इन रिपोर्टों से यह साबित होता है कि हूतियों ने ऐसे हमलों का दावा किया—यह नहीं कि दोनों टैंकरों को निश्चित रूप से नुकसान पहुंचा या वे वास्तव में हमले की चपेट में आए। उपलब्ध सामग्री में किसी विश्वसनीय स्वतंत्र स्रोत से इन घटनाओं की पुष्टि नहीं है। आठ या नौ हमलों की संख्या भी हूती समूह के अपने आंकड़े पर आधारित है।
इसी सावधानी की जरूरत उस दावे पर भी लागू होती है जिसमें मोक्का के पास एक सऊदी सैन्य लैंडिंग जहाज और चार एस्कॉर्ट जहाजों पर हमले की बात कही गई है। रॉयटर्स ने इस आरोप की खबर दी, लेकिन बताया कि सऊदी अधिकारियों की ओर से तत्काल पुष्टि नहीं हुई थी।
फिर भी, इस अभियान का कारोबारी असर दिखाई देने लगा है। रॉयटर्स के अनुसार, यानबू से हाल की सऊदी कच्चे तेल की लोडिंग में जहाजों ने AIS ट्रैकिंग सिग्नल बंद रखे। ऐसा संभवतः समुद्र में जहाजों की पहचान और उन पर हमले का जोखिम घटाने के लिए किया गया। लेकिन इसका दूसरा असर यह है कि लाल सागर के रास्ते वास्तव में कितना सऊदी तेल भेजा जा रहा है, इसका सटीक आकलन कठिन हो गया है।
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और आगे हिंद महासागर से जोड़ता है। संघर्ष से पहले इस मार्ग से कच्चे तेल और रिफाइंड उत्पादों की आवाजाही करीब 1.8 करोड़ बैरल प्रतिदिन थी। रॉयटर्स के अनुसार, जुलाई में यह प्रवाह घटकर लगभग 48 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया और अगस्त में रिपोर्ट प्रकाशित होने तक औसत करीब 20 लाख बैरल प्रतिदिन था।
इस गिरावट ने सऊदी अरब के लाल सागर तट पर स्थित यानबू बंदरगाह को रणनीतिक रूप से अधिक महत्वपूर्ण बना दिया। लेकिन यानबू हॉर्मुज़ का पूरी तरह सुरक्षित विकल्प नहीं है। लाल सागर से बाहर जाने वाले जहाजों को बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य से होकर गुजरना पड़ता है। यह लाल सागर और अदन की खाड़ी के बीच का संकरा समुद्री द्वार है।
इसलिए हूती प्रतिबंध उस वैकल्पिक मार्ग को निशाना बनाता है, जिसकी जरूरत हॉर्मुज़ में यातायात घटने के बाद सबसे ज्यादा बढ़ी। एक chokepoint यानी संकरे, रणनीतिक समुद्री मार्ग से बचने की कोशिश दूसरे chokepoint को जोखिम में डाल सकती है।
सऊदी अरब ने जोखिम कम करने के लिए मिस्र के आर-पार भूमध्यसागर तक जाने वाली पाइपलाइन का इस्तेमाल भी बढ़ाया है। इससे लाल सागर और बाब अल-मंदब के पानी से बचा जा सकता है, लेकिन एशियाई ग्राहकों तक पहुंचने के लिए समुद्री यात्रा लंबी और महंगी हो जाती है।
इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि सऊदी तेल निर्यात सुरक्षित रूप से बाब अल-मंदब की ओर “तेजी से बढ़” गया है। यानबू से गतिविधि बढ़ने के संकेत हैं, लेकिन AIS सिग्नल बंद होने से प्रवाह का स्वतंत्र और सटीक अनुमान मुश्किल है। साथ ही, मिस्र वाला मार्ग बताता है कि रियाद पहले ही किसी एक असुरक्षित गलियारे पर अत्यधिक निर्भरता से बचने की कोशिश कर रहा है।
