दोनों मिलकर ऐसा ढांचा बनाना चाहते हैं जिसमें ट्रेड‑फाइनेंस एसेट्स सीधे ब्लॉकचेन पर जारी, फंड और सेटल हो सकें।
साझेदारी का मुख्य विचार है सप्लाई‑चेन क्रेडिट एसेट्स का टोकनाइज़ेशन। इसमें व्यापारिक इनवॉइस या कंपनियों को मिलने वाली बकाया राशि को डिजिटल टोकन में बदला जाएगा।
इससे दो संभावित फायदे हो सकते हैं:
दूसरा महत्वपूर्ण घटक है ब्लॉकचेन पर सीधे सेटलमेंट। इसका मतलब है कि सीमा‑पार भुगतान कई मध्यस्थों से गुजरने के बजाय सीधे ब्लॉकचेन नेटवर्क पर पूरा किया जा सकता है।
लक्ष्य है कि वैश्विक B2B व्यापार में भुगतान तेज हो और सेटलमेंट की लागत कम हो।
दोनों कंपनियां एंटरप्राइज‑ग्रेड वर्चुअल कार्ड समाधान भी तलाश रही हैं, जो ब्लॉकचेन‑आधारित एसेट्स से जुड़े होंगे।
इससे कंपनियों को टोकनाइज़्ड वित्तीय साधनों से जुड़ी लिक्विडिटी को खर्च करने या उपयोग करने का नया तरीका मिल सकता है।
ब्लॉकचेन परियोजनाओं के सामने अक्सर सबसे बड़ी चुनौती नियामकीय अनुपालन होती है। इस पहल में KUN का लाइसेंस प्राप्त पेमेंट नेटवर्क अहम भूमिका निभाता है, जो विभिन्न उभरते बाजारों में पहले से संचालित है।
इससे ऑन‑चेन एसेट्स और वास्तविक दुनिया की पेमेंट प्रणालियों के बीच एक वैध और नियामकीय रूप से स्वीकार्य कनेक्शन बन सकता है।
यह सहयोग सिर्फ एक अलग परियोजना नहीं है। यह Pharos Network की व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसे कंपनी “RealFi” (Real‑World Finance) कहती है।
इस अवधारणा का लक्ष्य है कि ब्लॉकचेन को केवल क्रिप्टो ट्रेडिंग तक सीमित न रखकर वास्तविक वित्तीय गतिविधियों—जैसे क्रेडिट, सेटलमेंट और एसेट मार्केट—में इस्तेमाल किया जाए।
इसी दिशा में KUN को Pharos RealFi Alliance के तीसरे रणनीतिक समूह में शामिल किया गया है। यह इकोसिस्टम पहल विभिन्न एसेट जारीकर्ताओं, वित्तीय संस्थानों और तकनीकी प्लेटफॉर्म को एक साथ लाने के लिए बनाई गई है।
इसका उद्देश्य है कि वास्तविक दुनिया के एसेट्स से जुड़ी परियोजनाएं प्रयोगात्मक चरण से आगे बढ़कर बड़े पैमाने पर ब्लॉकचेन पर संचालित हो सकें।
Pharos Network हाल के समय में अपने बुनियादी ढांचे को तेजी से विस्तार दे रहा है। अप्रैल 2026 में कंपनी ने 44 मिलियन डॉलर की Series A फंडिंग जुटाने की घोषणा की, जिससे कुल जुटाई गई पूंजी लगभग 52 मिलियन डॉलर तक पहुंच गई।
इस निवेश का लक्ष्य ऑन‑चेन Real‑World Asset (RWA) इन्फ्रास्ट्रक्चर को विकसित करना और संस्थागत स्तर के वित्तीय उपयोग मामलों को नेटवर्क पर लाना है।
यदि यह मॉडल सफल होता है, तो सप्लाई‑चेन फाइनेंस में एक बड़ा बदलाव आ सकता है। आज जो इनवॉइस और रिसीवेबल्स कागजी दस्तावेज़ की तरह स्थिर रहते हैं, वे भविष्य में प्रोग्रामेबल डिजिटल एसेट्स बन सकते हैं।
Pharos और KUN का लक्ष्य है कि इन एसेट्स को ब्लॉकचेन पर जारी किया जाए, उन्हें फाइनेंस किया जाए और सीमा‑पार भुगतान के साथ सीधे सेटल किया जाए।
हालांकि इसका वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि वित्तीय संस्थान, नियामक और वैश्विक व्यापार कंपनियां इस मॉडल को कितनी तेजी से अपनाती हैं। फिर भी यह पहल एक बड़े रुझान को दर्शाती है—ब्लॉकचेन उद्योग अब धीरे‑धीरे वास्तविक दुनिया की वित्तीय अवसंरचना की ओर बढ़ रहा है, केवल क्रिप्टो‑नेटिव बाजारों तक सीमित नहीं रहना चाहता।
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