अक्टूबर 10, 2025 को इज़राइल और हमास के बीच लागू हुआ युद्धविराम गाज़ा में लड़ाई कम करने और मानवीय सहायता को अंदर पहुँचाने के उद्देश्य से किया गया था। लेकिन संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों, मानवीय संगठनों और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस अवधि के दौरान भी हवाई हमले, तोपखाना गोलाबारी और गोलीबारी की घटनाएँ जारी रहीं। इनमें केंद्रीय गाज़ा के नुसेरात (Nuseirat) और बुरेज (Bureij) शरणार्थी शिविर भी शामिल थे।
युद्धविराम ने पहले के महीनों की तुलना में लड़ाई की तीव्रता कुछ कम की, लेकिन उपलब्ध साक्ष्य बताते हैं कि उल्लंघन, नागरिक हताहत और मानवीय संकट लगातार जारी रहे।
युद्धविराम के महीनों में कई रिपोर्टों में केंद्रीय गाज़ा के शरणार्थी शिविरों पर हमलों का उल्लेख किया गया।
स्थानीय सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार नुसेरात और बुरेज के आवासीय इलाकों पर हमले हुए, जिनमें कई फ़िलिस्तीनी घायल हुए और इमारतों को नुकसान पहुँचा। इसी अवधि में बुरेज शिविर के आसपास तोपखाना गोलाबारी और हवाई हमलों की भी खबरें आईं।
कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि नुसेरात और अन्य केंद्रीय शिविरों के पास इमारतें गिराई गईं और हमले हुए, जिससे राहतकर्मियों के लिए बचाव कार्य और सहायता वितरण बेहद कठिन हो गया।
ये घटनाएँ उस व्यापक पैटर्न का हिस्सा थीं जिसमें युद्धविराम के बावजूद गाज़ा के कई हिस्सों में हमलों की खबरें आती रहीं।
नवंबर 2025 के अंत में संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि युद्धविराम लागू होने के बाद से कम से कम 393 उल्लंघन हुए हैं। उनके बयान के अनुसार:
यह स्पष्ट किया गया कि 870+ का आंकड़ा मौतों का नहीं बल्कि घायलों का है, जबकि कई जगह गलत तरीके से इसे मौतों से जोड़ा गया था।
संयुक्त राष्ट्र में प्रसारित एक अन्य दस्तावेज़ में भी कहा गया कि युद्धविराम के बाद "सैकड़ों उल्लंघन" हुए और केवल तीन हफ्तों में 211 फ़िलिस्तीनियों की मौत दर्ज की गई।
संयुक्त राष्ट्र और मानवीय रिपोर्टों के अनुसार युद्धविराम के दौरान भी हमलों से जुड़ा मौत का आंकड़ा बढ़ता गया। प्रमुख आँकड़े इस प्रकार बताए गए:
कुछ मीडिया रिपोर्टों में इससे अधिक आंकड़े भी बताए गए हैं, लेकिन ऊपर दिए गए आँकड़े संयुक्त राष्ट्र से जुड़े दस्तावेज़ों में व्यापक रूप से उद्धृत किए गए हैं।
कई स्रोत बताते हैं कि युद्धविराम के दौरान हिंसा लगातार और बार‑बार होती रही।
मानवीय रिपोर्टों के अनुसार शुरुआती महीनों में हवाई हमले लगभग रोज़ाना होते रहे।
2026 में संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी रिपोर्टों में भी कहा गया कि गाज़ा के अलग‑अलग हिस्सों में हवाई हमले, गोलाबारी और गोलीबारी दैनिक रूप से जारी रही।
कुछ स्थानीय स्रोतों ने इन घटनाओं को "लगभग हर दिन होने वाले उल्लंघन" बताया, जिससे यह संकेत मिलता है कि युद्धविराम के बावजूद कम तीव्रता वाली लड़ाई जारी रही।
संयुक्त राष्ट्र अधिकारियों और स्वतंत्र विशेषज्ञों ने बार‑बार चेतावनी दी कि लगातार हमले नाज़ुक युद्धविराम को खतरे में डाल रहे हैं।
उन्होंने मुख्य रूप से ये मांगें उठाईं:
संयुक्त राष्ट्र के मानवीय समन्वय कार्यालय (OCHA) ने कहा कि सहायता पहुँचाने के प्रयास अभी भी कई बाधाओं से प्रभावित हैं—जैसे वीज़ा सीमाएँ, आयात स्वीकृतियाँ, सीमित सीमा‑पार मार्ग और राहतकर्मियों की आवाजाही पर प्रतिबंध।
सुरक्षा परिषद में हुई ब्रीफिंग में भी युद्धविराम को “नाज़ुक” बताया गया और चेतावनी दी गई कि लगातार हमले क्षेत्र को फिर से बड़े संघर्ष की ओर धकेल सकते हैं।
संयुक्त राष्ट्र बयानों, मानवीय रिपोर्टों और स्थानीय विवरणों से यह स्पष्ट होता है कि अक्टूबर 2025 का युद्धविराम पूरी तरह से हिंसा रोक नहीं पाया।
नुसेरात और बुरेज जैसे शरणार्थी शिविरों के आसपास दर्ज घटनाएँ दिखाती हैं कि संघर्ष कम तीव्रता के साथ जारी रहा। इसी बीच हताहतों की संख्या बढ़ती रही और संयुक्त राष्ट्र ने बार‑बार सभी पक्षों से युद्धविराम का पालन करने और गाज़ा के नागरिकों तक बिना रोक‑टोक सहायता पहुँचने देने की अपील की।
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10 अक्टूबर 2025 के युद्धविराम के बाद भी गाज़ा में हमले, गोलाबारी और गोलीबारी जारी रहने की रिपोर्टें आईं, जिनमें कम से कम 393 उल्लंघन दर्ज किए गए।
10 अक्टूबर 2025 के युद्धविराम के बाद भी गाज़ा में हमले, गोलाबारी और गोलीबारी जारी रहने की रिपोर्टें आईं, जिनमें कम से कम 393 उल्लंघन दर्ज किए गए। केंद्रीय गाज़ा के नुसेरात और बुरेज शरणार्थी शिविरों के आसपास भी युद्धविराम के दौरान हमलों की खबरें सामने आईं।
संयुक्त राष्ट्र अधिकारियों ने चेतावनी दी कि लगातार हिंसा से युद्धविराम कमजोर हो रहा है और गाज़ा में मानवीय सहायता की निर्बाध पहुँच जरूरी है।