विश्लेषकों के अनुसार इन प्रगतियों का असर सिर्फ स्थानीय नहीं था। आसपास के क्षेत्रों में यूक्रेनी दबाव ने रूसी योजनाओं को बाधित किया और उनकी कुछ आक्रामक कार्रवाइयों—जैसे हुलियाइपोल दिशा में संभावित हमलों—को सीमित कर दिया।
अब रूस कई जगहों पर खुलकर आगे बढ़ने के बजाय कमजोर मोर्चों की रक्षा के लिए संसाधन स्थानांतरित करने को मजबूर हुआ है।
2026 में यूक्रेन की स्थिति सुधारने वाला एक बड़ा कारण ड्रोन युद्ध में बढ़त भी है।
रिपोर्टों के अनुसार यूक्रेनी ड्रोन इकाइयों ने रूसी पीछे के क्षेत्रों में इन लक्ष्यों पर हमले तेज़ किए हैं:
विश्लेषकों का मानना है कि इस ड्रोन बढ़त का असर इन रूपों में दिख रहा है:
युद्धक्षेत्र मॉनिटरिंग समूहों के आंकड़े बताते हैं कि रूस की प्रगति अब पहले की तुलना में काफी धीमी हो गई है।
उदाहरण के लिए, 2026 की शुरुआत से डोनेट्स्क क्षेत्र में रूसी सेना ने लगभग 349.9 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर कब्ज़ा किया—औसतन करीब 2.6 वर्ग किलोमीटर प्रतिदिन।
लड़ाई के पैमाने को देखते हुए यह बहुत धीमी गति मानी जाती है। इसी कारण कुछ विश्लेषक अब यह निश्चित रूप से नहीं कह पा रहे कि रूस डोनेट्स्क के उस हिस्से पर कब या क्या कभी पूरी तरह कब्ज़ा कर पाएगा जिसे “फोर्ट्रेस बेल्ट” कहा जाता है।
यूक्रेन ने अपनी वायु रक्षा क्षमता में भी सुधार किया है, जो उसके सैन्य और नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय के अनुसार जनवरी 2026 से अब तक उसकी वायु रक्षा ने रूसी Kh‑101, Kh‑55 और Kh‑555 क्रूज़ मिसाइलों का लगभग 88% अवरोधन किया है।
हालाँकि बैलिस्टिक मिसाइलों या बड़े ड्रोन झुंडों के हमलों में अभी भी नुकसान होता है, लेकिन यह उच्च अवरोधन दर रूस के कई हमलों के रणनीतिक प्रभाव को कम कर देती है।
यूक्रेन ने केवल मोर्चे पर ही नहीं बल्कि रूस के अंदर भी लंबी दूरी के हमलों को तेज़ किया है।
यूक्रेनी रिपोर्टों के अनुसार इन हमलों ने रूस की तेल शोधन क्षमता में लगभग एक चौथाई तक गिरावट में योगदान दिया है, जो युद्ध के वित्तपोषण पर दबाव डाल सकता है।
इन सभी कारकों को मिलाकर युद्ध की स्थिति में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव दिखते हैं:
फिर भी इसे युद्ध का निर्णायक मोड़ नहीं माना जा सकता। रूस अभी भी लगभग 1,200 किलोमीटर लंबी फ्रंटलाइन पर बड़ी संख्या में सैनिक, तोपखाने और ड्रोन तैनात किए हुए है और हमले जारी रखे हुए है।
यूक्रेन की नई पहल टिकाऊ रहेगी या नहीं, यह कई कारकों पर निर्भर करता है:
यदि ये संसाधन बने रहते हैं, तो स्थानीय पलटवार + लंबी दूरी के व्यवधान की यूक्रेनी रणनीति रूस की प्रगति को सीमित रख सकती है और आगे के अवसर पैदा कर सकती है।
फिलहाल 2026 में युद्ध की स्थिति को सबसे सटीक रूप से “प्रतिस्पर्धी पहल” (contested initiative) कहा जा सकता है—जहाँ यूक्रेन ने रूस की पहले की गति को बाधित कर दिया है, लेकिन इन स्थानीय सफलताओं को बड़े रणनीतिक बदलाव में बदलना अभी बाकी है।
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