जुलाई 2026 के अंत में चीन की स्थापित सौर क्षमता 1,286 गीगावाट थी, जो कोयला आधारित क्षमता के 1,285 गीगावाट से थोड़ी अधिक थी। इस तरह सौर ऊर्जा क्षमता के हिसाब से देश का सबसे बड़ा बिजली स्रोत बन गई। जनवरी जुलाई 2026 में सौर और पवन ऊर्जा में कुल 133.22 गीगावाट नई क्षमता जुड़ी, जो देश में जोड़ी गई कुल नई बिजली क्षमता का...
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शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: How has China’s installed solar capacity, reaching 1.286 billion kilowatts by the end of July 2026 and narrowly surpassing coal’s 1.285 bill. Article summary: China’s solar fleet became the country’s largest *installed* power source because exceptionally rapid utility-scale and distributed PV deployment lifted it to 1.286 billion kW at end-July 2026, just above coal’s 1.285 bi. Topic tags: general, general web, user generated, news. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, charts w
चीन में सौर ऊर्जा ने एक अहम प्रतीकात्मक पड़ाव पार कर लिया है। जुलाई 2026 के अंत तक देश की स्थापित फोटोवोल्टिक (PV) क्षमता 1.286 अरब किलोवाट, यानी 1,286 गीगावाट, पहुंच गई। यह कोयला आधारित बिजली क्षमता के 1.285 अरब किलोवाट से मामूली अधिक थी। सौर ऊर्जा अब स्थापित क्षमता के आधार पर चीन का सबसे बड़ा बिजली स्रोत है और कुल स्थापित क्षमता में इसकी हिस्सेदारी 30% से अधिक हो गई है। 25
फिर भी इस आंकड़े का अर्थ यह नहीं है कि सौर ऊर्जा चीन में सबसे अधिक बिजली पैदा कर रही है, या वह कोयले जितनी भरोसेमंद आपूर्ति दे सकती है। असली बदलाव अब पैनल लगाने की रफ्तार से नहीं, बल्कि इस बात से तय होगा कि सौर बिजली को ग्रिड तक, मांग वाले इलाकों तक और खासकर शाम व चरम मांग के समय तक कितनी विश्वसनीयता से पहुंचाया जा सकता है।
यह बढ़त विशाल सोलर पार्कों और छतों या स्थानीय स्तर पर लगे वितरित सौर संयंत्रों—दोनों के तेज विस्तार से आई है। जुलाई के अंत में कुल 1,286 गीगावाट PV क्षमता में 704 गीगावाट यूटिलिटी-स्केल सौर परियोजनाओं की और 582 गीगावाट वितरित सौर की थी। 22
2026 के पहले सात महीनों में चीन ने 86.15 गीगावाट सौर और 47.07 गीगावाट पवन क्षमता जोड़ी। दोनों मिलाकर 133.22 गीगावाट की यह वृद्धि सभी नई उत्पादन क्षमता के करीब 70% के बराबर थी। 36 जून के अंत तक सौर और कोयला क्षमता लगभग बराबर थी—क्रमशः करीब 1.274 अरब किलोवाट और 1.275 अरब किलोवाट।
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यह घरेलू विस्तार वैश्विक सौर बाजार में चीन की पकड़ को भी मजबूत करता है। IEA PVPS के आकलन के अनुसार, वैश्विक वार्षिक PV क्षमता वृद्धि में चीन की हिस्सेदारी लगभग 60% रही और वह संचयी क्षमता के मामले में भी सबसे बड़ा बाजार बना रहा। 49 अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के मुताबिक, वैश्विक सौर आपूर्ति-श्रृंखला उत्पादन क्षमता का लगभग 85% चीन के पास है; PV वेफर निर्माण में उसकी हिस्सेदारी और भी अधिक है।
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इस पैमाने से चीनी निर्माताओं को बड़ा घरेलू बाजार और उत्पादन क्षमता मिलती है। लेकिन अत्यधिक केंद्रित आपूर्ति-श्रृंखला तथा वैश्विक विनिर्माण में कड़ी प्रतिस्पर्धा भी उद्योग के लिए जोखिम हैं। 54
स्थापित क्षमता से आशय किसी संयंत्र की नाममात्र अधिकतम उत्पादन क्षमता से है—वह भी अनुकूल परिस्थितियों में। यह नहीं बताती कि संयंत्र साल भर में कितनी बिजली बनाएगा या बिजली व्यवस्था के सबसे दबाव वाले समय में उस पर कितना भरोसा किया जा सकता है।
सौर उत्पादन दिन के उजाले, मौसम, मौसमों और स्थान के साथ बदलता है; रात में यह शून्य होता है। इसके विपरीत, कोयला संयंत्र ईंधन, रखरखाव और तकनीकी सीमाओं के अधीन होने के बावजूद आम तौर पर जरूरत पड़ने पर चलाए जा सकते हैं। इसलिए 1 गीगावाट सौर और 1 गीगावाट कोयला क्षमता, नियंत्रित और सुनिश्चित बिजली आपूर्ति के लिहाज से समान नहीं हैं।
