विकसित अर्थव्यवस्थाओं का सरकारी कर्ज 2026 के अंत तक 75.8 ट्रिलियन डॉलर, यानी GDP के करीब 104%, तक पहुंचने का अनुमान है। वहीं G7 की औसत बॉन्ड यील्ड 2008 के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर है।[33][37] अमेरिका में संघीय कर्ज 40 ट्रिलियन डॉलर से ऊपर निकल चुका है, सालाना ब्याज खर्च 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक है और 30 वर्षीय ट्रेजर...
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शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: How have rising long-term government bond yields across the G7—reaching their highest average level since 2008—combined with developed-marke. Article summary: The combination of much larger debt stocks and higher long-term yields is turning fiscal stress into a compounding problem: governments must refinance maturing debt at materially higher coupons, which raises interest bil. Topic tags: general, news, general web, user generated, government. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermar
सरकारी बॉन्ड पर ब्याज दर बढ़ना तब सबसे बड़ी समस्या बनता है, जब सरकार का कर्ज पहले ही बहुत ज्यादा हो। पुराने, कम ब्याज वाले बॉन्ड जब परिपक्व होते हैं, तो सरकारों को उन्हें अधिक महंगी दरों पर नए कर्ज से बदलना पड़ता है। इससे ब्याज भुगतान बढ़ता है और सार्वजनिक सेवाओं, बुनियादी ढांचे या निवेश के लिए बजट में कम जगह बचती है।
यह दबाव अब कई विकसित अर्थव्यवस्थाओं में एक साथ दिखाई दे रहा है। विकसित देशों का सरकारी कर्ज 2026 के अंत तक रिकॉर्ड 75.8 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जो सामूहिक रूप से GDP का करीब 104% है। अकेले 2026 में इसमें 4.2 ट्रिलियन डॉलर की बढ़ोतरी का अनुमान है।33 इसी दौरान G7 देशों की औसत बॉन्ड यील्ड 2008 के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है।
37
बाजार में यील्ड बढ़ते ही सरकार के सभी पुराने बॉन्ड महंगे नहीं हो जाते। फिक्स्ड-रेट वाले मौजूदा बॉन्ड आम तौर पर अपनी मूल कूपन दर पर ही चलते रहते हैं और उनकी परिपक्वता तक ब्याज खर्च नहीं बदलता। असली असर धीरे-धीरे तब आता है, जब पुराने बॉन्ड परिपक्व होते हैं और सरकार को नए बॉन्ड जारी करने पड़ते हैं।
यही देरी जोखिम को कम दिखाई दे सकती है। लेकिन यदि सरकार की उधारी लागत लंबे समय तक नाममात्र आर्थिक वृद्धि दर से ऊपर रहती है और प्राथमिक घाटा भी बना रहता है, तो कर्ज-GDP अनुपात बढ़ता रह सकता है। ऐसी स्थिति में बढ़ता ब्याज खर्च सरकार को और उधार लेने के लिए मजबूर कर सकता है—जिससे कर्ज, निवेशकों का भरोसा और यील्ड के बीच एक नकारात्मक चक्र बन सकता है।
मौजूदा दबाव का कारण केवल केंद्रीय बैंकों की दरें नहीं हैं। बड़े बजट घाटे, महंगाई की अनिश्चितता, रक्षा और भू-राजनीतिक खर्च तथा बहुत लंबी अवधि वाले बॉन्ड की घटती मांग ने विकसित देशों की उधारी लागत बढ़ाई है।35
46
अमेरिका का सकल संघीय कर्ज अगस्त 2026 में 40 ट्रिलियन डॉलर से ऊपर निकल गया और सालाना ब्याज खर्च 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक हो गया।17
19 30-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड भी 5% के पार चली गई और 2007 के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंची, जिससे लंबी अवधि का नया कर्ज जारी करना और पुराने कर्ज को रीफाइनेंस करना महंगा हो गया।
