यह स्पष्ट किया गया कि 870+ का आंकड़ा मौतों का नहीं बल्कि घायलों का है, जबकि कई जगह गलत तरीके से इसे मौतों से जोड़ा गया था।
संयुक्त राष्ट्र में प्रसारित एक अन्य दस्तावेज़ में भी कहा गया कि युद्धविराम के बाद "सैकड़ों उल्लंघन" हुए और केवल तीन हफ्तों में 211 फ़िलिस्तीनियों की मौत दर्ज की गई।
संयुक्त राष्ट्र और मानवीय रिपोर्टों के अनुसार युद्धविराम के दौरान भी हमलों से जुड़ा मौत का आंकड़ा बढ़ता गया। प्रमुख आँकड़े इस प्रकार बताए गए:
कुछ मीडिया रिपोर्टों में इससे अधिक आंकड़े भी बताए गए हैं, लेकिन ऊपर दिए गए आँकड़े संयुक्त राष्ट्र से जुड़े दस्तावेज़ों में व्यापक रूप से उद्धृत किए गए हैं।
कई स्रोत बताते हैं कि युद्धविराम के दौरान हिंसा लगातार और बार‑बार होती रही।
2026 में संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी रिपोर्टों में भी कहा गया कि गाज़ा के अलग‑अलग हिस्सों में हवाई हमले, गोलाबारी और गोलीबारी दैनिक रूप से जारी रही।
कुछ स्थानीय स्रोतों ने इन घटनाओं को "लगभग हर दिन होने वाले उल्लंघन" बताया, जिससे यह संकेत मिलता है कि युद्धविराम के बावजूद कम तीव्रता वाली लड़ाई जारी रही।
संयुक्त राष्ट्र अधिकारियों और स्वतंत्र विशेषज्ञों ने बार‑बार चेतावनी दी कि लगातार हमले नाज़ुक युद्धविराम को खतरे में डाल रहे हैं।
उन्होंने मुख्य रूप से ये मांगें उठाईं:
संयुक्त राष्ट्र के मानवीय समन्वय कार्यालय (OCHA) ने कहा कि सहायता पहुँचाने के प्रयास अभी भी कई बाधाओं से प्रभावित हैं—जैसे वीज़ा सीमाएँ, आयात स्वीकृतियाँ, सीमित सीमा‑पार मार्ग और राहतकर्मियों की आवाजाही पर प्रतिबंध।
सुरक्षा परिषद में हुई ब्रीफिंग में भी युद्धविराम को “नाज़ुक” बताया गया और चेतावनी दी गई कि लगातार हमले क्षेत्र को फिर से बड़े संघर्ष की ओर धकेल सकते हैं।
संयुक्त राष्ट्र बयानों, मानवीय रिपोर्टों और स्थानीय विवरणों से यह स्पष्ट होता है कि अक्टूबर 2025 का युद्धविराम पूरी तरह से हिंसा रोक नहीं पाया।
नुसेरात और बुरेज जैसे शरणार्थी शिविरों के आसपास दर्ज घटनाएँ दिखाती हैं कि संघर्ष कम तीव्रता के साथ जारी रहा। इसी बीच हताहतों की संख्या बढ़ती रही और संयुक्त राष्ट्र ने बार‑बार सभी पक्षों से युद्धविराम का पालन करने और गाज़ा के नागरिकों तक बिना रोक‑टोक सहायता पहुँचने देने की अपील की।
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