लगभग सात दशकों में AI नियमों और सीमित भविष्यवाणियों से आगे बढ़कर सामग्री बनाने और टूल्स के जरिए कार्रवाई करने वाली प्रणालियों तक पहुंच गया है। पारंपरिक AI आज भी धोखाधड़ी पहचानने, क्रेडिट जोखिम आंकने, स्वास्थ्य जोखिमों का अनुमान लगाने, सिफारिशें देने और वॉइस कमांड समझने जैसे सीमित कार्यों में उपयोगी है। जनरेटिव AI सि...
शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: How has artificial intelligence evolved over the past seven decades—from traditional AI systems that analyse labelled data to classify infor. Article summary: AI has evolved from systems that apply explicit rules or make narrow predictions, to models that generate new content, and now to systems that can plan and carry out multi-step work. These are overlapping capabilities ra. Topic tags: general, general web, government, education, academic. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermark
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का विकास किसी एक तकनीक के दूसरी को पूरी तरह बदल देने की सीधी कहानी नहीं है। पुरानी क्षमताएं आज भी नई प्रणालियों का हिस्सा हैं। नियम-आधारित और सांख्यिकीय भविष्यवाणी करने वाले मॉडल अब भी बड़े पैमाने पर उपयोगी हैं, जनरेटिव AI टेक्स्ट, चित्र, ऑडियो, वीडियो और कोड बना सकता है, जबकि एजेंटिक AI मॉडल को बाहरी टूल्स से जोड़कर कई चरणों में लक्ष्य हासिल करने की कोशिश करता है।
इस बदलाव को समझने का आसान तरीका है: AI फैसले लेने से चीजें बनाने और फिर कार्रवाई करने तक पहुंचा है। इसके साथ जोखिमों का स्वरूप भी बदलता है। भविष्यवाणी करने वाले सिस्टम की सटीकता और निष्पक्षता जांचनी होती है; जनरेटिव सिस्टम में तथ्यात्मकता, सुरक्षा और सामग्री के स्रोत पर ध्यान देना पड़ता है; और एजेंटिक सिस्टम के लिए अनुमतियां, मानव स्वीकृति और ऑडिट रिकॉर्ड भी जरूरी हो जाते हैं।
आधुनिक AI क्षेत्र ने 1950 के दशक में आकार लेना शुरू किया, जब मशीन रीजनिंग, गेम खेलने और न्यूरल नेटवर्क पर शुरुआती काम हुआ। इसके बाद शोध प्रतीकात्मक प्रणालियों और एक्सपर्ट सिस्टम्स से होते हुए 1990 के दशक की मशीन लर्निंग और 2010 के दशक की डीप लर्निंग तक पहुंचा।
इन चरणों को एक-दूसरे से पूरी तरह अलग दौर मानना सही नहीं होगा। आज का कोई AI उत्पाद किसी अनुरोध को वर्गीकृत करने के लिए प्रेडिक्टिव मॉडल, जवाब का मसौदा तैयार करने के लिए जनरेटिव मॉडल और कार्रवाई की अनुमति तय करने के लिए पारंपरिक सॉफ्टवेयर नियंत्रण—तीनों का इस्तेमाल कर सकता है।
पारंपरिक AI में मुख्य रूप से दो तरह के तरीके शामिल हैं:
शुरुआती गेम खेलने वाले प्रोग्रामों ने दिखाया कि सीमित और स्पष्ट वातावरण में मशीन संभावित चालों की खोज कर सकती है। बाद में इसी तरह के तरीकों और सांख्यिकीय लर्निंग का इस्तेमाल कई व्यावहारिक कामों में हुआ, जैसे:
ये सिस्टम तब सबसे अच्छा प्रदर्शन करते हैं जब काम सीमित, बार-बार दोहराया जाने वाला और मापने योग्य हो। वे बड़ी संख्या में मामलों को तेजी से संसाधित कर सकते हैं और अपेक्षाकृत एक जैसे परिणाम दे सकते हैं। स्पष्ट नियमों पर आधारित सिस्टम जटिल मॉडलों की तुलना में जांचने में आसान भी हो सकते हैं।
