सिंगापुर की तैयारी का मूल विचार है: अगली महामारी आने का इंतज़ार किए बिना वैक्सीन बनाने का अभ्यास किया जाए। स्वास्थ्य मंत्री ओंग ये कुंग ने सितंबर 2026 में देश में mRNA तकनीक से फ्लू की वैक्सीन विकसित और उत्पादित करने की एक प्रस्तावित पायलट पहल की बात की। फ्लू की वैक्सीन का इस्तेमाल सामान्य समय में हो सकता है; साथ ही इस पर काम करने से ऐसी उत्पादन क्षमता विकसित हो सकती है जिसे किसी नए खतरे के अनुसार ढाला जा सके। यह अभी एक योजना है, ‘डिज़ीज़ एक्स’ की तैयार वैक्सीन नहीं। ‘डिज़ीज़ एक्स’ भविष्य में उभर सकने वाले, अभी अज्ञात रोगजनक से जुड़े खतरे के लिए इस्तेमाल होने वाला नाम है।
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फ्लू वैक्सीन से महामारी की तैयारी कैसे होगी?
पायलट का लाभ केवल अंतिम उत्पाद में नहीं, उसे विकसित और बनाने की प्रक्रिया में भी होगा। सिंगापुर को उम्मीद है कि हिलेमन लैबोरेटरीज़ इस पहल में सहयोग कर सकेगी। लेकिन प्रस्तावित पायलट को इस बात का प्रमाण नहीं मानना चाहिए कि देश किसी नई महामारी की mRNA वैक्सीन अभी बड़े पैमाने पर बना सकता है।
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इस तैयारी का एक और हिस्सा PrepVax है। सिंगापुर का यह कार्यक्रम सरकारी और निजी संस्थानों की वैक्सीन-विकास क्षमताओं को जोड़ने और उनके बीच सहयोग बनाए रखने के लिए है, ताकि प्रकोप के समय उन पर काम किया जा सके।
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हिलेमन का इबोला प्रोजेक्ट क्या दिखाता है?
हिलेमन का बुंडीबुग्यो इबोलावायरस वैक्सीन उम्मीदवार फ्लू वाले mRNA पायलट से अलग परियोजना है। महामारी तैयारी से जुड़े अंतरराष्ट्रीय संगठन CEPI के अधिकतम 85 लाख अमेरिकी डॉलर के समर्थन से सिंगापुर स्थित हिलेमन क्लिनिकल परीक्षणों के लिए इस प्रायोगिक वैक्सीन की खुराक विकसित और तैयार कर रही है। इसमें rVSV तकनीक इस्तेमाल होती है, जिसका उपयोग ज़ैरे इबोलावायरस की एक स्वीकृत वैक्सीन में भी हुआ है। इससे बुंडीबुग्यो उम्मीदवार को अपने-आप मंज़ूरी नहीं मिल जाती।
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अगर शुरुआती परीक्षण सफल होते हैं, तो साझेदार इसकी तकनीक बड़े पैमाने पर उत्पादन करने वाली कंपनी को सौंपने की योजना रखते हैं। यानी परीक्षण के लिए खुराक बनाना, परीक्षणों में सफलता पाना और फिर अधिक खुराक बनाना—तीन अलग चरण हैं।
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सिर्फ कारखाना तैयार होना क्यों काफ़ी नहीं?
किसी नए रोगजनक की जल्द पहचान और उसका डेटा तुरंत साझा होने पर ही शोधकर्ता प्रतिक्रिया शुरू कर पाएंगे। CEPI का 100 दिनों का लक्ष्य भविष्य के ‘डिज़ीज़ एक्स’ के खिलाफ इतनी अवधि में नई वैक्सीन विकसित करने की महत्वाकांक्षा है; यह 100 दिनों में मंज़ूरी या व्यापक उपलब्धता की गारंटी नहीं है।
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मूल्यांकन की प्रक्रिया में भी देरी हो सकती है। सिंगापुर ने वैश्विक आपातस्थिति में नई वैक्सीन के आकलन के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में अपने स्वास्थ्य विज्ञान प्राधिकरण की बड़ी भूमिका प्रस्तावित की है। मकसद नियामकों के बीच सहयोग बढ़ाना है, सुरक्षा और प्रभावशीलता की समीक्षा छोड़ना नहीं।
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इस तरह सिंगापुर की योजना दो स्तरों पर काम करती है: सामान्य समय में कौशल और साझेदारियां बनाए रखना, और संकट के समय देशों तथा संस्थानों के बीच डेटा, तकनीक और नियामकीय सहयोग को जोड़ना। इसके लिए आपसी भरोसा भी अहम है। हिलेमन का प्रायोगिक उम्मीदवार दिखाता है कि ये कड़ियां कैसे जुड़ सकती हैं—और यह भी कि वैक्सीन के इस्तेमाल योग्य होने से पहले कितने चरण बाकी रहते हैं।
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