काला सागर में संघर्ष अब केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहा है। रूस यूक्रेन के बंदरगाहों और जहाजों को निशाना बना रहा है, जबकि यूक्रेन रूसी तेल रिफाइनरियों, निर्यात सुविधाओं और समुद्री परिसंपत्तियों पर ड्रोन हमले कर रहा है। नतीजा यह है कि एक अहम व्यापारिक समुद्री मार्ग अधिक जोखिमभरा हो गया है, अनाज की ढुलाई बाधित हुई है और रूस की ईंधन व्यवस्था पर बार-बार दबाव पड़ रहा है।
पिवदेन्नी, ओदेसा और चोर्नोमोर्स्क में क्या हुआ?
25 अगस्त को रूस के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उसने पिवदेन्नी—जिसे युज़्नी भी कहा जाता है—बंदरगाह में तीन मालवाहक जहाजों और एक टैंकर को निशाना बनाया। उसका यह भी दावा था कि पास के ओदेसा बंदरगाह में एक अन्य मालवाहक जहाज पर हमला हुआ तथा पिवदेन्नी और ओदेसा की बंदरगाह सुविधाओं और चोर्नोमोर्स्क की ईंधन-भंडारण सुविधाओं को क्षति पहुंची। मॉस्को ने आरोप लगाया कि जहाज यूक्रेनी सेना के लिए आपूर्ति ले जा रहे थे, लेकिन रॉयटर्स इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं कर सका।
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इससे पहले जुलाई में रूस ने चोर्नोमोर्स्क में माल उतार रहे एक ड्राई-कार्गो जहाज और बंदरगाह ढांचे, साथ ही ओदेसा की सुविधाओं और जहाजों को निशाना बनाने का दावा किया था।
4 यूक्रेनी अधिकारियों ने अलग से ओदेसा में घातक रूसी हमलों तथा नागरिक, औद्योगिक और बंदरगाह ढांचे को नुकसान की सूचना दी थी।
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मामला केवल प्रत्यक्ष भौतिक नुकसान का नहीं है। जब जहाज-मालिक किसी बंदरगाह को असुरक्षित मानने लगते हैं, तो औपचारिक नाकाबंदी न होने पर भी जहाजों का आना रुक सकता है और माल की खेपें देर से पहुंचती या दूसरे मार्गों पर भेजी जाती हैं। जुलाई में यूक्रेन ने कहा था कि तेज होते हमलों के कारण जहाज-मालिकों ने उसके काला सागर बंदरगाहों पर जहाज भेजना रोक दिया था।
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वाणिज्यिक जहाजरानी और आम लोगों पर असर
इस तनाव का सीधा जोखिम जहाजों के चालक दल और बंदरगाह कर्मियों पर है। यूक्रेन के बंदरगाह प्रशासन ने जुलाई में नागरिक जहाजों पर 57 रूसी हमले दर्ज किए, जिनमें 22 समुद्र में हुए, और बंदरगाह ढांचे पर 67 हमले बताए। ये यूक्रेनी अधिकारियों के आंकड़े हैं, जिनका स्वतंत्र ऑडिट नहीं हुआ है।
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रॉयटर्स के अनुसार, हमलों में विदेशी ध्वज वाले नागरिक जहाजों को नुकसान पहुंचा और जुलाई के एक हमले में एक जहाज पर सवार दो यूक्रेनी नागरिक मारे गए; ओदेसा में भी एक व्यक्ति की मौत हुई।
3 सक्रिय युद्ध क्षेत्र में हर घटना की पूरी स्वतंत्र पुष्टि और जिम्मेदारी तय करना कठिन है, लेकिन व्यावहारिक निष्कर्ष साफ है: वाणिज्यिक जहाजरानी का जोखिम काफी बढ़ गया है।
रूसी रिफाइनरियों और समुद्री लॉजिस्टिक्स पर यूक्रेन का जवाब
यूक्रेन ने समुद्री अभियानों के साथ रूस की ऊर्जा अवसंरचना पर लंबी दूरी के ड्रोन हमले भी तेज किए हैं। रॉयटर्स ने बताया कि उत्पादन क्षमता के हिसाब से रूस की सातवीं सबसे बड़ी पर्म रिफाइनरी 21 अगस्त के ड्रोन हमले में तकनीकी इकाइयों को नुकसान के बाद बंद हो गई।
32 रॉयटर्स के मुताबिक, अगस्त के अंत में हुए हमलों के बाद लुकोइल की NORSI रिफाइनरी—रूस की चौथी सबसे बड़ी—और नोवोशाख्तिंस्क रिफाइनरी में भी प्रसंस्करण निलंबित हुआ।
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मॉस्को क्षेत्र को ईंधन की सबसे बड़ी आपूर्ति करने वाली मॉस्को रिफाइनरी को व्यापक ड्रोन क्षति के बाद कम-से-कम छह महीने तक बंद रहने की आशंका बताई गई।
35 ऐसे हमले तत्काल ईंधन उत्पादन घटा सकते हैं, महंगी मरम्मत और वायु-रक्षा तैनाती की जरूरत बढ़ा सकते हैं तथा कच्चे तेल को घरेलू रिफाइनिंग के बजाय निर्यात की ओर मोड़ सकते हैं। रॉयटर्स द्वारा उद्धृत उद्योग स्रोतों के अनुसार, रिफाइनरी बंद रहने से प्रसंस्करण घटा तो रूस के पश्चिमी बंदरगाहों से कच्चे तेल का निर्यात मई में अप्रैल के मुकाबले 15% बढ़ गया।