1
अमेरिका को गहरे ट्रेजरी बाजार, दुनिया की प्रमुख रिजर्व करेंसी और डॉलर में उधार लेने की क्षमता का लाभ मिलता है। इससे उसके कर्ज की मांग को सहारा मिलता है, लेकिन यह मूल गणित नहीं बदलता: जब कर्ज का स्टॉक बहुत बड़ा हो और नई उधारी ऊंची दरों पर हो, तो उसका ब्याज चुकाना लगातार महंगा होता जाता है।
महत्वपूर्ण बात किसी एक दिन की यील्ड नहीं, बल्कि भविष्य में होने वाली उधारी और रीफाइनेंसिंग का रास्ता है। यदि बजट घाटा बड़ा बना रहता है, तो अमेरिकी ट्रेजरी को बाजार में लगातार बड़ी मात्रा में बॉन्ड की आपूर्ति करनी होगी। इस आपूर्ति को स्वीकार करने के लिए निवेशक अधिक टर्म प्रीमियम या महंगाई प्रीमियम मांग सकते हैं, जिससे लंबी अवधि की उधारी लागत ऊंची बनी रह सकती है।35
46
ब्रिटेन की स्थिति इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि उसके कर्ज का बड़ा हिस्सा महंगाई से जुड़ा हुआ है। 2026/27 में ब्रिटेन का शुद्ध कर्ज-ब्याज खर्च लगभग 109 अरब पाउंड रहने का अनुमान था, जबकि रक्षा बजट करीब 66 अरब पाउंड था।50 30-वर्षीय गिल्ट यील्ड भी 2026 की बिकवाली के दौरान लगभग 6% तक पहुंच गई, जो 1990 के दशक के अंत के बाद का ऊंचा स्तर था।
51
इसका मतलब है कि ब्रिटेन का बजट ब्याज दरों और महंगाई—दोनों के प्रति अधिक संवेदनशील है। पूरी सरकारी देनदारी के रीफाइनेंस होने से पहले ही लंबी अवधि की महंगी उधारी अन्य प्राथमिकताओं के लिए उपलब्ध धन को कम कर सकती है।
फ्रांस भी इसी तरह के समझौते का सामना कर रहा है। 2026 में उसके सरकारी कर्ज की सर्विसिंग पर लगभग 59 अरब यूरो खर्च होने का अनुमान था।50 यह राशि सार्वजनिक सेवाओं, निवेश, रक्षा और अन्य सरकारी योजनाओं के साथ सीधे प्रतिस्पर्धा करती है। इसलिए फ्रांस की चुनौती केवल बॉन्ड यील्ड का स्तर नहीं, बल्कि कमजोर वृद्धि और बढ़ते ब्याज खर्च के बीच सीमित राजकोषीय गुंजाइश है।
इटली लंबे समय तक ऊंची बॉन्ड यील्ड के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील है। उसके सामने बड़ा कर्ज, धीमी वृद्धि और भारी रीफाइनेंसिंग जरूरतें एक साथ मौजूद हैं। S&P Global Ratings के हवाले से Reuters के अनुसार, 2028 तक इटली का ब्याज खर्च सरकारी राजस्व का लगभग 9% हो सकता है।50
निवेशकों के लिए इटली और जर्मनी की बॉन्ड यील्ड के बीच का अंतर—जिसे इटली-जर्मनी स्प्रेड कहा जाता है—महत्वपूर्ण संकेतक है। इससे पता चलता है कि बाजार में यील्ड की बढ़ोतरी सामान्य वैश्विक दरों के पुनर्मूल्यांकन के कारण है या इटली के राजकोषीय जोखिम को लेकर विशेष चिंता है।
यदि यह स्प्रेड चौड़ा होता है, तो यूरो क्षेत्र में वित्तीय विभाजन को लेकर चिंता फिर बढ़ सकती है। इसका अर्थ यह नहीं कि इटली की ऊंची यील्ड अपने-आप किसी संकट की घोषणा है। लेकिन यह जरूर बताती है कि इटली के पास गलतियों की गुंजाइश कम है। लंबे समय तक महंगी उधारी बजट पर दबाव बढ़ाएगी और राजकोषीय सुधार को राजनीतिक रूप से और कठिन बना सकती है।
जापान की 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड 2.945% तक पहुंच गई, जो सितंबर 1996 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। महंगाई की चिंता और बैंक ऑफ जापान द्वारा दर बढ़ाने की संभावनाओं ने सरकारी बॉन्ड में बिकवाली को बढ़ावा दिया। जापान की 20-वर्षीय और 30-वर्षीय यील्ड भी इस दौरान बढ़ी।2
