आईईए की रिकॉर्ड 400 मिलियन बैरल योजना में जुलाई तक 300 मिलियन बैरल जारी हुए, लेकिन उस महीने निकासी घटकर केवल 26 मिलियन बैरल रह गई। मुख्य समस्या कच्चे तेल और तैयार ईंधन के बीच असंतुलन है: आपात भंडार में अधिकतर कच्चा तेल है, जबकि डीज़ल और जेट ईंधन की कमी सबसे ज्यादा है। आईईए सदस्य देशों की सरकारों के नियंत्रण में 1 अर...
शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: How has the IEA’s emergency oil-release program evolved since its March 11 announcement of a record 400-million-barrel coordinated release—i. Article summary: The programme has shifted from an unprecedented announced commitment to a slower, selective drawdown—but it is cushioning a much larger physical disruption, not eliminating it. Its remaining reserves are therefore a mean. Topic tags: general, news, general web, government, user generated. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermar
आईईए का आपात तेल कार्यक्रम अब रिकॉर्ड घोषणा से धीमी और चुनिंदा निकासी के चरण में पहुंच गया है। 11 मार्च को सदस्य देशों ने 400 मिलियन बैरल तेल बाजार में उपलब्ध कराने पर सहमति जताई थी। जुलाई तक इसमें से 300 मिलियन बैरल जारी हो चुके थे, लेकिन उसी महीने निकासी घटकर 26 मिलियन बैरल रह गई। इस प्रतिबद्धता के 100 मिलियन बैरल से अधिक अभी इस्तेमाल नहीं हुए हैं। 6
यह रिलीज़ बाजार को कुछ राहत दे रही है, लेकिन उस भौतिक ढांचे की जगह नहीं ले सकती जो कच्चे तेल को डीज़ल, जेट ईंधन या पेट्रोल जैसे इस्तेमाल योग्य उत्पादों में बदलता और उन्हें जरूरत वाली जगह तक पहुंचाता है। यही अंतर बताता है कि वैश्विक तेल भंडार क्यों घटते रहे और डीज़ल बाजार इतना तंग क्यों बना हुआ है।
11 मार्च को अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के सभी 32 सदस्य देशों ने 400 मिलियन बैरल तेल उपलब्ध कराने पर सहमति दी थी। यह एजेंसी के इतिहास में सबसे बड़ी समन्वित आपात तेल-भंडार कार्रवाई थी। 27 इसका उद्देश्य संघर्ष और प्रमुख समुद्री मार्गों से तेल प्रवाह में आई भारी गिरावट के बाद बाजार को स्थिर करना था।
हालांकि, रिलीज़ की रफ्तार लगातार कम हुई है। सरकारी भंडार से निकासी जुलाई में औसतन 7.5 लाख बैरल प्रतिदिन रही, जबकि जून में यह 15 लाख और मई में 25 लाख बैरल प्रतिदिन थी। अमेरिका और एशिया-प्रशांत क्षेत्र के सदस्य देशों की कम निकासी ने इस गिरावट में योगदान दिया। बचे हुए तेल के लिए कोई नया समय-निर्धारण भी तय नहीं किया गया था। 6
आईईए सदस्य देशों के पास अब भी सरकारों के नियंत्रण वाले 1 अरब बैरल से अधिक आपात भंडार हैं। 119 लेकिन इन सभी बैरल का एक साथ उन बाजारों तक पहुंच पाना संभव नहीं है जहां ईंधन की सबसे अधिक जरूरत है।
