इस अवधि में यूक्रेन ने भी रूस के अंदर ड्रोन हमले तेज़ किए। दक्षिणी रूस में हुए एक हमले में तीन लोगों की मौत हुई और कई घरों को नुकसान पहुँचा।
यूक्रेन हाल के महीनों में लंबी दूरी के ड्रोन का इस्तेमाल बढ़ा रहा है। इनका उद्देश्य रूस की सैन्य और रणनीतिक संरचनाओं को निशाना बनाकर युद्ध की लागत बढ़ाना और यह दिखाना है कि यूक्रेनी बल रूस के भीतर गहराई तक हमला करने में सक्षम हैं।
लगातार हो रहे हमलों के बीच दोनों देश एक‑दूसरे को शांति प्रयासों में बाधा डालने का दोष दे रहे हैं।
इन विरोधाभासी दावों के कारण बातचीत में भरोसे का माहौल बनाना मुश्किल हो जाता है।
वार्ता फिर शुरू होने के बावजूद कई बुनियादी मुद्दों पर गहरी असहमति बनी हुई है।
यूक्रेन चाहता है कि भविष्य में किसी और आक्रमण को रोकने के लिए उसे पश्चिमी देशों से मजबूत सुरक्षा गारंटी मिले। चर्चा में ऐसे प्रस्ताव भी शामिल हैं जो NATO की सामूहिक रक्षा व्यवस्था जैसी सुरक्षा व्यवस्था प्रदान कर सकते हैं।
सबसे बड़ा विवाद कब्ज़ाए गए क्षेत्रों को लेकर है। रूस कुछ क्षेत्रों पर अपने नियंत्रण को स्वीकार कराने की मांग कर रहा है, जबकि यूक्रेन और उसके कई यूरोपीय सहयोगी इसे स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं।
कई यूरोपीय सरकारों को डर है कि अगर कोई समझौता रूस के क्षेत्रीय लाभ को वैध ठहरा देता है, तो इससे यूक्रेन की सुरक्षा कमजोर पड़ सकती है और भविष्य में फिर से आक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
रूस‑यूक्रेन संघर्ष की मौजूदा स्थिति एक विरोधाभास दिखाती है। एक तरफ बातचीत फिर शुरू हो रही है, वहीं दूसरी तरफ मिसाइल, ड्रोन और सीमा‑पार हमले लगातार जारी हैं।
फिलहाल यह वार्ता तुरंत युद्ध समाप्त करने से ज्यादा इस बात को तय करने की कोशिश है कि भविष्य में अगर कोई समझौता होता है, तो उसकी शर्तें क्या होंगी और दोनों पक्ष किस स्थिति से बातचीत की मेज पर बैठेंगे।
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