ईरानी नेतृत्व ने हॉर्मोजगान प्रांत में अमेरिकी हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इसे युद्धविराम का 'स्पष्ट' और 'घोर उल्लंघन' बताया, और अप्रैल के अंत में दी गई अमेरिकी ठिकानों पर 'लंबे और दर्दनाक हमले' करने की चेतावनी को दो... 25 26 मई के हमलों के दौरान ईरान ने अमेरिकी रीपर ड्रोन मार गिराने और एफ 35 लड़ाकू विमान पर गोली च...

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: How has Iran's leadership responded to recent US strikes near the Strait of Hormuz, what specific threats has it made regarding the scope an. Article summary: Iran's leadership has strongly condemned the latest US strikes in Hormozgan province as a "flagrant" and "grave violation" of the ceasefire, while reiterating its longstanding threat to respond with "long and painful str. Topic tags: general, general web, user generated. Reference image context from search candidates: Reference image 1: visual subject "Warfare, Irregular Threats, and Terrorism Program. Economic Security ... Iran retaliated immediately, unleashing attacks on U.S. and other targets" source context "The Regional Reverberations of the U.S. and Israeli Strikes on Iran" Reference image 2: visual subject "Trump claims full control of Strait of Hormuz
अमेरिका और ईरान के बीच नाजुक युद्धविराम एक बार फिर गहरे संकट में आ गया है। 25-26 मई, 2026 को अमेरिकी सेना ने दक्षिणी ईरान में 'आत्मरक्षात्मक हमले' किए, जिनमें मिसाइल लॉन्च स्थलों और खदानें बिछाने वाली नौकाओं को निशाना बनाया गया। इसके जवाब में ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी और अमेरिकी ठिकानों पर 'लंबे और दर्दनाक हमले' करने की चेतावनी दोहराई।
ईरान के विदेश मंत्रालय ने 8 अप्रैल से लागू युद्धविराम का 'स्पष्ट उल्लंघन' बताते हुए अमेरिकी कार्रवाई की कड़ी निंदा की । एक अलग बयान में इसे समझौते का 'घोर उल्लंघन' करार दिया गया, और हॉर्मुज जलडमरूमध्य के पास हॉर्मोजगान प्रांत में हुए हमलों पर विशेष रोष जताया
।
यह कोई अकेली घटना नहीं है। ईरान लगातार अमेरिका पर युद्धविराम तोड़ने का आरोप लगाता रहा है। 7 मई को भी, खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के एक प्रवक्ता ने इसी तरह का आरोप लगाया था जब अमेरिकी हमलों ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों और हॉर्मोजगान प्रांत में ठिकानों को निशाना बनाया था। आरोप-प्रत्यारोप का यह सिलसिला इस युद्धविराम की पहचान बन चुका है, जहां दोनों पक्ष एक-दूसरे पर उंगली उठाते हुए खुद हमले कर रहे हैं।
केवल कूटनीतिक भाषा तक सीमित न रहते हुए, ईरान ने नवीनतम संघर्ष के दौरान सीधी सैन्य कार्रवाई की भी बात कही। इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि उसके बलों ने हमलों के दौरान ईरानी हवाई क्षेत्र में कथित रूप से घुसे एक अमेरिकी रीपर ड्रोन को मार गिराया और एक F-35 लड़ाकू विमान पर गोलीबारी की। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना मुश्किल है, लेकिन तेहरान के संदेश में इनका एक स्पष्ट उद्देश्य है: यह दिखाना कि ईरान हमलों को चुपचाप नहीं सहेगा।
IRGC ने एक व्यापक चेतावनी भी जारी करते हुए कहा कि वह "जवाबी कार्रवाई के अपने अधिकार को वैध और निश्चित मानता है" और भविष्य में किसी भी युद्धविराम उल्लंघन का जवाब देने की कसम खाई। यह भाषा युद्ध के और बढ़ने की संभावना के बारे में बहुत कम अस्पष्टता छोड़ती है।