जापान का सरकारी कर्ज असाधारण रूप से बड़ा है। इसलिए ब्रिटेन या अमेरिका की तुलना में कम दिखने वाली यील्ड भी समय के साथ महत्वपूर्ण असर डाल सकती है, क्योंकि पुराने कर्ज को नई दरों पर रोल ओवर करना पड़ता है। जापान में घरेलू बॉन्ड से मिलने वाला बेहतर रिटर्न वहां के निवेशकों को विदेशी बॉन्ड से कुछ हद तक दूर कर सकता है, जिससे वैश्विक यील्ड पर भी ऊपर की ओर दबाव पड़ सकता है।
जापान का मामला यह दिखाता है कि जोखिम केवल उन देशों तक सीमित नहीं है जिन्हें बाजार पहले से राजकोषीय रूप से कमजोर मानता है। दशकों तक बेहद कम ब्याज दरों के बाद पूंजी की लागत में बदलाव पूरी अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।
जर्मनी का कर्ज बोझ अधिकांश G7 देशों की तुलना में कम है, लेकिन उसकी लंबी अवधि की यील्ड भी कई वर्षों के ऊंचे स्तरों तक पहुंची है।36 रक्षा और बुनियादी ढांचे पर अधिक खर्च की जरूरत के कारण मजबूत शुरुआती वित्तीय स्थिति के बावजूद जर्मनी को अतिरिक्त उधारी की आवश्यकता हो सकती है।
जर्मनी का उदाहरण बताता है कि कम कर्ज सरकार को अधिक मजबूती जरूर देता है, लेकिन महंगाई, टर्म प्रीमियम या बॉन्ड आपूर्ति के वैश्विक पुनर्मूल्यांकन से उसे पूरी तरह सुरक्षा नहीं मिलती।
ऊंची रीफाइनेंसिंग लागत से निपटने के लिए सरकारों के पास कुछ विकल्प हैं, लेकिन इनमें से कोई भी आसान नहीं है:
मुख्य सवाल यह है कि सरकारी कर्ज पर प्रभावी ब्याज दर और नाममात्र GDP वृद्धि के बीच संबंध कैसा है। तेज नाममात्र वृद्धि से समान कर्ज को संभालना आसान हो सकता है। इसके विपरीत, कमजोर वृद्धि और लगातार ऊंची उधारी लागत कर्ज को स्थिर करना कठिन बना देती है।
5% से अधिक यील्ड देने वाला सरकारी बॉन्ड अब शून्य या बेहद कम ब्याज दरों वाले दौर की तुलना में शेयरों का वास्तविक विकल्प बन सकता है। नियमित आय, पूंजी संरक्षण या भविष्य की देनदारियों से मिलान चाहने वाले निवेशकों के लिए ऐसी यील्ड आकर्षक लग सकती है।
लेकिन ऊंची यील्ड का अर्थ अपने-आप सुरक्षित निवेश नहीं है।
ऊंची जोखिम-मुक्त दरें शेयरों के मूल्यांकन पर भी दबाव डालती हैं, खासकर उन ग्रोथ कंपनियों पर जिनका बड़ा मुनाफा कई वर्षों बाद आने की उम्मीद होती है। जब बॉन्ड से 5% या उससे अधिक नाममात्र रिटर्न मिल सकता है, तो भविष्य के नकदी प्रवाह का वर्तमान मूल्य घट जाता है। ऐसे में शेयरों को आकर्षक बने रहने के लिए तेज आय वृद्धि या कम मूल्यांकन की जरूरत पड़ती है।
सरकारी बॉन्ड यील्ड पूरी अर्थव्यवस्था के लिए एक संदर्भ दर का काम करती है। इसके बढ़ने से:
यह वृद्धि पर भी उलटा असर डाल सकता है। अधिक ब्याज खर्च सरकारी निवेश को पीछे धकेल सकता है, जबकि कर वृद्धि या खर्च कटौती मांग को कमजोर कर सकती है। धीमी वृद्धि के कारण कर्ज-GDP अनुपात को स्थिर करना और मुश्किल हो जाता है।
मुख्य जोखिम यह नहीं है कि हर G7 देश अचानक बाजार से कर्ज लेना बंद कर देगा। असली जोखिम यह है कि ऊंची यील्ड धीरे-धीरे बड़े कर्ज के बोझ को भविष्य के बजट पर स्थायी दावा बना देगी।
विकसित देशों का सरकारी कर्ज 75.8 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है और G7 की औसत उधारी लागत 2008 के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर है। ऐसे माहौल में कर्ज का रीफाइनेंस करना अब महज प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि रणनीतिक बाधा बनता जा रहा है।33
