ऊर्जा बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इतिहास में कई बार देखा गया है कि जैसे ही तेल $100 प्रति बैरल के आसपास या उससे ऊपर जाता है, विंडफॉल टैक्स की बहस फिर उभर आती है।
संयुक्त राज्य अमेरिका में तेल कीमतों के बढ़ने के बाद सांसदों ने फिर से Big Oil Windfall Profits Tax Act पेश किया। इस प्रस्ताव को सीनेटर शेल्डन व्हाइटहाउस और प्रतिनिधि रो खन्ना ने आगे बढ़ाया।
प्रस्ताव के मुख्य बिंदु:
ब्राज़ील ने अलग रास्ता चुना। सरकार ने सीधे मुनाफ़े पर कर लगाने के बजाय कच्चे तेल के निर्यात पर अस्थायी टैक्स लगाया।
मार्च 2026 में ब्राज़ील ने तेल निर्यात पर 12% अस्थायी कर लागू किया, जब ब्रेंट क्रूड $100 प्रति बैरल से ऊपर चला गया था।
इसके साथ सरकार ने घरेलू राहत के कदम भी उठाए:
ब्राज़ील के वित्त मंत्रालय के अनुसार, यदि तेल कीमतें $100 से ऊपर बनी रहती हैं तो इससे लगभग R$8.5 अरब (लगभग $1.5 अरब) प्रति माह अतिरिक्त राजस्व मिल सकता है।
यूरोप में भी ऊर्जा कीमतों के बढ़ने के बाद कई सरकारों ने संयुक्त कार्रवाई की मांग की।
जर्मनी, इटली, स्पेन, पुर्तगाल और ऑस्ट्रिया ने यूरोपीय आयोग को पत्र लिखकर ऊर्जा कंपनियों के अतिरिक्त मुनाफ़े पर टैक्स लगाने का प्रस्ताव रखा।
यह प्रस्ताव 2022 में रूस‑यूक्रेन युद्ध के बाद लागू किए गए EU “solidarity contribution” मॉडल को फिर से लागू करने जैसा था—जिसमें जीवाश्म ईंधन कंपनियों के अतिरिक्त मुनाफ़े पर अस्थायी कर लगाया गया था।
हालाँकि यूरोपीय आयोग ने फिलहाल पूरे ईयू स्तर पर नया टैक्स लगाने में सावधानी दिखाई है और कई मामलों में फैसला सदस्य देशों पर छोड़ दिया है।
ऑस्ट्रेलिया जैसे बड़े ऊर्जा निर्यातक देशों में भी यह मुद्दा उठने लगा।
ऑस्ट्रेलियाई सीनेट में गैस निर्यात पर नए कर के प्रस्ताव पर चर्चा हुई, जिसका उद्देश्य उच्च वैश्विक ऊर्जा कीमतों के दौरान कंपनियों के अतिरिक्त लाभ का हिस्सा सार्वजनिक राजस्व में लाना था।
हालाँकि इस प्रस्ताव की अंतिम संरचना पर अभी चर्चा जारी है।
ऊर्जा क्षेत्र के विश्लेषकों का कहना है कि विंडफॉल टैक्स अल्पकाल में सरकारों के लिए राजस्व और उपभोक्ता राहत का साधन बन सकता है, लेकिन इसके कुछ संभावित दुष्प्रभाव भी हैं।
मुख्य चिंताएँ:
तेल और गैस परियोजनाएँ अक्सर उत्पादन शुरू होने से पहले कई वर्षों के निवेश मांगती हैं। इसलिए विश्लेषकों का मानना है कि स्थिर और पूर्वानुमान योग्य कर व्यवस्था भविष्य की ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण होती है।
तेल बाजार में यह एक जाना‑पहचाना पैटर्न है: जब भी वैश्विक संकट या भू‑राजनीतिक तनाव के कारण कीमतें $100 प्रति बैरल से ऊपर जाती हैं, सरकारें ऊर्जा कंपनियों के अतिरिक्त मुनाफ़े पर कर लगाने की चर्चा शुरू कर देती हैं।
आने वाले समय में यह बहस इस बात पर निर्भर करेगी कि तेल कीमतें कितने समय तक ऊँची रहती हैं—और सरकारें उपभोक्ता राहत और ऊर्जा निवेश के बीच संतुलन कैसे बनाती हैं।