ऐसी गतिविधियाँ अक्सर “आर्टिसनल” यानी छोटे स्तर के खनन के रूप में शुरू होती हैं, लेकिन जब संगठित समूह श्रमिक, ट्रांसपोर्ट और सुरक्षा का नेटवर्क बना लेते हैं तो यह लगभग अर्ध‑औद्योगिक स्तर पर पहुँच सकती हैं। इससे लाइसेंसधारी कंपनियाँ अपने ही क्षेत्रों पर नियंत्रण खोने लगती हैं।
तनाव 2026 में अचानक बढ़ गया।
10–11 मार्च 2026 की रात, बॉस माइनिंग कंसेशन के भीतर स्थित साफी (Safi) खदान क्षेत्र में भूस्खलन हुआ। इस हादसे में 11 अवैध खनिकों की मौत हो गई जो वहाँ बिना अनुमति के काम कर रहे थे।
अधिकारियों और कंपनी के अनुसार, यह दुर्घटना अनधिकृत खनन से कमजोर हुई जमीन के कारण हुई। जिस क्षेत्र में हादसा हुआ वह औद्योगिक कंसेशन (PE469) का हिस्सा है, जहाँ आर्टिसनल खनन कानूनन अवैध है।
घटना के बाद बॉस माइनिंग ने सरकार से प्रभावित इलाकों में कंपनी की “कानूनी पहुँच बहाल” करने की मांग की।
सरकार ने भी प्रतिक्रिया दी और घोषणा की कि अवैध खनिकों को वहाँ से हटाकर निर्धारित आर्टिसनल खनन क्षेत्रों में स्थानांतरित किया जाएगा।
किसी लाइसेंस प्राप्त खदान में अवैध खनन कई समस्याएँ पैदा करता है:
बॉस माइनिंग के मामले में, बड़ी संख्या में अवैध खनिकों की मौजूदगी ने खदान के कुछ हिस्सों तक कंपनी की पहुँच सीमित कर दी है, जिससे परियोजना की आर्थिक व्यवहार्यता और सुरक्षा दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब कोबाल्ट वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन का अहम खनिज बन चुका है।
सरकार ने हाल के वर्षों में निर्यात पर नियंत्रण मजबूत करने की कोशिश की है। 2025 में अस्थायी प्रतिबंध के बाद कोबाल्ट निर्यात को एक सख्त कोटा प्रणाली के तहत नियंत्रित किया गया, जिसमें कंपनियों को सरकार से अनुमति लेकर ही निर्यात करना पड़ता है।
यदि बड़े खनन कंसेशन अवैध गतिविधियों के कारण सही तरह से संचालित नहीं हो पाते, तो सरकार को कर, रॉयल्टी और निर्यात राजस्व में बड़ा नुकसान हो सकता है।
कोबाल्ट केवल एक धातु नहीं—यह वैश्विक रणनीतिक संसाधन बन चुका है।
कांगो के कोबाल्ट का अधिकांश हिस्सा चीन की रिफाइनिंग और बैटरी सप्लाई‑चेन में जाता है। दूसरी ओर, अमेरिका भी अपने उद्योगों के लिए वैकल्पिक और सुरक्षित सप्लाई‑चेन बनाने की कोशिश कर रहा है।
ऐसे में यदि खदानों पर अस्थिरता या सुरक्षा संकट बढ़ता है, तो यह इलेक्ट्रिक‑व्हीकल कंपनियों और बैटरी निर्माताओं के लिए आपूर्ति जोखिम पैदा कर सकता है।
अप्रैल 2026 में कांगो सरकार ने खनन क्षेत्र की सुरक्षा के लिए एक नई पहल की घोषणा की।
सरकार एक अर्धसैनिक “माइनिंग गार्ड” बल बनाने की योजना पर काम कर रही है, जिसका उद्देश्य खदानों की सुरक्षा, तस्करी रोकना और खनिज सप्लाई‑चेन को सुरक्षित बनाना है। इस कार्यक्रम को अमेरिका और संयुक्त अरब अमीरात के वित्तीय समर्थन से लागू किया जा रहा है और इसकी लागत लगभग 100 मिलियन डॉलर बताई गई है।
योजना के प्रमुख बिंदु:
सरकार का कहना है कि इससे अवैध खनन कम होगा और खनिजों की ट्रेसबिलिटी (स्रोत का पता लगाना) बेहतर होगी, जो अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
बॉस माइनिंग विवाद कांगो के खनन क्षेत्र की एक बड़ी चुनौती को उजागर करता है।
देश के पास दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण कोबाल्ट भंडार हैं, लेकिन सुरक्षा, शासन और आर्थिक दबावों के कारण इन संसाधनों का प्रबंधन जटिल बना हुआ है। अवैध खनन, स्थानीय शक्ति‑संरचनाएँ और वैश्विक प्रतिस्पर्धा—ये सब एक ही खदान पर टकरा सकते हैं।
दुनिया जब ऊर्जा परिवर्तन के लिए महत्वपूर्ण खनिजों की दौड़ में लगी है, तब बॉस माइनिंग जैसे विवाद यह दिखाते हैं कि वैश्विक सप्लाई‑चेन कितनी नाजुक हो सकती हैं—और क्यों कांगो की खदानों पर नियंत्रण अब केवल स्थानीय मुद्दा नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक सवाल बन चुका है।
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