37
सबसे अधिक जोखिम उन देशों को है जहां कर्ज ऊंचा, वृद्धि कमजोर, बजट घाटा बड़ा और निकट अवधि में रीफाइनेंसिंग जरूरतें भारी हैं। निवेशकों और कारोबारों के लिए इसका दोहरा अर्थ है: सरकारी बॉन्ड पहले से अधिक प्रतिस्पर्धी हो सकते हैं, लेकिन पूंजी भी महंगी हो गई है और बाजार में अस्थिरता लंबे समय तक बनी रह सकती है।
Studio Global AI
इस पृष्ठ में एक स्रोत-समर्थित उत्तर शामिल है जिसे आप Studio Global के अंदर जारी रख सकते हैं।
विकसित अर्थव्यवस्थाओं का सरकारी कर्ज 2026 के अंत तक 75.8 ट्रिलियन डॉलर, यानी GDP के करीब 104%, तक पहुंचने का अनुमान है। वहीं G7 की औसत बॉन्ड यील्ड 2008 के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर है।[33][37]
विकसित अर्थव्यवस्थाओं का सरकारी कर्ज 2026 के अंत तक 75.8 ट्रिलियन डॉलर, यानी GDP के करीब 104%, तक पहुंचने का अनुमान है। वहीं G7 की औसत बॉन्ड यील्ड 2008 के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर है।[33][37] अमेरिका में संघीय कर्ज 40 ट्रिलियन डॉलर से ऊपर निकल चुका है, सालाना ब्याज खर्च 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक है और 30 वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 5% के पार पहुंच गई है।[17][19][1]
यह हर देश में तत्काल संकट का संकेत नहीं है, बल्कि राजकोषीय लचीलापन घटने का संकेत है। लगातार ऊंची यील्ड और कमजोर वृद्धि से इटली, ब्रिटेन, फ्रांस और जापान विशेष रूप से संवेदनशील हैं।
विकसित अर्थव्यवस्थाओं का सरकारी कर्ज 2026 के अंत तक 75.8 ट्रिलियन डॉलर, यानी GDP के करीब 104%, तक पहुंचने का अनुमान है। वहीं G7 की औसत बॉन्ड यील्ड 2008 के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर है।[33][37] अमेरिका में संघीय कर्ज 40 ट्रिलियन डॉलर से ऊपर निकल चुका है, सालाना ब्याज खर्च 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक है और 30 वर्षीय ट्रेजर...
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Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: How have rising long-term government bond yields across the G7—reaching their highest average level since 2008—combined with developed-marke. Article summary: The combination of much larger debt stocks and higher long-term yields is turning fiscal stress into a compounding problem: governments must refinance maturing debt at materially higher coupons, which raises interest bil. Topic tags: general, news, general web, user generated, government. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermar
सरकारी बॉन्ड पर ब्याज दर बढ़ना तब सबसे बड़ी समस्या बनता है, जब सरकार का कर्ज पहले ही बहुत ज्यादा हो। पुराने, कम ब्याज वाले बॉन्ड जब परिपक्व होते हैं, तो सरकारों को उन्हें अधिक महंगी दरों पर नए कर्ज से बदलना पड़ता है। इससे ब्याज भुगतान बढ़ता है और सार्वजनिक सेवाओं, बुनियादी ढांचे या निवेश के लिए बजट में कम जगह बचती है।
