IMF चार परस्पर जुड़े बदलावों—जनसांख्यिकी, जलवायु जोखिम, भू अर्थिक विखंडन और AI—को अलग अलग झटकों के बजाय एक संयुक्त संरचनात्मक चुनौती मानता है। अप्रैल 2026 के IMF अनुमान में वैश्विक वृद्धि 2026 में 3.1% और 2027 में 3.2% रहने का अनुमान है, जो 2000–19 के 3.7% औसत से कम है। [5][13] नीतिगत प्राथमिकता केवल AI अपनाना नहीं,...
शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: How does the IMF assess the combined impact of demographic change, climate change, geoeconomic fragmentation, and AI on emerging and develop. Article summary: The IMF’s broad assessment is that demographic change, climate shocks, geoeconomic fragmentation, and AI will reshape growth over 2026–35, with the adverse forces likely to weigh more heavily on emerging and developing e. Topic tags: general, general web, education. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, charts with fake nu
IMF का संदेश सीधा है: AI विकास और उत्पादकता को सहारा दे सकता है, लेकिन वह जलवायु परिवर्तन, उम्रदराज़ होती आबादी और भू-अर्थिक विखंडन के संयुक्त दबाव का अपने-आप समाधान नहीं है। खासकर उन उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए यह चुनौती बड़ी है जिनके पास सीमित राजकोषीय गुंजाइश, महंगा कर्ज और जलवायु या संघर्ष संबंधी झटकों का अधिक जोखिम है। 11
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IMF के अप्रैल 2026 के संदर्भ अनुमान के अनुसार, वैश्विक वृद्धि 2026 में 3.1% और 2027 में 3.2% रह सकती है। यह 2000–19 के 3.7% औसत से कम है। फंड का कहना है कि वृद्धि में मंदी और महंगाई में बढ़ोतरी का असर उभरती तथा विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में अधिक स्पष्ट हो सकता है। 5
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मध्यम अवधि की तस्वीर भी कमजोर है। IMF के 2024 के विश्लेषण में समय पर नीतिगत कदम या नई प्रौद्योगिकियों से पर्याप्त बढ़त न मिलने की स्थिति में दशक के अंत तक वैश्विक वृद्धि 2.8% रहने का अनुमान था—महामारी-पूर्व औसत से एक प्रतिशत अंक कम। इसका एक बड़ा कारण श्रम-आपूर्ति पर जनसांख्यिकीय दबाव है: 2030 तक वैश्विक श्रम-आपूर्ति वृद्धि घटकर 0.3% रहने का अनुमान था, जो महामारी से पहले के दशक की औसत गति के एक-तिहाई से भी कम है। 4
IMF इन रुझानों को चार अलग घटनाओं की तरह नहीं देखता। जनसांख्यिकी, जलवायु परिवर्तन, भू-अर्थिक विखंडन और AI एक साथ वृद्धि, झटकों की प्रकृति व आवृत्ति, कर्ज की टिकाऊपन, राजकोषीय गुंजाइश और व्यापक आर्थिक नीति की प्रभावशीलता को बदल सकते हैं। 11
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यहीं सबसे बड़ा जोखिम है। जलवायु अनुकूलन पर खर्च की जरूरत ऊंचे सार्वजनिक कर्ज से टकरा सकती है। विखंडन से तकनीक का प्रसार और निवेश कठिन हो सकता है। जनसांख्यिकीय बदलाव श्रम बाजारों और पेंशन-स्वास्थ्य जैसे सार्वजनिक खर्च को बदल सकता है। AI का लाभ भी पहले उन देशों को अधिक मिल सकता है जिनके पास तकनीकी निवेश और वैश्विक टेक्नोलॉजी वैल्यू-चेन से मजबूत जुड़ाव पहले से है। IMF के 2026 अपडेटों में उत्तर अमेरिका और एशिया में तकनीक व AI संबंधी निवेश से अधिक समर्थन और वैश्विक टेक्नोलॉजी वैल्यू-चेन से जुड़े देशों में AI-आधारित मांग से लाभ का उल्लेख किया गया है। 6