हूती रणनीति का दबाव बनाने वाला तर्क सीधा है: अगर सऊदी अरब हॉर्मुज़ का भरोसेमंद इस्तेमाल नहीं कर सकता, तो यानबू, लाल सागर के प्रवेश मार्ग और बाब अल-मंदब को असुरक्षित बनाकर उसके प्रमुख समुद्री विकल्प को भी सीमित किया जा सकता है। 20 जुलाई की चेतावनी में कंपनियों से कहा गया था कि सऊदी बंदरगाहों का इस्तेमाल करने वाले जहाज निशाने पर आ सकते हैं।
आर्थिक दबाव बनाने के लिए समुद्री मार्ग को पूरी तरह बंद करना जरूरी नहीं होता। केवल खतरे की विश्वसनीयता ही जहाज मालिकों को यात्रा टालने, ट्रैकिंग सिस्टम बंद करने, नौसैनिक सुरक्षा लेने या केप ऑफ गुड होप के रास्ते जहाज घुमाने पर मजबूर कर सकती है। इससे यात्रा का समय, ईंधन खर्च, बीमा प्रीमियम और माल ढुलाई दरें बढ़ती हैं।
बाब अल-मंदब का महत्व केवल तेल तक सीमित नहीं है। यह लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और स्वेज नहर की ओर जाने वाले जहाजों के लिए अहम मार्ग है। यहां व्यवधान से कंटेनर जहाजों, ऊर्जा कार्गो और एशिया, यूरोप तथा मध्य-पूर्व के बीच आने-जाने वाली व्यावसायिक आपूर्ति पर असर पड़ सकता है।
जुलाई में बाब अल-मंदब को लेकर बढ़ी चिंता के बीच ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत कुछ ही दिनों में 13 प्रतिशत से अधिक चढ़ी और 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई—ऐसा गार्डियन की रिपोर्ट में बताया गया। यह प्रतिक्रिया दिखाती है कि बाजार वास्तविक आपूर्ति व्यवधान से पहले ही जोखिम की कीमत तय करना शुरू कर देता है।
हूती अभियान केवल समुद्री घोषणाओं तक सीमित नहीं रहा। समूह ने यमन के लाल सागर तट पर सरकार के नियंत्रण वाले मोक्का बंदरगाह पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। रिपोर्टों में नागरिकों और सैनिकों के मारे जाने, बंदरगाह के बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने और हमलों की कई लहरों का उल्लेख है।
मोक्का की स्थिति रणनीतिक है। यह बाब अल-मंदब के पास है। इसलिए वहां दबाव बढ़ाने से हूतियों को दोहरा फायदा मिल सकता है—यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार से जुड़े बलों को कमजोर करना और जलडमरूमध्य के आसपास जहाजों को धमकाने की अपनी क्षमता बढ़ाना।
यमनी अधिकारियों और क्षेत्रीय रिपोर्टों ने चेतावनी दी है कि हूती पश्चिमी तट के साथ दक्षिण की ओर बढ़ने, रणनीतिक द्वीपों और बाब अल-मंदब के आसपास ठिकाने बनाने की कोशिश कर सकते हैं। लेकिन इन चेतावनियों को इस बात का प्रमाण नहीं माना जा सकता कि करीब 2,000 लड़ाकों की तैनाती या किसी बड़े कब्जे का अभियान निश्चित रूप से शुरू होने वाला है। उपलब्ध सामग्री इस विशिष्ट संख्या की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करती।
अधिक सावधानी से निकाला जा सकने वाला निष्कर्ष यह है कि हूती तटवर्ती इलाके में दबाव बढ़ाकर बाब अल-मंदब से जुड़ी अपनी धमकी को विश्वसनीय बनाना चाहते हैं। क्या यह प्रयास वास्तविक क्षेत्रीय विस्तार में बदलेगा, यह उनकी सैन्य आवाजाही, रसद, स्थानीय विरोधी बलों की क्षमता और सऊदी या अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा।