यह दबाव अब कई विकसित अर्थव्यवस्थाओं में एक साथ दिखाई दे रहा है। विकसित देशों का सरकारी कर्ज 2026 के अंत तक रिकॉर्ड 75.8 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जो सामूहिक रूप से GDP का करीब 104% है। अकेले 2026 में इसमें 4.2 ट्रिलियन डॉलर की बढ़ोतरी का अनुमान है।33 इसी दौरान G7 देशों की औसत बॉन्ड यील्ड 2008 के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है।
37
बाजार में यील्ड बढ़ते ही सरकार के सभी पुराने बॉन्ड महंगे नहीं हो जाते। फिक्स्ड-रेट वाले मौजूदा बॉन्ड आम तौर पर अपनी मूल कूपन दर पर ही चलते रहते हैं और उनकी परिपक्वता तक ब्याज खर्च नहीं बदलता। असली असर धीरे-धीरे तब आता है, जब पुराने बॉन्ड परिपक्व होते हैं और सरकार को नए बॉन्ड जारी करने पड़ते हैं।
यही देरी जोखिम को कम दिखाई दे सकती है। लेकिन यदि सरकार की उधारी लागत लंबे समय तक नाममात्र आर्थिक वृद्धि दर से ऊपर रहती है और प्राथमिक घाटा भी बना रहता है, तो कर्ज-GDP अनुपात बढ़ता रह सकता है। ऐसी स्थिति में बढ़ता ब्याज खर्च सरकार को और उधार लेने के लिए मजबूर कर सकता है—जिससे कर्ज, निवेशकों का भरोसा और यील्ड के बीच एक नकारात्मक चक्र बन सकता है।
मौजूदा दबाव का कारण केवल केंद्रीय बैंकों की दरें नहीं हैं। बड़े बजट घाटे, महंगाई की अनिश्चितता, रक्षा और भू-राजनीतिक खर्च तथा बहुत लंबी अवधि वाले बॉन्ड की घटती मांग ने विकसित देशों की उधारी लागत बढ़ाई है।35
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अमेरिका का सकल संघीय कर्ज अगस्त 2026 में 40 ट्रिलियन डॉलर से ऊपर निकल गया और सालाना ब्याज खर्च 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक हो गया।17
19 30-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड भी 5% के पार चली गई और 2007 के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंची, जिससे लंबी अवधि का नया कर्ज जारी करना और पुराने कर्ज को रीफाइनेंस करना महंगा हो गया।
1
अमेरिका को गहरे ट्रेजरी बाजार, दुनिया की प्रमुख रिजर्व करेंसी और डॉलर में उधार लेने की क्षमता का लाभ मिलता है। इससे उसके कर्ज की मांग को सहारा मिलता है, लेकिन यह मूल गणित नहीं बदलता: जब कर्ज का स्टॉक बहुत बड़ा हो और नई उधारी ऊंची दरों पर हो, तो उसका ब्याज चुकाना लगातार महंगा होता जाता है।
महत्वपूर्ण बात किसी एक दिन की यील्ड नहीं, बल्कि भविष्य में होने वाली उधारी और रीफाइनेंसिंग का रास्ता है। यदि बजट घाटा बड़ा बना रहता है, तो अमेरिकी ट्रेजरी को बाजार में लगातार बड़ी मात्रा में बॉन्ड की आपूर्ति करनी होगी। इस आपूर्ति को स्वीकार करने के लिए निवेशक अधिक टर्म प्रीमियम या महंगाई प्रीमियम मांग सकते हैं, जिससे लंबी अवधि की उधारी लागत ऊंची बनी रह सकती है।35
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ब्रिटेन की स्थिति इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि उसके कर्ज का बड़ा हिस्सा महंगाई से जुड़ा हुआ है। 2026/27 में ब्रिटेन का शुद्ध कर्ज-ब्याज खर्च लगभग 109 अरब पाउंड रहने का अनुमान था, जबकि रक्षा बजट करीब 66 अरब पाउंड था।50 30-वर्षीय गिल्ट यील्ड भी 2026 की बिकवाली के दौरान लगभग 6% तक पहुंच गई, जो 1990 के दशक के अंत के बाद का ऊंचा स्तर था।
51
इसका मतलब है कि ब्रिटेन का बजट ब्याज दरों और महंगाई—दोनों के प्रति अधिक संवेदनशील है। पूरी सरकारी देनदारी के रीफाइनेंस होने से पहले ही लंबी अवधि की महंगी उधारी अन्य प्राथमिकताओं के लिए उपलब्ध धन को कम कर सकती है।
