यूक्रेन का ऑपरेशन विवाल्डी दिखाता है कि जमीनी रोबोट पैदल सैनिकों की जगह लेने के बजाय एक बड़े सैन्य अभियान में उनकी मदद कर सकते हैं। लाइमैन के आसपास यूक्रेन की थर्ड आर्मी कॉर्प्स ने मानवरहित जमीनी वाहनों (UGV) को हवाई ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, वायु रक्षा और बख़्तरबंद वाहनों के साथ इस्तेमाल किया।
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पहले ध्यान भटकाया, फिर हमले में मदद की
रिपोर्टों के अनुसार, अभियान के शुरुआती चरण में यूक्रेनी बलों ने जमीनी रोबोटों को ध्यान भटकाने के लिए आगे भेजा। उनसे रूसी पक्ष का ध्यान खिंचा और निगरानी प्रणालियों तथा फायरिंग की जगहों का पता चला। इस बीच, हमला करने वाले सैनिक आगे बढ़े और अहम इलाके पर कब्ज़ा किया।
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रोबोट अभियान का केवल एक हिस्सा थे। वे रास्ता साफ़ करने और हमलों में मदद कर सकते थे, लेकिन सैनिकों को बख़्तरबंद वाहनों में आगे बढ़कर जमीन पर कब्ज़ा करना और उसे अपने नियंत्रण में बनाए रखना था।
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‘ग्रिफिन’ तरीका: रोबोटों को मोर्चे के पीछे पहुंचाना
एनसी13 स्ट्राइक UGV इकाई ने भारी बमवर्षक ड्रोन से हथियारबंद जमीनी रोबोटों को रूसी मोर्चे के पीछे पहुंचाने की तरकीब विकसित की। ‘ग्रिफिन’ नाम से बताई गई इस तरकीब में ड्रोन रोबोटों को 10 किलोमीटर से अधिक दूरी तक ले जाते थे। रिपोर्टों के मुताबिक, विवाल्डी के दौरान इन रोबोटों को कमान चौकियों, ड्रोन दलों, आपूर्ति केंद्रों और हमला करने वाले समूहों को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल किया गया। एनसी13 के कमांडर मायकोला ज़िन्केविच का कॉलसाइन “मकार” बताया गया है।
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उपलब्ध रिपोर्टें रोबोटों को ड्रोन से पहुंचाने और उनके बताए गए लक्ष्यों का ज़िक्र करती हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं करतीं कि उतरने के बाद वे अपने-आप रास्ता ढूंढते थे या उन्हें दूर से चलाया जाता था। एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ जमीनी रोबोटों पर दो बुलस्पाइक ग्रेनेड लॉन्चर लगाए गए थे।
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असर के दावे और उनकी सीमाएं
एक रिपोर्ट में कहा गया है कि रोबोट को हवा से उतारने की पहली कोशिश नाकाम रही, जबकि अगली कोशिश में एक रसद केंद्र नष्ट हुआ। उसी रिपोर्ट में बाद के अभियानों की सफलता दर लगभग 80% बताई गई है। सफलता को किस आधार पर मापा गया, यह स्पष्ट नहीं है; इसलिए इस आंकड़े को स्वतंत्र रूप से सत्यापित दर नहीं, बल्कि एक परिचालन दावा समझना चाहिए।
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एनसी13 के कमांडर के एक साक्षात्कार में दावा किया गया कि अभियान के दौरान रसद का लगभग 80% काम रोबोटिक प्रणालियों ने किया।
1 एक दूसरी रिपोर्ट में घायलों को निकालने के 90% काम का श्रेय मानवरहित जमीनी प्रणालियों को दिया गया है, लेकिन उपलब्ध जानकारी में इस आंकड़े की गणना या उसका आधार नहीं बताया गया।
5 इन आंकड़ों को अभियान से जुड़े दावों के रूप में ही देखना चाहिए—इन्हें यूक्रेन की पूरी सेना के सत्यापित आंकड़े नहीं माना जा सकता।
एक अलग संकलन में यह दावा भी दोहराया गया कि UGV के इस्तेमाल से लगभग 2,500 सैनिकों की जान बची। उपलब्ध विवरण यह नहीं बताता कि यह संख्या कैसे निकाली गई, और इसकी स्वतंत्र पुष्टि भी नहीं है।
15 इसी तरह, रोबोटों से रूसी सैनिकों का मनोबल प्रभावित होने या एक सैनिक के मारे जाने के बाद नियोजित मशीनीकृत हमले को रद्द किए जाने के विशिष्ट दावों की यहां उद्धृत रिपोर्टों से पुष्टि नहीं होती।
रोबोट मदद कर सकते हैं, लेकिन जमीन सैनिक ही लेते हैं
विवाल्डी को केवल रोबोटों का हमला समझना सही नहीं होगा। यह इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, वायु रक्षा, हवाई ड्रोन, बख़्तरबंद वाहनों और पैदल सैनिकों के साथ समन्वित अभियान था।
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18 रिपोर्टों में रोबोटों की भूमिका रूसी पक्ष का ध्यान खींचने, रास्ता बनाने और पीछे के ठिकानों को निशाना बनाने में बताई गई है। लेकिन इलाके पर कब्ज़ा करना और उसे संभालना सैनिकों तथा वाहनों पर निर्भर रहा।
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यह फर्क युद्ध में रोबोटों के इस्तेमाल से जुड़े बड़े दावों को परखते समय अहम है। विवाल्डी में एक ही अभियान के दौरान UGV के कई उपयोगों की रिपोर्ट सामने आई, लेकिन सफलता दर, घायलों को निकालने में उनकी हिस्सेदारी और बचाई गई जानों की संख्या जैसे दावों के पीछे अभी महत्वपूर्ण प्रमाणगत सीमाएं हैं।
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