Meta के AI-सक्षम चश्मे इसलिए विवादों में हैं क्योंकि वे रिकॉर्डिंग को एक सामान्य सामाजिक बातचीत जैसा बना देते हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी की एक स्टडी ने इस चिंता को ठोस उदाहरण दिया है: ‘पिक-अप आर्टिस्ट’ कंटेंट से जुड़े पुरुषों ने कैमरा लगे चश्मों का इस्तेमाल महिलाओं को उनकी जानकारी के बिना रिकॉर्ड करने और फुटेज ऑनलाइन फैलाने के लिए किया। 1
यह सबूत यह नहीं दिखाता कि ज्यादातर स्मार्ट ग्लासेस उपयोगकर्ता अपने डिवाइस का गलत इस्तेमाल करते हैं। लेकिन इससे यह जरूर सामने आता है कि हाथों को मुक्त रखकर रिकॉर्डिंग करने वाली तकनीक को उत्पीड़न वाले ऑनलाइन कंटेंट में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसी वजह से अब आयोजन स्थलों, नियामकों और आम लोगों के बीच सवाल उठ रहा है कि क्या चश्मे पर लगी छोटी-सी रिकॉर्डिंग लाइट निजता की पर्याप्त सुरक्षा है।
सिडनी यूनिवर्सिटी की स्टडी में क्या मिला
शोधकर्ताओं ने ‘पिक-अप आर्टिस्ट’ समुदायों से जुड़े 350 सार्वजनिक Instagram वीडियो की जांच की। इन वीडियो में कैमरा लगे चश्मे पहने पुरुष महिलाओं से बातचीत करते दिखे। कई मामलों में वे फोन नंबर या Instagram हैंडल मांगते थे और उस बातचीत को ऑनलाइन दर्शकों के लिए कंटेंट में बदल देते थे। 24
रिपोर्ट किए गए स्थानों में शामिल थे:
- जिम;
- कार्यस्थल;
- दुकानें और अन्य रिटेल स्थान; तथा
- समुद्र तट। 18
करीब 60% वीडियो में शोधकर्ताओं ने संभावित उत्पीड़न वाला व्यवहार पाया। 248 एक अलग रिपोर्ट के अनुसार, 43% मामलों में महिलाओं को अपमानजनक टिप्पणियों, पहचान उजागर किए जाने या डॉक्सिंग का सामना करना पड़ा। 8 शोध के एक अन्य विवरण में कहा गया कि उत्पीड़न वाले 93.3% वीडियो में कमेंट्स खुले हुए थे। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टिंग यह स्पष्ट नहीं करती कि यह आंकड़ा 350 वीडियो के पूरे सैंपल पर लागू होता है या केवल उत्पीड़न वाले वीडियो पर। 11
यहां एक जरूरी सावधानी भी है: ये आंकड़े स्टडी के लिए चुने गए कंटेंट से जुड़े हैं, स्मार्ट ग्लासेस इस्तेमाल करने वाले सभी लोगों से नहीं। यानी शोध किसी खास ऑनलाइन उपसंस्कृति में दुरुपयोग का पैटर्न दिखाता है, पूरे उत्पाद वर्ग में ऐसे व्यवहार की दर नहीं।
‘एंबिएंट कैप्चर’ क्या है?