आपात निकासी उस आपूर्ति झटके से छोटी रही है जिसकी भरपाई करने की कोशिश की जा रही है। मध्य पूर्व से आपूर्ति में कुल नुकसान 1.3 अरब बैरल से अधिक हो चुका था। संघर्ष से पहले जहां होर्मुज़ जलडमरूमध्य से करीब 2 करोड़ बैरल प्रतिदिन तेल गुजरता था, वहीं मार्च, अप्रैल और मई में यह प्रवाह औसतन केवल 27 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया। 18
आईईए के अनुसार, जुलाई में वैश्विक दर्ज तेल भंडार 6.9 करोड़ बैरल यानी प्रतिदिन 22 लाख बैरल की दर से घटा। यह गिरावट लगभग पूरी तरह समुद्र में मौजूद तेल—जिसे “ऑयल ऑन वॉटर” कहा जाता है—में कमी के कारण हुई। यह संकेत है कि समस्या केवल तेल की कुल मात्रा की नहीं, बल्कि इस बात की भी है कि वह सुरक्षित रूप से परिवहन नेटवर्क से गुजर पा रहा है या नहीं।
जुलाई के अंत तक दर्ज वैश्विक भंडार 7.9 अरब बैरल से नीचे आ गया था। आईईए ने तीसरी तिमाही में वैश्विक तेल बाजार में प्रतिदिन 18 लाख बैरल की कमी का अनुमान लगाया है। 26
इसका सीधा अर्थ है कि आपात भंडार बाजार के आंकड़ों को कुछ समय के लिए संभाल सकते हैं, लेकिन बाधित समुद्री मार्गों, फंसे हुए माल, क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे या लंबे वैकल्पिक समुद्री रास्तों की भरपाई तुरंत नहीं कर सकते।
सबसे अहम सीमा कच्चे तेल और तैयार पेट्रोलियम उत्पादों के बीच का अंतर है। आईईए सदस्य देशों को कम-से-कम 90 दिनों के शुद्ध आयात के बराबर तेल भंडार रखना होता है। इसमें कच्चा तेल और रिफाइंड उत्पाद दोनों शामिल हैं। 20 फिर भी मौजूदा आपात रिलीज़ का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल का है, जबकि यूरोपीय देशों का योगदान अपेक्षाकृत अधिक रिफाइंड उत्पादों के रूप में है। 17
कच्चा तेल तभी उपभोक्ताओं के लिए उपयोगी बनता है जब वह किसी चालू रिफाइनरी तक पहुंचे, वहां डीज़ल, जेट ईंधन या पेट्रोल में बदले और फिर बंदरगाहों तथा वितरण नेटवर्क के जरिए बाजार तक पहुंचे। इस पूरी श्रृंखला का कोई भी हिस्सा बाधित हो तो कच्चे तेल की अतिरिक्त मात्रा तुरंत ईंधन की कमी दूर नहीं कर सकती। आईईए ने भी कहा है कि रिफाइनरी गतिविधि और पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति, कच्चे तेल की डिलीवरी जितनी तेजी से नहीं सुधरी है। 19
इसी वजह से कच्चे तेल की उपलब्धता और ईंधन बाजार के तनाव में बड़ा अंतर दिख रहा है। अमेरिका में डीज़ल क्रैक—यानी डीज़ल और उसे बनाने वाले कच्चे तेल के बीच कीमत का अंतर—17 अगस्त को रिकॉर्ड 102.20 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। 48 आईईए के अनुसार, जुलाई में वैश्विक रिफाइनरी क्रूड थ्रूपुट औसतन 8.09 करोड़ बैरल प्रतिदिन रहा, जो एक साल पहले की तुलना में करीब 50 लाख बैरल प्रतिदिन कम है। 48
रिपोर्टों के अनुसार, मध्य पूर्व की 20% से अधिक रिफाइनिंग क्षमता प्रभावित हुई है और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में व्यवधान के कारण ईंधन निर्यात भी सीमित है। 47 ऐसे माहौल में अतिरिक्त कच्चा तेल कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल को कुछ हद तक रोक सकता है, लेकिन वह बंद रिफाइनरियों या बाधित समुद्री मार्गों को जल्दी बहाल नहीं कर सकता।
