जब कोई वाहन Mach 5 या उससे अधिक गति से उड़ता है, तो उसके चारों ओर एक सघन शॉकवेव (आघात तरंग) और एक थर्मल बाउंड्री लेयर (तापीय सीमा परत) बन जाती है। ये वायुगतिकीय प्रभाव तारों से आने वाली रोशनी को मोड़ देते हैं — ठीक वैसे ही जैसे पानी में डूबी हुई पेंसिल मुड़ी हुई दिखती है ।
सामान्य स्टार सेंसर इस विकृत रोशनी को समझ नहीं पाते और दिशा बताने में नाकाम हो जाते हैं। इसके अलावा, उसी परत से उत्पन्न तीव्र तापीय विकिरण तारों की हल्की रोशनी को दबा देता है ।
ग्वांगडोंग टीम ने इस समस्या का एक अनोखा हल निकाला। उन्होंने यह अनुमान लगाने की एक विधि विकसित की कि हाइपरसोनिक गति पर तारों की रोशनी किस प्रकार मुड़ेगी, और फिर उसी हिसाब से सुधार (करेक्शन) किया ।
उन्होंने निर्माण किया:
परीक्षणों में इस सिस्टम ने हस्तक्षेप-मुक्त वातावरण में 99% से अधिक स्टार-पैटर्न पहचान दर हासिल की, और भारी हस्तक्षेप वाली स्थितियों में भी 80% से अधिक पहचान दर बनाए रखी ।
यह कोई नई अवधारणा नहीं है। सदियों पहले समुद्री यात्री तारों को देखकर ही रास्ता खोजते थे। यह सिस्टम उसी प्राचीन सिद्धांत पर काम करता है: तारों को स्थिर संदर्भ बिंदुओं के रूप में इस्तेमाल करके, सेंसर वाहन की स्थिति और दिशा का निर्धारण करता है ।
मुख्य लाभ: इसके लिए किसी सैटेलाइट, ग्राउंड स्टेशन या रेडियो सिग्नल की ज़रूरत नहीं होती — यह पूरी तरह से निष्क्रिय (पैसिव) और स्वायत्त (ऑटोनॉमस) है ।
| विशेषता | आकाशीय (तारा-आधारित) — यह सिस्टम | सैटेलाइट (GPS/BeiDou) | इनर्शियल नेविगेशन (INS) |
|---|---|---|---|
| बाहरी सिग्नल | कोई नहीं — केवल तारों की रोशनी | सैटेलाइट सिग्नल अनिवार्य | कोई नहीं — आंतरिक सेंसर |
| इलेक्ट्रोमैग्नेटिक जैमिंग से सुरक्षा | बहुत अधिक — रेडियो तरंगों पर निर्भर नहीं | बहुत कमज़ोर — आसानी से जाम किया जा सकता है | बहुत अधिक |
| स्वायत्तता | पूर्णतः स्वायत्त | सैटेलाइट पर निर्भर | पूर्णतः स्वायत्त |
| सीमाएँ | बादल या दिन के उजाले में असर कम हो सकता है; ऐतिहासिक रूप से GPS से कम सटीक | वैश्विक कवरेज, लेकिन EW अटैक का आसान निशाना | समय के साथ ड्रिफ्ट होती है, जिससे लंबी दूरी पर लक्ष्य भटक सकता है |
| सिनर्जी | INS ड्रिफ्ट को ठीक कर सकता है — संकर (हाइब्रिड) सिस्टम के रूप में | INS के साथ जोड़ा जाता है | GPS या तारों से अपडेट आवश्यक |
GPS और BeiDou जैसे सैटेलाइट सिस्टम की सबसे बड़ी कमज़ोरी यह है कि वे इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर (जैमिंग) के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हैं। दुश्मन आसानी से इन सिग्नलों को जाम या स्पूफ (धोखाधड़ी) कर सकता है ।
हाइपरसोनिक हथियारों के लिए यह एक बड़ी समस्या थी, क्योंकि वे Mach 5 से अधिक गति से उड़ते हैं और उनके पास लक्ष्य तक पहुँचने का बहुत कम समय होता है। शुद्ध इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम (INS) में समय के साथ ड्रिफ्ट (बहाव) होता रहता है ।
नया तारा-आधारित सिस्टम INS की ड्रिफ्ट को आकाशीय प्रेक्षणों से ठीक करता है, जिससे लंबी दूरी की उड़ानों में भी सटीकता बनी रहती है — बिना किसी सैटेलाइट सिग्नल के। यह हाइपरसोनिक हथियारों की प्राथमिक नेविगेशन कमज़ोरी को ही खत्म कर देता है ।