इस प्रक्रिया में हजारों कर्मचारियों को नई AI परियोजनाओं में लगाया जा रहा है और कई प्रबंधन भूमिकाएँ कम की जा रही हैं। नेतृत्व का तर्क है कि इससे कंपनी तेजी से निर्णय ले सकेगी और AI की दौड़ में प्रतिस्पर्धा कर पाएगी।
लेकिन कर्मचारियों के लिए यह बदलाव अचानक और अस्थिर महसूस हुआ।
कंपनी के अंदर से आई रिपोर्टों के अनुसार, छंटनी से पहले ही कर्मचारियों में तनाव और अनिश्चितता का माहौल बन गया था। कई मौजूदा और पूर्व कर्मचारियों ने बताया कि AI‑केंद्रित बदलाव ने Meta के कर्मचारियों में व्यापक चिंता और नौकरी की सुरक्षा को लेकर डर पैदा किया।
सोशल मीडिया पर भी कुछ अनुभव वायरल हुए। एक पूर्व कर्मचारी ने ऑफिस के माहौल को "लगभग कयामत जैसा" (doomsday) बताया—जहाँ लोग छंटनी की खबर आने से पहले बेहद तनाव में थे।
कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि कंपनी की वित्तीय स्थिति मजबूत होने के बावजूद कर्मचारियों का मनोबल ऐतिहासिक रूप से काफी नीचे चला गया था।
इनमें से कई विवरण व्यक्तिगत अनुभवों पर आधारित हैं, लेकिन उन्होंने Meta की रीस्ट्रक्चरिंग को लेकर बनी अस्थिरता की भावना को और बढ़ा दिया।
छंटनी के अलावा Meta की कुछ AI पहलों को लेकर भी कर्मचारियों के बीच विरोध सामने आया है।
रिपोर्टों के मुताबिक 1,000 से ज्यादा कर्मचारियों ने एक याचिका पर हस्ताक्षर किए, जिसमें उस सॉफ्टवेयर का विरोध किया गया जो कंप्यूटर पर इंसानों के व्यवहार को ट्रैक करता है और उस डेटा का इस्तेमाल AI को ट्रेन करने के लिए किया जा सकता है।
आलोचकों का कहना है कि ऐसी पहलें कर्मचारियों की गोपनीयता और कार्यस्थल निगरानी को लेकर नए सवाल खड़े करती हैं।
Meta की छंटनी केवल कंपनी के अंदर ही नहीं, बल्कि कुछ देशों की सरकारों के लिए भी चिंता का विषय बन गई है।
उदाहरण के लिए आयरलैंड में—जहाँ Meta के लगभग 1,800 कर्मचारी हैं—करीब 350 नौकरियाँ खतरे में बताई गई हैं।
डबलिन में Meta का अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय स्थित है, इसलिए वहाँ होने वाली छंटनी पर सरकार और नीति‑निर्माताओं की खास नजर है। विश्लेषकों का कहना है कि इतनी बड़ी टेक कंपनी में नौकरी कटौती का असर देश के व्यापक टेक सेक्टर पर भी पड़ सकता है।
छंटनी शुरू होने के बाद CEO मार्क ज़करबर्ग ने कर्मचारियों को संदेश भेजकर कहा कि कंपनी इस साल और कंपनी‑व्यापी छंटनी की उम्मीद नहीं कर रही है और उन्होंने इस प्रक्रिया के भावनात्मक असर को भी स्वीकार किया।
हालांकि पहले की आंतरिक बैठकों में नेतृत्व ने यह भी कहा था कि भविष्य की परिस्थितियों के बारे में पूरी गारंटी देना मुश्किल है, जिससे कर्मचारियों की चिंता पूरी तरह खत्म नहीं हुई।
ज़करबर्ग ने यह भी स्पष्ट किया कि छंटनी सीधे AI टूल्स द्वारा कर्मचारियों को बदलने की वजह से नहीं हो रही है, बल्कि AI पर भारी निवेश के कारण संसाधनों का पुनर्वितरण करना पड़ रहा है।
Meta का यह कदम टेक उद्योग में चल रहे एक बड़े बदलाव की झलक देता है। बड़ी कंपनियाँ AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर अभूतपूर्व रकम खर्च कर रही हैं, और इसके साथ‑साथ अपनी वर्कफोर्स को भी नए ढांचे में ढाल रही हैं।
आलोचकों के लिए यह विरोधाभासी दिखता है—एक तरफ अरबों डॉलर का निवेश और दूसरी तरफ हजारों नौकरियाँ खत्म होना। वहीं Meta के लिए यह भविष्य की प्रतिस्पर्धा में बने रहने की रणनीति है।
किसी भी दृष्टिकोण से देखें, यह स्पष्ट है कि AI की दौड़ केवल तकनीक को नहीं, बल्कि पूरे टेक उद्योग की नौकरियों और कार्यसंस्कृति को भी बदल रही है।
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