उत्पादन के आंकड़े यह अंतर साफ दिखाते हैं। 2026 की पहली छमाही में पवन और सौर ऊर्जा ने मिलकर कुल बिजली खपत का 24.6% पूरा किया, जबकि कोयला बिजली का कुल उत्पादन में हिस्सा 49.7% था। हालांकि यह पहली छमाही थी जब कोयला उत्पादन की हिस्सेदारी 50% से नीचे आई। 35
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इसलिए योजना बनाने वालों के लिए केवल गीगावाट गिनना पर्याप्त नहीं है। अहम सवाल ये हैं:
चीन की नवीकरणीय ऊर्जा विकास योजना ने पहली बार भरोसेमंद प्रतिस्थापन और पीक-आवर बिजली आपूर्ति को लक्ष्य-प्रणाली में शामिल किया है। लक्ष्य है कि 2030 तक पवन और सौर की औसत भरोसेमंद क्षमता 8% तक पहुंचे तथा गर्मी और सर्दी की शाम के पीक समय में इन दोनों का बिजली आपूर्ति में 20% योगदान हो। 2
स्थापित क्षमता में सौर के आगे निकलने का यह अर्थ नहीं कि चीन अपना कोयला बेड़ा जल्दी बंद कर सकता है। 15वीं पंचवर्षीय योजना (2026-2030) में भी कोयला, तेल और गैस को ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा के लिए सहारा माना गया है, भले ही गैर-जीवाश्म स्रोतों को बिजली उत्पादन का मुख्य स्रोत बनाने का लक्ष्य हो। 4
इससे कोयले की भूमिका बदलने का संकेत मिलता है। लगातार चलने वाले बेसलोड स्रोत के बजाय कोयला संयंत्रों की जरूरत ऐसे समय बढ़ सकती है जब हवा और धूप कम हो, शाम को मांग बढ़े, मौसम अत्यधिक हो या आपूर्ति पर दबाव आए। योजना के विश्लेषण में कोयले को लचीलेपन और क्षमता-सहायता देने वाली भूमिका की ओर बढ़ता बताया गया है। 7
यह आसान बदलाव नहीं है। बड़ी मात्रा में परिवर्तनशील बिजली वाले तंत्र को केवल लचीले तापीय संयंत्रों से नहीं चलाया जा सकता। इसके लिए राज्यों व क्षेत्रों के बीच मजबूत ट्रांसमिशन, ऊर्जा भंडारण, मांग-प्रतिक्रिया, बेहतर डिस्पैच व्यवस्था और ऐसे बिजली बाजार चाहिए जो केवल ऊर्जा नहीं, आपूर्ति की विश्वसनीयता को भी महत्व दें।
चीन की 15वीं पंचवर्षीय योजना की अवधि 2026 से 2030 तक है। इसका रुख स्पष्ट है: गैर-जीवाश्म स्रोतों की उत्पादन हिस्सेदारी बढ़ाने के साथ उन्हें बिजली प्रणाली की भरोसेमंदता में भी अधिक योगदान देना होगा।
प्रमुख लक्ष्य और निवेश योजनाएं:
1,286 गीगावाट का आंकड़ा दिखाता है कि चीन में बिजली क्षेत्र का निवेश मिश्रण असाधारण गति से बदल रहा है। इससे वैश्विक सौर बाजार के केंद्र के रूप में चीन की स्थिति और मजबूत होती है तथा कम-कार्बन बिजली वृद्धि की संभावना बढ़ती है।
लेकिन निर्णायक पैमाना यह नहीं होगा कि सौर क्षमता कागज पर कोयले से कुछ गीगावाट आगे रहती है या नहीं। असली कसौटी यह है कि चीन अपने विशाल सौर बेड़े को ग्रिड, भंडारण, ट्रांसमिशन और लचीली मांग के जरिए भरोसेमंद तथा जरूरत की जगह पहुंचने वाली बिजली में बदल पाता है या नहीं—और साथ ही कोयला उत्पादन घटाते हुए आपूर्ति सुरक्षा बनाए रखता है। 15वीं पंचवर्षीय योजना में नवीकरणीय ऊर्जा की भरोसेमंद हिस्सेदारी पर नया जोर बताता है कि नीति-निर्माता अब इसी को केंद्रीय चुनौती मान रहे हैं। 2
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जुलाई 2026 के अंत में चीन की स्थापित सौर क्षमता 1,286 गीगावाट थी, जो कोयला आधारित क्षमता के 1,285 गीगावाट से थोड़ी अधिक थी। इस तरह सौर ऊर्जा क्षमता के हिसाब से देश का सबसे बड़ा बिजली स्रोत बन गई।
जुलाई 2026 के अंत में चीन की स्थापित सौर क्षमता 1,286 गीगावाट थी, जो कोयला आधारित क्षमता के 1,285 गीगावाट से थोड़ी अधिक थी। इस तरह सौर ऊर्जा क्षमता के हिसाब से देश का सबसे बड़ा बिजली स्रोत बन गई। जनवरी जुलाई 2026 में सौर और पवन ऊर्जा में कुल 133.22 गीगावाट नई क्षमता जुड़ी, जो देश में जोड़ी गई कुल नई बिजली क्षमता का करीब 70% थी।
अगली बड़ी चुनौती सौर संयंत्र लगाना नहीं, बल्कि बिजली को जरूरत के समय और स्थान तक पहुंचाना है। इसके लिए ग्रिड, भंडारण, लंबी दूरी के ट्रांसमिशन और मांग प्रबंधन पर निवेश बढ़ाया जा रहा है।