शोधकर्ताओं ने एंबिएंट कैप्चर शब्द का इस्तेमाल आसपास मौजूद लोगों की चुपचाप, प्रथम-व्यक्ति दृष्टिकोण से रिकॉर्डिंग के लिए किया है—अक्सर ऐसे समय में जब लोगों को पता ही नहीं होता कि कैमरा चल रहा है—और फिर उस फुटेज को ऑनलाइन प्रसारित किया जाता है। 110
स्मार्ट ग्लासेस इस समस्या को और जटिल बनाते हैं क्योंकि वे सामान्य चश्मों जैसे दिख सकते हैं। फोन से रिकॉर्डिंग करने वाले व्यक्ति के विपरीत, चश्मा पहनने वाला व्यक्ति आंखों में आंखें डालकर बातचीत जारी रखते हुए भी रिकॉर्ड कर सकता है। इससे सामाजिक स्थिति और वास्तव में जुटाए जा रहे डेटा के बीच बड़ा अंतर पैदा होता है: कुछ पल की निजी बातचीत व्यूज, मनोरंजन या ऑनलाइन प्रतिष्ठा के लिए सार्वजनिक वीडियो बन सकती है। 110
रिकॉर्डिंग लाइट पर विवाद क्यों है
Meta के चश्मों में सामने की ओर एक LED लगी है, जो कैमरा रिकॉर्डिंग के दौरान संकेत देती है। इसका उद्देश्य आसपास के लोगों को दृश्य चेतावनी देना है, लेकिन यह सुरक्षा इस बात पर निर्भर करती है कि लोग उस छोटी-सी रोशनी को देख और पहचान पाएं—और वह लाइट सही सलामत रहे। रिपोर्टों के मुताबिक कुछ मॉडिफिकेशन सेवाएं LED को ढकने, हटाने या नष्ट करने की पेशकश कर रही थीं; एक मामले में इसके लिए $100 शुल्क बताया गया। 1830
Meta ने नई पीढ़ी के चश्मों में इसके जवाब के तौर पर टैम्पर-डिटेक्शन सुविधा जोड़ी है। यदि सिस्टम पहचानता है कि रिकॉर्डिंग LED को ढका गया है या उसमें भौतिक बदलाव किया गया है, तो संकेतक के दोबारा काम करने तक कैमरा बंद हो सकता है। 1922
फिर भी यह केवल तकनीकी उपाय है, व्यापक सामाजिक समस्या का समाधान नहीं। भीड़भाड़ वाली जगह पर कोई व्यक्ति छोटी-सी LED देख न पाए, कैमरा लगे चश्मे को सामान्य फ्रेम से अलग न पहचान पाए और यह भी न जान पाए कि रिकॉर्ड की गई सामग्री आगे कहां जाएगी। ऐसे में निजता की रक्षा का बोझ उस व्यक्ति पर आ जाता है जिसे रिकॉर्ड किया जा रहा है—उसे डिवाइस पहचानना, पहनने वाले से सवाल करना या वहां से हटना पड़ सकता है।
UK में बैन: चिंता से नीति तक
निजता को लेकर चिंता ने कुछ संस्थानों की नीतियां बदल दी हैं। UK में रेस्तरां, पब और थिएटरों ने Meta के चश्मों पर प्रतिबंध या पाबंदियां लगाई हैं। वजह ग्राहकों और कर्मचारियों की गुप्त रिकॉर्डिंग को लेकर आशंका है। 4855
इंग्लैंड और वेल्स में न्यायिक इमारतों के लिए जिम्मेदार Courts and Tribunals Service ने भी इन चश्मों पर रोक लगा दी है। रिपोर्टों के अनुसार, इन्हें पहनकर प्रवेश करने की कोशिश करने वालों से डिवाइस बाहर निकलने तक जब्त किया जा सकता है। 51
UK के सिनेमाघरों में भी ऐसे चश्मों पर पाबंदी लगाने पर विचार हुआ है, हालांकि वहां चिंता का एक अलग कारण फिल्म पाइरेसी है। 56
इन नीतियों का महत्व इसलिए है क्योंकि वे प्रवेश द्वार पर एक कठिन सवाल से बचाती हैं: कोई व्यक्ति रिकॉर्ड कर रहा है या नहीं, यह तय करने के बजाय स्थल कैमरा-सक्षम चश्मों को ही प्रतिबंधित कर सकता है।
Kmart के सस्ते कैमरा ग्लासेस ने बहस को बढ़ाया
यह बहस अब केवल Meta के Ray-Ban ब्रांड वाले उत्पादों तक सीमित नहीं है। ऑस्ट्रेलिया में Kmart के Anko कैमरा ग्लासेस AU$89 में बिके और देशभर में स्टॉक खत्म हो गया। इन चश्मों में फोटो कैप्चर, हाई-डेफिनिशन वीडियो, Bluetooth कनेक्टिविटी और इमेज-रिकग्निशन या चैट जैसे फीचर्स बताए गए थे। 49
उत्पाद की लोकप्रियता के बाद ऑस्ट्रेलिया की संघीय सरकार ने Privacy Commissioner से कैमरा लगे स्मार्ट ग्लासेस के प्राइवेसी और सुरक्षा प्रभावों की जांच करने को कहा। इसमें गुप्त रिकॉर्डिंग के जोखिम भी शामिल हैं। 35061
कम कीमत इसलिए मायने रखती है क्योंकि इससे संकेत मिलता है कि चुपचाप रिकॉर्डिंग करने वाला हार्डवेयर केवल महंगे उत्पाद खरीदने वाले सीमित वर्ग तक नहीं रहेगा। हालांकि, किसी उत्पाद का बिक जाना केवल मांग का सबूत है—यह इस बात का प्रमाण नहीं कि खरीदार अजनबियों को रिकॉर्ड करने या नुकसान पहुंचाने का इरादा रखते हैं।
क्या कोई ऐप पास में मौजूद स्मार्ट ग्लासेस का पता लगा सकता है?