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इसका अर्थ यह नहीं कि AI आर्थिक रूप से महत्वहीन है। इसका अर्थ केवल इतना है कि इसके लाभ अनिश्चित, असमान और पूरक क्षमताओं पर निर्भर हैं। उपलब्ध साक्ष्य 2026–35 के लिए उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में इन चारों कारकों का कोई सटीक, वार्षिक IMF-विभाजन उपलब्ध नहीं कराते। इसलिए यह मानना गलत होगा कि AI यांत्रिक रूप से बाकी सभी दबावों को निष्प्रभावी कर देगा।
143 अर्थव्यवस्थाओं पर 2026–35 के IMF विश्लेषण का वर्णन करने वाली एक रिपोर्ट के अनुसार, इन संरचनात्मक दबावों के संयुक्त प्रभाव से सरकारों को अगले दशक में हर वर्ष GDP के करीब 3–4% के बराबर अतिरिक्त खर्च की जरूरत पड़ सकती है। उसी रिपोर्ट के अनुसार उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में इन संयुक्त शक्तियों के कारण प्रति व्यक्ति GDP वृद्धि में सालाना करीब 0.7 प्रतिशत अंक की कमी हो सकती है। 17
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हालांकि, उपलब्ध सामग्री उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए ऐसा ही विशिष्ट वार्षिक अनुमान नहीं देती। न ही जलवायु, जनसांख्यिकी, विखंडन और AI के प्रभाव का विश्वसनीय, अलग-अलग देश-समूहों वाला विभाजन उपलब्ध है। ठोस निष्कर्ष यह है कि जिन देशों की शुरुआती कमजोरियां ज्यादा हैं, उनके लिए इस बोझ को संभालना अधिक कठिन होगा; हर विकासशील देश पर एक ही वृद्धि-हानि का अनुमान लागू नहीं किया जा सकता। 11
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मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका तथा उप-सहारा अफ्रीका के कई देशों में इन दबावों के एक साथ आने से गलती की गुंजाइश कम हो जाती है। IMF के 2026 परिदृश्य ने रेखांकित किया कि संघर्ष से जुड़े झटके कमजोर अर्थव्यवस्थाओं पर ज्यादा असर डालते हैं—विशेषकर उन वस्तु-आयातक उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं पर जिनमें पहले से कमजोरियां मौजूद हैं। 5
ऊंचे कर्ज और महंगी उधारी सरकारों को तत्काल स्थिरीकरण तथा दीर्घकालिक निवेश के बीच चुनाव करने पर मजबूर कर सकते हैं। साथ ही, कई देशों को जलवायु अनुकूलन, आधारभूत ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और डिजिटल क्षमता के लिए धन जुटाना है। संघर्ष से आर्थिक गतिविधि बाधित हो और सस्ती दीर्घकालिक वित्तीय सहायता कम मिले, तो यह चुनौती और बढ़ जाती है।
नतीजा एक कठिन संतुलन है: लचीले ढांचे और मानव पूंजी में कम निवेश भविष्य की वृद्धि कमजोर कर सकता है, जबकि सब कुछ अतिरिक्त कर्ज से वित्तपोषित करने पर कर्ज जोखिम बढ़ सकता है। IMF दीर्घकालिक लचीलेपन के लिए ठोस व्यापक-राजकोषीय योजना, खर्च की बेहतर दक्षता, घरेलू संसाधन जुटाने, आधिकारिक विकास सहायता और निजी क्षेत्र की भागीदारी पर जोर देता है। 30
IMF की सिफारिश कोई एकल AI नीति या केवल जलवायु नीति नहीं है। उसका जोर ऐसे समन्वित ढांचे पर है जो आर्थिक स्थिरता बनाए रखते हुए निवेश और अनुकूलन की क्षमता बढ़ाए। 11
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मूल्य स्थिरता, विश्वसनीय राजकोषीय योजनाएं और टिकाऊ कर्ज-स्थिति आधारभूत शर्तें हैं। जहां राजकोषीय समेकन जरूरी हो, वहां वह यथार्थवादी होना चाहिए और प्राथमिक सामाजिक खर्च व उच्च-गुणवत्ता वाले निवेश को बचाना चाहिए; अंधाधुंध कटौती इसका विकल्प नहीं है। 11