फ्रांस भी इसी तरह के समझौते का सामना कर रहा है। 2026 में उसके सरकारी कर्ज की सर्विसिंग पर लगभग 59 अरब यूरो खर्च होने का अनुमान था।50 यह राशि सार्वजनिक सेवाओं, निवेश, रक्षा और अन्य सरकारी योजनाओं के साथ सीधे प्रतिस्पर्धा करती है। इसलिए फ्रांस की चुनौती केवल बॉन्ड यील्ड का स्तर नहीं, बल्कि कमजोर वृद्धि और बढ़ते ब्याज खर्च के बीच सीमित राजकोषीय गुंजाइश है।
इटली लंबे समय तक ऊंची बॉन्ड यील्ड के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील है। उसके सामने बड़ा कर्ज, धीमी वृद्धि और भारी रीफाइनेंसिंग जरूरतें एक साथ मौजूद हैं। S&P Global Ratings के हवाले से Reuters के अनुसार, 2028 तक इटली का ब्याज खर्च सरकारी राजस्व का लगभग 9% हो सकता है।50
निवेशकों के लिए इटली और जर्मनी की बॉन्ड यील्ड के बीच का अंतर—जिसे इटली-जर्मनी स्प्रेड कहा जाता है—महत्वपूर्ण संकेतक है। इससे पता चलता है कि बाजार में यील्ड की बढ़ोतरी सामान्य वैश्विक दरों के पुनर्मूल्यांकन के कारण है या इटली के राजकोषीय जोखिम को लेकर विशेष चिंता है।
यदि यह स्प्रेड चौड़ा होता है, तो यूरो क्षेत्र में वित्तीय विभाजन को लेकर चिंता फिर बढ़ सकती है। इसका अर्थ यह नहीं कि इटली की ऊंची यील्ड अपने-आप किसी संकट की घोषणा है। लेकिन यह जरूर बताती है कि इटली के पास गलतियों की गुंजाइश कम है। लंबे समय तक महंगी उधारी बजट पर दबाव बढ़ाएगी और राजकोषीय सुधार को राजनीतिक रूप से और कठिन बना सकती है।
जापान की 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड 2.945% तक पहुंच गई, जो सितंबर 1996 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। महंगाई की चिंता और बैंक ऑफ जापान द्वारा दर बढ़ाने की संभावनाओं ने सरकारी बॉन्ड में बिकवाली को बढ़ावा दिया। जापान की 20-वर्षीय और 30-वर्षीय यील्ड भी इस दौरान बढ़ी।2
जापान का सरकारी कर्ज असाधारण रूप से बड़ा है। इसलिए ब्रिटेन या अमेरिका की तुलना में कम दिखने वाली यील्ड भी समय के साथ महत्वपूर्ण असर डाल सकती है, क्योंकि पुराने कर्ज को नई दरों पर रोल ओवर करना पड़ता है। जापान में घरेलू बॉन्ड से मिलने वाला बेहतर रिटर्न वहां के निवेशकों को विदेशी बॉन्ड से कुछ हद तक दूर कर सकता है, जिससे वैश्विक यील्ड पर भी ऊपर की ओर दबाव पड़ सकता है।
जापान का मामला यह दिखाता है कि जोखिम केवल उन देशों तक सीमित नहीं है जिन्हें बाजार पहले से राजकोषीय रूप से कमजोर मानता है। दशकों तक बेहद कम ब्याज दरों के बाद पूंजी की लागत में बदलाव पूरी अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।
जर्मनी का कर्ज बोझ अधिकांश G7 देशों की तुलना में कम है, लेकिन उसकी लंबी अवधि की यील्ड भी कई वर्षों के ऊंचे स्तरों तक पहुंची है।36 रक्षा और बुनियादी ढांचे पर अधिक खर्च की जरूरत के कारण मजबूत शुरुआती वित्तीय स्थिति के बावजूद जर्मनी को अतिरिक्त उधारी की आवश्यकता हो सकती है।
जर्मनी का उदाहरण बताता है कि कम कर्ज सरकार को अधिक मजबूती जरूर देता है, लेकिन महंगाई, टर्म प्रीमियम या बॉन्ड आपूर्ति के वैश्विक पुनर्मूल्यांकन से उसे पूरी तरह सुरक्षा नहीं मिलती।
ऊंची रीफाइनेंसिंग लागत से निपटने के लिए सरकारों के पास कुछ विकल्प हैं, लेकिन इनमें से कोई भी आसान नहीं है:
मुख्य सवाल यह है कि सरकारी कर्ज पर प्रभावी ब्याज दर और नाममात्र GDP वृद्धि के बीच संबंध कैसा है। तेज नाममात्र वृद्धि से समान कर्ज को संभालना आसान हो सकता है। इसके विपरीत, कमजोर वृद्धि और लगातार ऊंची उधारी लागत कर्ज को स्थिर करना कठिन बना देती है।