पारंपरिक AI यह अपने-आप नहीं समझता कि कोई परिणाम क्यों हुआ। मॉडल सांख्यिकीय संबंध पहचान सकता है, लेकिन इससे कारण और परिणाम साबित नहीं होते। अगर प्रशिक्षण डेटा में पक्षपात हो, तो सिस्टम उस पक्षपात को दोहरा या और बढ़ा सकता है। वहीं, नियम-आधारित सिस्टम अपने मूल संदर्भ से बाहर आसानी से विफल हो सकते हैं और जटिल प्रेडिक्टिव मॉडल को समझाना कठिन हो सकता है।
जब वास्तविक दुनिया की परिस्थितियां बदलती हैं, तो मॉडल का प्रदर्शन गिर सकता है। इसे आम तौर पर data drift कहा जाता है। ऋण, नौकरी, बीमा, पुलिसिंग और स्वास्थ्य सेवा जैसे उच्च-जोखिम वाले क्षेत्रों में जिम्मेदार उपयोग के लिए डेटा की गुणवत्ता, bias testing, उपयुक्त explanations, मानव समीक्षा, निगरानी और अपील की व्यवस्था जरूरी है।
जनरेटिव AI टेक्स्ट, चित्र, ऑडियो, वीडियो या कोड के बड़े संग्रहों से पैटर्न सीखता है और उन्हीं पैटर्न के आधार पर नए आउटपुट तैयार करता है। Large language models (LLMs) आम तौर पर टेक्स्ट को क्रमिक रूप से बनाते हैं, जबकि multimodal सिस्टम कई तरह के फॉर्मैट के साथ काम कर सकते हैं।
इसने AI इस्तेमाल करने का अनुभव बदल दिया। अब उपयोगकर्ता को केवल तय कमांड चुनने या classification score पाने तक सीमित नहीं रहना पड़ता। वह सामान्य भाषा में अपना उद्देश्य बता सकता है और सिस्टम से सामग्री का मसौदा तैयार करने, उसे बदलने या समझाने को कह सकता है।
इसके प्रमुख लाभ हैं—ड्राफ्ट तैयार करने में कम समय, प्राकृतिक भाषा में बातचीत, कम लागत और अलग-अलग उपयोगकर्ताओं के लिए कई वैयक्तिकृत संस्करण बनाने की क्षमता। फिर भी, विश्वसनीय विशेषज्ञ निर्णय और एक प्रभावशाली दिखने वाला जवाब एक ही बात नहीं हैं।
Hallucination और अति-आत्मविश्वास: Large language models आत्मविश्वास भरे अंदाज में गढ़ी हुई, गलत, पक्षपाती या जरूरत से ज्यादा सरल जानकारी दे सकते हैं। शोध में hallucination, हानिकारक सामग्री, manipulation, copyright, privacy और security से जुड़े जोखिमों की जांच और निगरानी की जरूरत बताई गई है।
सीखने और शैक्षणिक ईमानदारी पर असर: एक बड़े स्कूल field experiment में पाया गया कि AI tutoring उपलब्ध होने पर छात्रों का प्रदर्शन बेहतर हुआ, लेकिन बिना उचित सुरक्षा उपायों के उस पर निर्भर रहने वाले छात्र AI हटाए जाने के बाद कमजोर प्रदर्शन कर सकते हैं। इससे कौशल सीखने में कमी का संकेत मिलता है। शिक्षक द्वारा तैयार hints देना, सीधे उत्तर बता देने से अधिक सुरक्षित पाया गया। जनरेटिव टूल्स नकल को आसान बना सकते हैं और यह पहचानना कठिन कर सकते हैं कि छात्र ने वास्तव में काम समझा है या नहीं।
कॉपीराइट और provenance: प्रशिक्षण डेटा कहां से आया, किसी कलाकार की शैली की नकल किस सीमा तक स्वीकार्य है और आउटपुट संरक्षित सामग्री को दोहराता है या नहीं—इन सवालों पर अभी भी विवाद जारी है। शिक्षा संबंधी सरकारी मार्गदर्शन भी intellectual-property infringement को एक महत्वपूर्ण जोखिम मानता है।
हानिकारक और manipulative सामग्री: जनरेटिव सिस्टम misinformation, harassment, यौन या हिंसक सामग्री और खतरनाक निर्देश बना सकते हैं। इसलिए testing, safeguards, activity logging और monitoring जरूरी हैं; यह मान लेना पर्याप्त नहीं है कि मॉडल हमेशा इच्छित तरीके से व्यवहार करेगा।