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पूंजी और श्रम को अधिक उत्पादक कंपनियों व क्षेत्रों तक पहुंचाने वाली संरचनात्मक बाधाएं हटाना मध्यम अवधि के प्रति व्यक्ति उत्पादन को बढ़ा सकता है। IMF ने ऐसी लगातार बनी रुकावटों को कमजोर वृद्धि का एक कारण बताया है। 31
इसीलिए AI के लिए सहायक परिस्थितियां अहम हैं—शिक्षा, डिजिटल कौशल, भरोसेमंद बुनियादी ढांचा, निवेश क्षमता और नई तकनीक अपनाने में सक्षम कंपनियां। AI उत्पादकता का साधन हो सकता है, लेकिन सबसे प्रभावी तब होगा जब वह व्यापक विकास रणनीति का हिस्सा बने। 9
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घरेलू कर-संग्रह बढ़ाना, कर-अनुपालन सुधारना और सार्वजनिक खर्च की दक्षता बढ़ाना, कर्ज पर पूरी निर्भरता के बिना लचीलेपन को वित्तपोषित करने के प्रमुख साधन हैं। IMF के अनुसार घरेलू संसाधन जुटाना, खर्च में सुधार, सार्वजनिक ऋण, विकास सहायता और निजी क्षेत्र की भागीदारी—सभी वित्तपोषण के मिश्रण का हिस्सा हो सकते हैं। 30
अनुकूलन केवल आपदा आने के बाद राहत देने तक सीमित नहीं है। IMF भौतिक, वित्तीय और आर्थिक लचीलापन बढ़ाने तथा जलवायु झटकों के सामाजिक-आर्थिक असर को कम करने वाली नीतियों पर बल देता है। 30
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पात्र सदस्य देशों के लिए IMF की रेज़िलिएंस एंड सस्टेनेबिलिटी फैसिलिटी (RSF) जलवायु परिवर्तन और महामारी तैयारी जैसी दीर्घकालिक संरचनात्मक चुनौतियों के लिए अपेक्षाकृत सस्ती, लंबी अवधि की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराती है, जो सुधारों से जुड़ी होती है। 28
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क्षेत्रीय एकीकरण बाजारों में विविधता, झटकों से निपटने की क्षमता और मध्यम अवधि की वृद्धि को समर्थन दे सकता है। IMF ने सार्वजनिक वित्त को सुधारने और संभावित वृद्धि बढ़ाने के साथ इसे लचीलेपन का महत्वपूर्ण साधन माना है। 35
AI उत्पादकता सुधार सकता है और नए विकास अवसर खोल सकता है, लेकिन IMF इसे जलवायु अनुकूलन, जनसांख्यिकीय समायोजन, खुले आर्थिक संबंधों या विश्वसनीय व्यापक आर्थिक नीति का विकल्प नहीं मानता। 2035 तक मुख्य सवाल यह होगा कि क्या देश AI के लाभ लेने के लिए जरूरी राजकोषीय क्षमता, कौशल, बुनियादी ढांचा और संस्थान बना पाते हैं, साथ ही जलवायु, जनसांख्यिकीय और भू-राजनीतिक झटकों को भी झेल पाते हैं। 11
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उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए—विशेषकर संघर्ष, कर्ज दबाव और ऊंची वित्तीय लागत झेल रहे देशों के लिए—यह एजेंडा तकनीक से उतना ही जुड़ा है जितना लचीलेपन और वित्तपोषण से। 5
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IMF चार परस्पर जुड़े बदलावों—जनसांख्यिकी, जलवायु जोखिम, भू अर्थिक विखंडन और AI—को अलग अलग झटकों के बजाय एक संयुक्त संरचनात्मक चुनौती मानता है।
IMF चार परस्पर जुड़े बदलावों—जनसांख्यिकी, जलवायु जोखिम, भू अर्थिक विखंडन और AI—को अलग अलग झटकों के बजाय एक संयुक्त संरचनात्मक चुनौती मानता है। अप्रैल 2026 के IMF अनुमान में वैश्विक वृद्धि 2026 में 3.1% और 2027 में 3.2% रहने का अनुमान है, जो 2000–19 के 3.7% औसत से कम है। [5][13]
नीतिगत प्राथमिकता केवल AI अपनाना नहीं, बल्कि राजकोषीय विश्वसनीयता, बेहतर सार्वजनिक निवेश, घरेलू राजस्व, कौशल, डिजिटल ढांचा और जलवायु लचीलापन साथ साथ मजबूत करना है। [11][30]