सरकारों के नियंत्रण में मौजूद 1 अरब बैरल से अधिक भंडार अब भी महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच हैं। स्थान और परिवहन व्यवस्था के आधार पर इनसे:
लेकिन जब तत्काल कमी कच्चे तेल की बजाय किसी रिफाइंड उत्पाद की हो, तो इन भंडारों का असर सीमित रहेगा। मार्च की प्रतिबद्धता में बचे करीब 10 करोड़ बैरल, यदि समान रूप से जारी किए जाएं, तो प्रतिदिन 18 लाख बैरल के अनुमानित घाटे के मुकाबले लगभग 56 दिनों के बराबर होंगे। यह केवल मात्रा की तुलना है। वास्तविक राहत कच्चे तेल की गुणवत्ता, भंडार के स्थान, उपलब्ध रिफाइनरी क्षमता और तैयार उत्पादों को पहुंचाने की परिवहन व्यवस्था पर निर्भर करेगी। 626
आईईए का मौजूदा रुख भी महत्वपूर्ण है। अगस्त में एजेंसी के कार्यकारी निदेशक फातिह बिरोल ने कहा कि फिलहाल दूसरी आपात रिलीज़ पर चर्चा नहीं हो रही है। एजेंसी ने यह भी बताया कि मार्च की कार्रवाई के बाद करीब 80% रणनीतिक भंडार बचा हुआ है। 5
निर्णायक सवाल यह नहीं है कि आईईए और कितने बैरल जारी करता है। असली सवाल यह है कि अतिरिक्त भंडार को संकटग्रस्त हिस्से तक कितनी प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सकता है।
सबसे असरदार कदमों में उपलब्ध रिफाइंड-प्रोडक्ट भंडार को प्राथमिकता देना, ऐसी कच्चे तेल की किस्में जारी करना शामिल होगा जिन्हें चालू रिफाइनरियां आसानी से संसाधित कर सकें, और उन स्थानों तक डिलीवरी करना जहां बंदरगाह तथा परिवहन मार्ग काम कर रहे हों।
यदि समुद्री परिवहन और रिफाइनरी संचालन बाधित रहते हैं, तो कच्चे तेल की बड़ी रिलीज़ तेल बाजार के कुल संतुलन को तो कुछ स्थिर कर सकती है, लेकिन डीज़ल, जेट ईंधन और पेट्रोल की कमी को जल्दी दूर नहीं करेगी।
इसलिए आईईए का कार्यक्रम एक झटके को सोखने वाले सुरक्षा कवच के रूप में सफल रहा है, लेकिन सामान्य आपूर्ति श्रृंखलाओं का विकल्प नहीं बन पाया। बचे हुए भंडार लंबे संकट में एक महत्वपूर्ण पुल हैं—ईंधन की उस कमी का त्वरित इलाज नहीं, जो बाधित शिपिंग और कमजोर रिफाइनिंग क्षमता से पैदा हुई है।
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आईईए की रिकॉर्ड 400 मिलियन बैरल योजना में जुलाई तक 300 मिलियन बैरल जारी हुए, लेकिन उस महीने निकासी घटकर केवल 26 मिलियन बैरल रह गई।
आईईए की रिकॉर्ड 400 मिलियन बैरल योजना में जुलाई तक 300 मिलियन बैरल जारी हुए, लेकिन उस महीने निकासी घटकर केवल 26 मिलियन बैरल रह गई। मुख्य समस्या कच्चे तेल और तैयार ईंधन के बीच असंतुलन है: आपात भंडार में अधिकतर कच्चा तेल है, जबकि डीज़ल और जेट ईंधन की कमी सबसे ज्यादा है।
आईईए सदस्य देशों की सरकारों के नियंत्रण में 1 अरब बैरल से अधिक तेल अब भी मौजूद है, लेकिन उसका असर रिफाइनरी, बंदरगाह, टैंकर और शिपिंग मार्गों की उपलब्धता पर निर्भर करेगा।