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फिर भी यह कहना सावधानी मांगता है कि यूक्रेन ने रूस की रिफाइनिंग क्षमता का कोई निश्चित “बड़ा हिस्सा” स्थायी रूप से निष्क्रिय कर दिया है। असर हर संयंत्र और समय के हिसाब से बदलता है। रॉयटर्स के अनुसार, 2025 में कम-से-कम 17 प्रमुख रिफाइनरियों पर हमलों के बावजूद रूस अतिरिक्त क्षमता के इस्तेमाल से सालाना तेल प्रसंस्करण की गिरावट को करीब 3% तक सीमित रखने में सक्षम रहा।
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डीजल और वैश्विक ईंधन कीमतों का असर तय करना क्यों मुश्किल है
रिफाइनरियों के ठप होने से पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता घट सकती है, क्योंकि कम कच्चा तेल ईंधन उत्पादों में बदला जाता है। रॉयटर्स ने रिफाइनरी हमलों और मौसमी मांग के बीच रूस के कुछ क्षेत्रों में ईंधन की कमी की खबर दी।
32 लेकिन उपलब्ध साक्ष्य रूस के डीजल निर्यात में किसी एक मौजूदा राष्ट्रीय गिरावट का ठोस आकलन नहीं देते। न ही किसी खास वैश्विक डीजल मूल्य-परिवर्तन को केवल यूक्रेनी हमलों से जोड़ना उचित होगा।
व्यापक ऊर्जा असर मुख्यतः जोखिम से जुड़ा है। रिफाइनरियों, निर्यात टर्मिनलों और समुद्री मार्गों में व्यवधान कच्चे तेल और ईंधन उत्पादों के प्रवाह को बदल सकता है, बीमा तथा मालभाड़ा बढ़ा सकता है और आपूर्ति को कम अनुमानित बना सकता है। रॉयटर्स के आकलन में संघर्ष से प्रभावित देशों का 2025 के उत्पादन आधार पर तेल उत्पादन करीब 4.5 करोड़ बैरल प्रतिदिन था—वैश्विक आपूर्ति के 43% से अधिक। यह बताता है कि अलग-अलग संघर्षों का जोखिम ऊर्जा बाजारों में कैसे एक-दूसरे पर चढ़ सकता है।
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अनाज निर्यात पर सबसे तात्कालिक दबाव
यूक्रेन के लिए काला सागर मार्ग क्यों इतना महत्वपूर्ण है, यह उसके निर्यात ढांचे से स्पष्ट है। उसके गेहूं, मक्का और सूरजमुखी बीज के करीब 90% निर्यात सामान्यतः काला सागर के रास्ते जाते हैं, जबकि कृषि क्षेत्र देश की निर्यात आय में लगभग 60% योगदान देता है।
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बाधा का असर तेज रहा है: रूसी हमलों और जहाजरानी में व्यवधान के चलते अगस्त के पहले दो हफ्तों में यूक्रेनी अनाज निर्यात 75% गिर गया।
52 उद्योग के पहले के अनुमानों में कहा गया था कि लगातार हमले मासिक अनाज खेपों को एक-तिहाई तक घटा सकते हैं।
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रूस को भी अपने मार्ग बदलने पड़े हैं। रॉयटर्स के अनुसार, काला सागर और आज़ोव सागर में यूक्रेनी ड्रोन हमलों के बाद दक्षिणी रास्तों का जोखिम बढ़ने से रूसी अनाज निर्यातक खेपों को बाल्टिक बंदरगाहों की ओर मोड़ रहे हैं।
51 दोनों देश वैश्विक अनाज व्यापार में अहम हैं; दोनों ओर के व्यवधान ने गेहूं वायदा कीमतों को तीन साल के उच्च स्तर तक पहुंचाने में मदद की, ब्लूमबर्ग ने रिपोर्ट किया।
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यह सिर्फ समुद्री लड़ाई नहीं, आर्थिक क्षमता की लड़ाई है
इस अभियान को दोनों पक्षों की विदेशी मुद्रा कमाने और युद्धकालीन रसद चलाने की क्षमता पर पारस्परिक दबाव के रूप में देखना चाहिए। यूक्रेन को कृषि निर्यात और अर्थव्यवस्था के लिए चालू बंदरगाह चाहिए। रूस के लिए ऊर्जा उत्पादन, तेल निर्यात और भरोसेमंद समुद्री मार्ग महत्वपूर्ण हैं।
किसी भी पक्ष ने दूसरे की व्यापार व्यवस्था को पूरी तरह बंद नहीं किया है। अभी तस्वीर बार-बार के व्यवधान की है: जहाज बंदरगाहों पर आने से रुकते हैं, खेपें वैकल्पिक मार्ग खोजती हैं, रिफाइनरियां बंद होकर फिर चलती हैं और बीमा, रक्षा, मरम्मत तथा देरी की लागत बढ़ती जाती है। इसलिए काला सागर की सुरक्षा केवल युद्धरत पक्षों का मुद्दा नहीं है; इसका असर नाविकों, अनाज खरीदने वाले देशों और क्षेत्र से बहुत दूर स्थित ऊर्जा बाजारों तक पड़ता है।
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