5% से अधिक यील्ड देने वाला सरकारी बॉन्ड अब शून्य या बेहद कम ब्याज दरों वाले दौर की तुलना में शेयरों का वास्तविक विकल्प बन सकता है। नियमित आय, पूंजी संरक्षण या भविष्य की देनदारियों से मिलान चाहने वाले निवेशकों के लिए ऐसी यील्ड आकर्षक लग सकती है।
लेकिन ऊंची यील्ड का अर्थ अपने-आप सुरक्षित निवेश नहीं है।
ऊंची जोखिम-मुक्त दरें शेयरों के मूल्यांकन पर भी दबाव डालती हैं, खासकर उन ग्रोथ कंपनियों पर जिनका बड़ा मुनाफा कई वर्षों बाद आने की उम्मीद होती है। जब बॉन्ड से 5% या उससे अधिक नाममात्र रिटर्न मिल सकता है, तो भविष्य के नकदी प्रवाह का वर्तमान मूल्य घट जाता है। ऐसे में शेयरों को आकर्षक बने रहने के लिए तेज आय वृद्धि या कम मूल्यांकन की जरूरत पड़ती है।
सरकारी बॉन्ड यील्ड पूरी अर्थव्यवस्था के लिए एक संदर्भ दर का काम करती है। इसके बढ़ने से:
यह वृद्धि पर भी उलटा असर डाल सकता है। अधिक ब्याज खर्च सरकारी निवेश को पीछे धकेल सकता है, जबकि कर वृद्धि या खर्च कटौती मांग को कमजोर कर सकती है। धीमी वृद्धि के कारण कर्ज-GDP अनुपात को स्थिर करना और मुश्किल हो जाता है।
मुख्य जोखिम यह नहीं है कि हर G7 देश अचानक बाजार से कर्ज लेना बंद कर देगा। असली जोखिम यह है कि ऊंची यील्ड धीरे-धीरे बड़े कर्ज के बोझ को भविष्य के बजट पर स्थायी दावा बना देगी।
विकसित देशों का सरकारी कर्ज 75.8 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है और G7 की औसत उधारी लागत 2008 के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर है। ऐसे माहौल में कर्ज का रीफाइनेंस करना अब महज प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि रणनीतिक बाधा बनता जा रहा है।33
37
सबसे अधिक जोखिम उन देशों को है जहां कर्ज ऊंचा, वृद्धि कमजोर, बजट घाटा बड़ा और निकट अवधि में रीफाइनेंसिंग जरूरतें भारी हैं। निवेशकों और कारोबारों के लिए इसका दोहरा अर्थ है: सरकारी बॉन्ड पहले से अधिक प्रतिस्पर्धी हो सकते हैं, लेकिन पूंजी भी महंगी हो गई है और बाजार में अस्थिरता लंबे समय तक बनी रह सकती है।
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इस पृष्ठ में एक स्रोत-समर्थित उत्तर शामिल है जिसे आप Studio Global के अंदर जारी रख सकते हैं।
विकसित अर्थव्यवस्थाओं का सरकारी कर्ज 2026 के अंत तक 75.8 ट्रिलियन डॉलर, यानी GDP के करीब 104%, तक पहुंचने का अनुमान है। वहीं G7 की औसत बॉन्ड यील्ड 2008 के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर है।[33][37]
विकसित अर्थव्यवस्थाओं का सरकारी कर्ज 2026 के अंत तक 75.8 ट्रिलियन डॉलर, यानी GDP के करीब 104%, तक पहुंचने का अनुमान है। वहीं G7 की औसत बॉन्ड यील्ड 2008 के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर है।[33][37] अमेरिका में संघीय कर्ज 40 ट्रिलियन डॉलर से ऊपर निकल चुका है, सालाना ब्याज खर्च 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक है और 30 वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 5% के पार पहुंच गई है।[17][19][1]
यह हर देश में तत्काल संकट का संकेत नहीं है, बल्कि राजकोषीय लचीलापन घटने का संकेत है। लगातार ऊंची यील्ड और कमजोर वृद्धि से इटली, ब्रिटेन, फ्रांस और जापान विशेष रूप से संवेदनशील हैं।