आम लोगों को अधिक जानकारी देने की कोशिश में कुछ थर्ड-पार्टी डिटेक्शन टूल सामने आए हैं। Pawel Szydlowski का बनाया मुफ्त iPhone ऐप Zuckoff, Ray-Ban Meta, Oakley Meta और Snap Spectacles जैसे डिवाइसों से जुड़े Bluetooth संकेतों को सुनता है। 3133
ऐप यह संकेत दे सकता है कि आसपास संगत कैमरा ग्लासेस हो सकते हैं, लेकिन यह साबित नहीं कर सकता कि कोई खास व्यक्ति उस समय रिकॉर्डिंग कर रहा है। Bluetooth आधारित पहचान अधूरी भी हो सकती है: कोई डिवाइस अपने संकेत भेजना बंद कर सकता है और पाया गया डिवाइस जरूरी नहीं कि वीडियो रिकॉर्ड कर रहा हो। 313338
यही सीमा बड़ी समस्या को दिखाती है। डिटेक्शन ऐप चेतावनी दे सकता है, लेकिन वह सहमति नहीं बना सकता, रिकॉर्डिंग रोक नहीं सकता, पहनने वाले का उद्देश्य नहीं बता सकता और फुटेज अपलोड होने के बाद उसे नियंत्रित नहीं कर सकता। यह जागरूकता का सीमित साधन है, पूरी प्राइवेसी सुरक्षा नहीं।
असली सवाल: जिम्मेदारी किसकी है?
इस तकनीक के खिलाफ प्रतिक्रिया केवल चश्मों की क्षमताओं पर आधारित नहीं है। मूल सवाल यह है कि जोखिम संभालने की जिम्मेदारी किस पर डाली जा रही है।
अगर निजता इस बात पर निर्भर करती है कि आसपास का व्यक्ति एक छोटी LED देख पाए, सामान्य दिखने वाले फ्रेम को पहचान पाए, Bluetooth डिटेक्टर चलाए या किसी अजनबी से भिड़े, तो प्राइवेसी की जिम्मेदारी आंशिक रूप से पहनने वाले और निर्माता से हटकर बाईस्टैंडर पर चली जाती है। सिडनी का शोध इस चिंता को और गंभीर बनाता है, क्योंकि इसमें महिलाओं को रोजमर्रा के वातावरण में रिकॉर्ड किए जाने और फिर ऑनलाइन उत्पीड़न का सामना करने का दस्तावेजीकरण है। 146
Meta की LED सुरक्षा और टैम्पर-डिटेक्शन कुछ तरह की छिपी रिकॉर्डिंग को कम कर सकते हैं। नियंत्रित स्थानों में venue bans स्पष्ट सीमाएं तय करते हैं। डिटेक्शन ऐप सीमित जागरूकता दे सकते हैं। लेकिन इनमें से कोई भी उपाय अकेले ‘एंबिएंट कैप्चर’ के मूल सवाल का जवाब नहीं देता: क्या लोगों को यह जानने, आपत्ति करने या सहमति देने का वास्तविक अवसर दिए बिना उन्हें ऑनलाइन बांटे जा सकने वाले कंटेंट में बदल देना स्वीकार्य है?