नए ग्रेजुएट्स का कहना है कि जहां पहले कंपनियां दर्जनों पद खोलती थीं, अब कई जगह सिर्फ एक से तीन पद ही उपलब्ध होते हैं।
इस स्थिति ने हांगकांग में एक नीति‑स्तरीय बहस भी शुरू कर दी है। कुछ श्रम संगठनों और उद्योग प्रतिनिधियों का मानना है कि जब स्थानीय ग्रेजुएट्स के लिए अवसर कम हो रहे हैं, तब गैर‑स्थानीय ग्रेजुएट्स या विदेशी प्रतिभा को नौकरी देने वाली नीतियों की समीक्षा की जानी चाहिए।
इसके विपरीत, हांगकांग के सबसे बड़े वोकेशनल शिक्षा प्रदाता Vocational Training Council (VTC) से निकलने वाले छात्रों पर एआई का असर अभी अपेक्षाकृत कम दिख रहा है।
इसका मुख्य कारण उनकी शिक्षा की प्रकृति है। VTC के कार्यक्रमों में आम तौर पर जोर होता है:
ऐसे कई काम—जैसे तकनीशियन, उपकरण संचालन, या अनुप्रयुक्त तकनीकी भूमिकाएं—अभी भी पूरी तरह एआई से प्रतिस्थापित करना कठिन हैं। इसलिए इन क्षेत्रों में मांग अपेक्षाकृत स्थिर बनी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि समस्या सिर्फ नौकरी कम होने की नहीं है, बल्कि करियर की शुरुआती सीढ़ी ही सिकुड़ रही है।
पारंपरिक रूप से एंट्री‑लेवल पद वह जगह होते थे जहां नए ग्रेजुएट्स काम करते‑करते कौशल सीखते थे। लेकिन जब कंपनियां कम जूनियर स्टाफ रखती हैं, तो युवाओं के लिए शुरुआती अनुभव हासिल करना भी कठिन हो जाता है।
अधिकारियों का कहना है कि एआई कुछ नौकरियां खत्म कर सकता है, लेकिन लंबे समय में नई भूमिकाएं और उद्योग भी पैदा कर सकता है।
VTC के नए चेयरमैन जेफ्री लैम किन‑फंग ने कहा है कि संस्थान को बदलते श्रम बाजार के अनुसार खुद को ढालना होगा।
उनकी योजना में कुछ प्रमुख कदम शामिल हैं:
पाठ्यक्रमों की समीक्षा – VTC अपने कार्यक्रमों को दोबारा देखेगा ताकि वे नई तकनीकों और उभरते रोजगार अवसरों के अनुरूप हों।
उद्योग से मजबूत साझेदारी – कंपनियों की जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षण देने पर ज्यादा जोर दिया जाएगा।
इंटर्नशिप अवसर बढ़ाना – लैम का मानना है कि हांगकांग का विशाल विकास प्रोजेक्ट Northern Metropolis छात्रों के लिए बड़े पैमाने पर इंटर्नशिप और प्रशिक्षण अवसर पैदा कर सकता है।
वर्तमान स्थिति यह संकेत देती है कि भविष्य के जॉब मार्केट में सिर्फ अकादमिक डिग्री ही पर्याप्त नहीं हो सकती। व्यावहारिक कौशल, तकनीकी दक्षता और उद्योग से जुड़ा प्रशिक्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण होता जा रहा है।
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