद होने का असर वास्तविक ईंधन आपूर्ति पर पड़ सकता है—खासकर उन क्षेत्रों में जो मुख्यभूमि रूस से आपूर्ति पर निर्भर हैं।
घरेलू ईंधन बाजार को स्थिर रखने के लिए रूसी सरकार ने कई बार निर्यात पर नियंत्रण लगाया है।
2026 में मॉस्को ने घोषणा की कि 1 अप्रैल से 31 जुलाई तक पेट्रोल निर्यात पर प्रतिबंध लगाया जाएगा ताकि देश के भीतर पर्याप्त आपूर्ति बनी रहे और कीमतें न बढ़ें।
ऐसी नीतियाँ घरेलू बाजार को कुछ समय के लिए स्थिर कर सकती हैं, लेकिन इससे रूस की पेट्रोलियम उत्पादों से होने वाली निर्यात आय भी घटती है।
रूस की अर्थव्यवस्था में तेल और गैस क्षेत्र का बड़ा महत्व है। इस क्षेत्र से मिलने वाले कर और निर्यात राजस्व संघीय बजट का बड़ा हिस्सा बनाते हैं।
इसी कारण ऊर्जा अवसंरचना पर हमलों के प्रभाव केवल औद्योगिक स्तर तक सीमित नहीं रहते। विश्लेषकों के अनुसार इनके कारण:
रूस से जुड़े थिंक टैंक TsMAKP (Center for Macroeconomic Analysis and Short‑Term Forecasting) ने चेतावनी दी कि बंदरगाहों और रिफाइनरियों पर हमले तेल निर्यात और उत्पादन को सीमित कर सकते हैं, जिससे देश की आर्थिक वृद्धि धीमी पड़ सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य रूस की ऊर्जा व्यवस्था को तुरंत ध्वस्त करना नहीं, बल्कि उस पर लगातार आर्थिक दबाव बनाना है।
रूस के पास अभी भी बड़ी रिफाइनिंग क्षमता है और कभी‑कभी वह अन्य संयंत्रों या अतिरिक्त क्षमता से नुकसान की भरपाई कर सकता है। लेकिन लगातार हमलों से:
दूसरे शब्दों में, यह रणनीति तेल उद्योग को पूरी तरह खत्म नहीं करती, लेकिन पूरे सिस्टम में लगातार घर्षण और लागत बढ़ाती रहती है।
इन हमलों का पूरा आर्थिक प्रभाव मापना आसान नहीं है। युद्ध शुरू होने के बाद रूस ने पेट्रोल और डीज़ल उत्पादन से जुड़े कई विस्तृत आँकड़े सार्वजनिक करना सीमित कर दिया है।
इस वजह से कई अनुमान उद्योग स्रोतों, उपग्रह तस्वीरों और समाचार एजेंसियों जैसे रॉयटर्स की गणनाओं पर आधारित हैं।
2026 तक आते‑आते यूक्रेन के ड्रोन हमले रूस की ऊर्जा अवसंरचना के लिए एक लगातार चुनौती बन गए हैं। कई प्रमुख रिफाइनरियाँ अस्थायी रूप से बंद हुईं, कभी‑कभी कुल रिफाइनिंग क्षमता का बड़ा हिस्सा प्रभावित हुआ और कुछ क्षेत्रों में ईंधन राशनिंग भी लागू करनी पड़ी।
रूस की तेल प्रणाली अभी भी काम कर रही है, लेकिन बार‑बार के हमलों ने उत्पादन, निर्यात और घरेलू ईंधन आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखना कठिन बना दिया है—जिससे देश की तेल‑निर्भर अर्थव्यवस्था पर दीर्घकालिक दबाव बन रहा है।
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2025–2026 में यूक्रेनी ड्रोन हमलों ने रूस की कई बड़ी रिफाइनरियों को अस्थायी रूप से बंद या धीमा किया, जिससे कुल रिफाइनिंग क्षमता का लगभग एक चौथाई प्रभावित हुआ।
2025–2026 में यूक्रेनी ड्रोन हमलों ने रूस की कई बड़ी रिफाइनरियों को अस्थायी रूप से बंद या धीमा किया, जिससे कुल रिफाइनिंग क्षमता का लगभग एक चौथाई प्रभावित हुआ। क्राइमिया के रूसी‑नियंत्रित सेवास्तोपोल में पेट्रोल पर 20 लीटर की सीमा और डीज़ल कूपन जैसी राशनिंग लागू करनी पड़ी, जबकि कुछ इलाकों में ईंधन की कमी और लंबी कतारें देखी गईं।
हमलों के कारण रूस को घरेलू आपूर्ति बचाने के लिए पेट्रोल निर्यात पर प्रतिबंध लगाना पड़ा और विश्लेषकों के अनुसार इससे तेल निर्यात, उत्पादन और आर्थिक वृद्धि पर दबाव बढ़ा है।