युवा उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा और wellbeing: युवाओं के लिए जनरेटिव AI से जुड़े शोध में मानसिक wellbeing, व्यवहार और सामाजिक विकास, toxicity, privacy तथा misuse या exploitation से जुड़े जोखिम सामने आते हैं। खतरा तब और गंभीर हो सकता है जब कोई उपयोगकर्ता chatbot को योग्य मानवीय सहायता का भरोसेमंद विकल्प समझने लगे।
गोपनीयता और confidentiality: prompts में व्यक्तिगत जानकारी, व्यापारिक रहस्य, ग्राहक सामग्री या कानूनी रूप से privileged data शामिल हो सकता है। संगठनों को स्पष्ट नियम बनाने चाहिए कि किस सेवा में किस तरह का डेटा डाला जा सकता है। संवेदनशील जानकारी के लिए बिना मंजूरी वाले AI सिस्टम को उपयुक्त नहीं मानना चाहिए।
मूल नियम यह होना चाहिए कि AI आउटपुट को प्रमाण नहीं, बल्कि एक ड्राफ्ट समझा जाए। महत्वपूर्ण तथ्यों को भरोसेमंद और आधिकारिक स्रोतों से जांचना चाहिए। चिकित्सा, कानूनी, वित्तीय, रोजगार और safety-critical फैसलों में मानव समीक्षा अनिवार्य होनी चाहिए।
उपयोगी उपायों में स्वीकृत स्रोत सामग्री पर आधारित retrieval, citations, red-team testing, content safeguards, उम्र के अनुसार डिजाइन, audit logs, उपयोगकर्ता को AI के इस्तेमाल की जानकारी देना और data handling, academic use, provenance तथा intellectual-property clearance से जुड़ी नीतियां शामिल हैं। सरकारी मार्गदर्शन भी inaccurate या biased content, privacy breaches, IP infringement और academic-integrity चुनौतियों पर जोर देता है।
एजेंटिक AI में एक अतिरिक्त action layer जुड़ती है। एजेंट किसी लक्ष्य को समझ सकता है, उसे कई चरणों में बांट सकता है, browser, code repository, database या messaging system जैसे टूल्स इस्तेमाल कर सकता है, बीच के परिणामों की जांच कर सकता है और मिली हुई अनुमतियों के भीतर काम जारी रख सकता है।
इसी वजह से एजेंट chatbot से अलग है, भले ही दोनों के पीछे Large Language Model हो। chatbot ईमेल का मसौदा बना सकता है; एजेंट जानकारी खोजकर ईमेल तैयार कर सकता है, उसे भेज सकता है और किसी दूसरे सिस्टम में रिकॉर्ड अपडेट कर सकता है। coding assistant किसी bug को समझा सकता है; एजेंट codebase की जांच, files में बदलाव, tests चलाने और review के लिए change तैयार करने तक जा सकता है।
मौजूदा बाजार में Google Jules जैसे software-development agents, LinkedIn Hiring Assistant जैसे recruiting workflow tools और OpenClaw जैसे personal-agent frameworks के उदाहरण दिए जाते हैं। OpenClaw के project materials के अनुसार, यह एक personal, open-source assistant है जो उपयोगकर्ता के devices पर चलता है और channels तथा tools से जुड़ सकता है। इसकी वास्तविक क्षमता इस बात पर निर्भर करती है कि उपयोगकर्ता ने कौन-से integrations और permissions सक्षम किए हैं।
एजेंटिक सिस्टम:
इससे छोटे संगठनों और व्यक्तिगत उपयोगकर्ताओं के लिए जटिल workflows अधिक सुलभ हो सकते हैं। लेकिन इसके साथ मुख्य सवाल बदल जाता है। सवाल सिर्फ यह नहीं रह जाता कि “जवाब सही है या नहीं?”, बल्कि यह भी होता है कि “सिस्टम को क्या करने की अनुमति है और उसकी कार्रवाई की जांच कैसे होगी?”