मई के हमलों से पहले, ईरान पहले ही अपनी जवाबी कार्रवाई का संभावित दायरा रेखांकित कर चुका था। 30 अप्रैल और 1 मई को, IRGC के सदस्यों सहित वरिष्ठ ईरानी अधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से चेतावनी दी कि कोई भी नया अमेरिकी हमला, चाहे वह सीमित ही क्यों न हो, पूरे क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर 'लंबे और दर्दनाक हमलों' से मिलेगा। यह धमकी हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण के ईरान के दावे की पुनः पुष्टि के साथ जोड़ी गई थी, वह महत्वपूर्ण जलमार्ग जिससे होकर युद्ध से पहले दुनिया का 20% तेल गुज़रता था।
यह रुख एक केंद्रीय अमेरिकी मांग को सीधे जटिल बनाता है: जलडमरूमध्य को पूरी तरह से फिर से खोलना। ईरान ने अपने तेल निर्यात पर अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी के जवाब में इस जलमार्ग को प्रभावी रूप से बंद रखा है, और उसके नेतृत्व ने संकेत दिया है कि एक संभावित शांति समझौते में भी, "हॉर्मुज जलडमरूमध्य अभी भी ईरानी प्रबंधन के अधीन रहेगा"। ये धमकियां केवल बेकार की बयानबाजी नहीं हैं। 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से, ईरान ने मिसाइलों और ड्रोनों से अमेरिकी दूतावासों, सैन्य प्रतिष्ठानों और तेल बुनियादी ढांचे—जिसमें हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाज़ भी शामिल हैं—को निशाना बनाते हुए एक व्यापक स्ट्राइक रेडियस का प्रदर्शन किया है।
अप्रैल की शुरुआत में हुआ युद्धविराम अब नाम मात्र का रह गया है। अमेरिका और ईरान दोनों ने आक्रामक कार्रवाइयां की हैं, और प्रत्येक पक्ष अपनी कार्रवाई को 'रक्षात्मक' या 'आत्मरक्षा' के रूप में उचित ठहरा रहा है। पर्यवेक्षकों द्वारा इस युद्धविराम को बार-बार 'नाजुक' और 'अस्थायी' बताया गया है।
पाकिस्तान की मध्यस्थता में चल रही शांति वार्ता इस बुनियादी गतिरोध को हल नहीं कर पाई है। ईरान ने 10 मई को एक अमेरिकी युद्धविराम प्रस्ताव का जवाब देते हुए जोर दिया कि बातचीत का फोकस लेबनान सहित 'सभी मोर्चों पर' युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने और शिपिंग लेन को सुरक्षित करने पर होना चाहिए। दूसरी ओर, वाशिंगटन हॉर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से फिर से खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को वापस लेने की मांग पर अड़ा है, जबकि राष्ट्रपति ट्रंप ने समझौता न होने पर पूर्ण पैमाने पर बमबारी फिर से शुरू करने की धमकी दी है।
25-26 मई के हमलों ने कूटनीति के माहौल को और जहरीला बना दिया है। युद्धविराम का बार-बार उल्लंघन, अमेरिकी ठिकानों पर 'लंबे और दर्दनाक हमलों' की स्पष्ट ईरानी धमकी, और दोनों पक्षों का अपनी मूल मांगों—खासकर जलडमरूमध्य के नियंत्रण—पर अड़े रहना, खुले संघर्ष की पूर्ण वापसी के जोखिम को वास्तविक बनाता है। कूटनीतिक रास्ता अत्यधिक दबाव में है, और जैसे-जैसे दोनों देश अपनी सैन्य प्रतिक्रियाएं तैयार कर रहे हैं, बातचीत के जरिए समाधान की खिड़की सिकुड़ती जा रही है।
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ईरानी नेतृत्व ने हॉर्मोजगान प्रांत में अमेरिकी हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इसे युद्धविराम का 'स्पष्ट' और 'घोर उल्लंघन' बताया, और अप्रैल के अंत में दी गई अमेरिकी ठिकानों पर 'लंबे और दर्दनाक हमले' करने की चेतावनी को दो...
ईरानी नेतृत्व ने हॉर्मोजगान प्रांत में अमेरिकी हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इसे युद्धविराम का 'स्पष्ट' और 'घोर उल्लंघन' बताया, और अप्रैल के अंत में दी गई अमेरिकी ठिकानों पर 'लंबे और दर्दनाक हमले' करने की चेतावनी को दो... 25 26 मई के हमलों के दौरान ईरान ने अमेरिकी रीपर ड्रोन मार गिराने और एफ 35 लड़ाकू विमान पर गोली चलाने का दावा किया, जबकि अमेरिका ने इसे मिसाइल साइटों और खदान बिछाने वाली नौकाओं पर 'आत्मरक्षात्मक हमला' बताया। [4][5]
हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर बुनियादी असहमति और पाकिस्तान की मध्यस्थता में रुकी बातचीत के बीच, 8 अप्रैल का युद्धविराम बार बार उल्लंघनों के कारण लगभग ध्वस्त होने की कगार पर है। [6][7]