होर्मुज़ जलडमरूमध्य के आसपास महीनों से जारी व्यवधानों ने वैश्विक तेल बाजार का सुरक्षा-कवच काफी पतला कर दिया है। सऊदी अरामको के मुख्य कार्यकारी अमीन नासिर का कहना है कि करीब 3 अरब बैरल की सकल तेल आपूर्ति का नुकसान हुआ है। उनके मुताबिक, मांग पूरी करते हुए भंडार दोबारा बनाने में दो साल तक लग सकते हैं। विटोल के प्रमुख रसेल हार्डी ने भी चेताया है कि सर्दियों में बाजार को संतुलित रखने के लिए मध्य पूर्व से तेल का नियमित निर्यात जरूरी होगा।
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आपूर्ति का नुकसान और भंडार से निकला तेल एक ही बात नहीं
नासिर का करीब 3 अरब बैरल का अनुमान व्यवधान के दौरान हुई सकल आपूर्ति की कमी बताता है—यह भंडार से निकाले गए तेल की मात्रा नहीं है। अलग से, कमी का असर कम करने के लिए भंडारों से 1 अरब बैरल से अधिक तेल निकाला गया है। इसलिए इन दोनों आंकड़ों को जोड़कर भंडार में हुई कुल गिरावट बताना सही नहीं होगा: वे संकट के दो अलग पहलुओं को मापते हैं।
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भंडार का कुल आंकड़ा भी यह नहीं बताता कि कितना तेल वास्तव में बाजार तक पहुंच सकता है। नासिर के अनुसार, दुनिया में वाणिज्यिक भंडार 6 अरब बैरल से कम रह गए हैं और उनका बड़ा हिस्सा व्यावहारिक रूप से उपलब्ध नहीं है। उन्होंने अनुमान लगाया कि दर्ज भंडार का 10% से भी कम हिस्सा आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है।
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पश्चिमी देशों के घटते भंडार से खाड़ी के निर्यात की अहमियत बढ़ी
हार्डी ने कहा कि पश्चिमी देशों के भंडार काफी हद तक खाली हो चुके हैं। उनके मुताबिक, सर्दियों में बाजार को संतुलित रखने के लिए मध्य पूर्व से जहाजों के जरिए रोज़ करीब 10–14 मिलियन बैरल तेल और तेल उत्पादों का निर्यात होना जरूरी है। खाड़ी से हाल में बढ़े निर्यात से आपूर्ति को सहारा मिल सकता है, लेकिन ये प्रवाह कमज़ोर पड़े तो बाजार पर दबाव बढ़ सकता है।
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कम उपयोगी भंडार का मतलब है कि अगली आपूर्ति बाधा को झेलने की गुंजाइश भी कम है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, उद्योग जगत के अधिकारियों का मानना है कि आसानी से उपलब्ध तेल घटने से बाजार अधिक नाज़ुक हुआ है और कीमतों पर ऊपर की ओर दबाव बना है। हार्डी ने यह भी चेताया कि डीज़ल समेत रिफाइंड ईंधनों की तंगी सर्दियों तक बनी रह सकती है।
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जी7 के भंडार से राहत मिलेगी, लेकिन समस्या हल नहीं होगी
जी7 देशों ने अपने रणनीतिक भंडार से कच्चे तेल और डीज़ल के करीब 100 मिलियन बैरल जारी करने पर सहमति जताई है। रणनीतिक भंडार वे आपात भंडार हैं जिन्हें आपूर्ति संकट के समय बाजार में लाया जा सकता है। नासिर ने इस कदम को अस्थायी राहत बताया—आपूर्ति और मांग के बीच बुनियादी असंतुलन का समाधान नहीं। इससे अभी कुछ अतिरिक्त तेल बाजार में आएगा, लेकिन बाधित आपूर्ति अपने-आप बहाल नहीं होगी और घटे हुए भंडार भी तुरंत नहीं भरेंगे।
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भंडार फिर भरने में दो साल तक लग सकते हैं
नासिर के मुताबिक, होर्मुज़ जलडमरूमध्य पूरी तरह खुल भी जाए, तब भी मांग पूरी करते हुए तेल भंडार बहाल करने में दो साल तक लग सकते हैं। यह अनुमान इस शर्त के साथ है कि जहाजों की आवाजाही सामान्य हो; इसका मतलब यह नहीं कि रास्ता खुलते ही घटे हुए भंडार तुरंत भर जाएंगे।
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बाजार के लिए इसका व्यावहारिक संकेत साफ है: आपूर्ति में किसी भी नई रुकावट का असर बना रह सकता है। आसानी से उपलब्ध भंडार सीमित हैं, खाड़ी से निर्यात पर निर्भरता अहम है और सर्दियों में डीज़ल की तंगी की आशंका है। आपात भंडार से तेल निकालने से निकट अवधि का दबाव कम हो सकता है, लेकिन व्यापक बाजार अब भी व्यवधानों के प्रति संवेदनशील रहेगा।
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