जनरेटिव मॉडल किसी जवाब में गलती कर सकता है। एजेंट उसी गलत अनुमान, दुर्भावनापूर्ण निर्देश या compromised tool को बाहरी कार्रवाई में बदल सकता है।
उदाहरण के लिए, वित्तीय पहुंच वाला एजेंट अनधिकृत payment, purchase, transfer या cancellation कर सकता है। Email, browser या cloud access वाला एजेंट किसी malicious webpage या document से प्रभावित होकर credentials उजागर कर सकता है या confidential files भेज सकता है। जरूरत से ज्यादा permissions, कमजोर identity controls और duties का खराब विभाजन छोटी मॉडल-त्रुटि को गंभीर घटना में बदल सकते हैं।
जब किसी परिणाम में model, instructions, data, tools और दूसरे agents के बीच interactions शामिल हों, तो जवाबदेही तय करना भी कठिन हो जाता है। इसलिए operator को केवल अंतिम नतीजे पर नहीं, बल्कि प्रस्तावित कार्रवाई, उसके पीछे के evidence और इस्तेमाल की गई permissions पर भी नजर रखनी चाहिए।
तीनों चरणों में कुछ मूल सिद्धांत समान रहते हैं: जवाबदेह owner तय करना, सिस्टम का उद्देश्य सीमित रखना, डेटा की सुरक्षा, deployment से पहले testing, performance monitoring, incident response और महत्वपूर्ण फैसलों में सार्थक मानव समीक्षा या override की व्यवस्था।
एजेंटिक सिस्टम के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपायों में शामिल हैं:
सिंगापुर ने 22 जनवरी 2026 को Agentic AI के लिए Model AI Governance Framework लॉन्च किया। यह कोई अलग AI कानून नहीं, बल्कि संगठनों के लिए guidance है। इसमें human और organisational accountability को केंद्र में रखा गया है और एजेंट की autonomy तथा जोखिम के स्तर के अनुरूप controls अपनाने की सलाह दी गई है।
वित्तीय सेवाओं के लिए Monetary Authority of Singapore का SAFR paper runtime governance का एक तरीका बताता है। इसमें structured record के जरिए दर्ज किया जाता है कि एजेंट क्या करना चाहता है, क्यों करना चाहता है और प्रस्तावित कार्रवाई के समर्थन में कौन-सा evidence है।
AI का विकास “पुराने AI” से “नए AI” तक सीधी छलांग नहीं है। नियम-आधारित और प्रेडिक्टिव सिस्टम आज भी सीमित और स्पष्ट फैसलों के लिए बेहतर विकल्प हो सकते हैं। जनरेटिव AI ने लचीली सामग्री-निर्माण और प्राकृतिक भाषा में बातचीत को संभव बनाया। एजेंटिक AI ने टूल्स के जरिए लक्ष्य हासिल करने और बाहरी दुनिया में कार्रवाई करने की क्षमता जोड़ दी।
इस क्षमता के साथ governance की चुनौती भी बढ़ती है। भविष्यवाणी करने वाले सिस्टम में accuracy, bias और data drift पर ध्यान देना होता है। जनरेटिव AI में truthfulness, safety, privacy और provenance की जांच जरूरी है। और जब AI कार्रवाई कर सकता है, तो इन सभी उपायों के साथ permissions, approval gates, accountability और recovery plans भी अनिवार्य हो जाते हैं। भरोसेमंद AI उत्पाद इसलिए केवल शक्तिशाली मॉडल नहीं, बल्कि अनुशासित system design और प्रभावी मानवीय निगरानी पर भी निर्भर करेंगे।
Studio Global AI
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लगभग सात दशकों में AI नियमों और सीमित भविष्यवाणियों से आगे बढ़कर सामग्री बनाने और टूल्स के जरिए कार्रवाई करने वाली प्रणालियों तक पहुंच गया है।
लगभग सात दशकों में AI नियमों और सीमित भविष्यवाणियों से आगे बढ़कर सामग्री बनाने और टूल्स के जरिए कार्रवाई करने वाली प्रणालियों तक पहुंच गया है। पारंपरिक AI आज भी धोखाधड़ी पहचानने, क्रेडिट जोखिम आंकने, स्वास्थ्य जोखिमों का अनुमान लगाने, सिफारिशें देने और वॉइस कमांड समझने जैसे सीमित कार्यों में उपयोगी है।
जनरेटिव AI सिस्टम क्या बना सकते हैं, इसका दायरा बढ़ाता है, जबकि एजेंटिक AI सिस्टम क्या कर सकते हैं, इसका दायरा बढ़ाता है—जिससे गलत जानकारी, गोपनीयता, हानिकारक सामग्री, अनधिकृत भुगतान और डेटा चोरी जैसे जोखिम भी बढ़ते हैं।