लंबे समय तक चलने वाला तटीय अभियान यमन के आंतरिक युद्ध और ईरान-सऊदी-अमेरिका से जुड़े क्षेत्रीय संघर्ष के बीच की रेखा धुंधली कर सकता है। सरकार समर्थक बल, पश्चिमी तट पर सक्रिय स्थानीय संगठन और विदेशी समर्थक बंदरगाहों, तटीय सड़कों तथा समुद्री निगरानी ठिकानों के आसपास फिर से लड़ाई में खिंच सकते हैं।
मानवीय जोखिम तत्काल है। मोक्का पर हमलों में नागरिकों के मारे जाने और घायल होने की खबरें आईं, जबकि सिक्योरिटी काउंसिल रिपोर्ट ने बंदरगाह को व्यापक नुकसान पहुंचने की बात कही। लगातार व्यवधान से खाद्य, ईंधन और अन्य आवश्यक वस्तुओं के आयात पर असर पड़ सकता है तथा उनकी कीमत और उपलब्धता दोनों बिगड़ सकती हैं।
इससे कूटनीति भी कठिन होगी। हूतियों ने प्रतिबंध को यमनी बंदरगाहों और हवाई अड्डों पर सऊदी पाबंदियों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई बताया है—यह तर्क बीबीसी और रॉयटर्स की रिपोर्टों में दर्ज है। इसलिए किसी भी वार्ता में समुद्री सुरक्षा के साथ बंदरगाहों तक पहुंच, सैन्य दबाव और यमन से जुड़े व्यापक राजनीतिक विवादों पर भी चर्चा करनी होगी। समुद्र में बढ़ता संघर्ष समझौते की गुंजाइश घटाता है और दोनों पक्षों को हमले रोकने से पहले रियायतें मांगने के लिए प्रेरित कर सकता है।
रियाद के सामने कोई भी विकल्प जोखिम-मुक्त नहीं है:
बड़ी सैन्य प्रतिक्रिया जहाजों की सुरक्षा बेहतर कर सकती है, लेकिन सऊदी तेल प्रतिष्ठानों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों को भी बढ़ावा दे सकती है। दूसरी ओर, केवल मार्ग बदलने से तत्काल जोखिम घटेगा, पर हूतियों के पास वैश्विक शिपिंग पर अनिश्चितता और अतिरिक्त लागत थोपने की क्षमता बनी रहेगी।
सबसे बड़ा खतरा हॉर्मुज़ और बाब अल-मंदब—दोनों मार्गों के एक साथ असुरक्षित होने का है। रॉयटर्स के अनुसार, संघर्ष शुरू होने से पहले हॉर्मुज़ से दुनिया की दैनिक तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस आपूर्ति का करीब पांचवां हिस्सा गुजरता था। CNN ने बाब अल-मंदब से होकर करीब 62 लाख बैरल तेल के आवागमन का उल्लेख किया है।
अगर दोनों मार्ग लंबे समय तक असुरक्षित रहे, तो संभावित परिणामों में शामिल हैं:
सबसे खतरनाक स्थिति जरूरी नहीं कि बाब अल-मंदब पर हूतियों का औपचारिक कब्जा हो। यदि वे लंबे समय तक लाल सागर और फारस की खाड़ी—दोनों दिशाओं में जहाजों को धमकाने की क्षमता बनाए रखते हैं, तो इतना ही वैश्विक शिपिंग फैसलों और ऊर्जा कीमतों को बदलने के लिए पर्याप्त हो सकता है।
यही वजह है कि टैंकर हमलों के अपुष्ट दावे भी महत्वपूर्ण हैं। समुद्री प्रतिबंध का रणनीतिक असर हर कथित हमले की स्वतंत्र पुष्टि से पहले शुरू हो सकता है—क्योंकि समुद्री chokepoint से गुजरने वाली अनिश्चितता खुद लागत बढ़ाती है। लेकिन सत्यापित हमलों और हूती दावों के बीच फर्क करना भी उतना ही जरूरी है। इसी से पता चलेगा कि यह अभियान टिकाऊ समुद्री रोकथाम की ओर बढ़ रहा है या अभी मुख्यतः चुनिंदा हमलों से समर्थित दबाव की रणनीति बना हुआ है।