होंडा, ताइसेई और ताइसेई रोटेक सड़क में लगाए जाने वाले उपकरणों से चलते EV को वायरलेस तरीके से बिजली देने की तकनीक पर काम कर रहे हैं। रिपोर्टों में इसकी क्षमता 150 kW तक बताई गई है। होंडा R&D वाहन के रिसीवर और पावर ट्रांसफर तकनीक पर, ताइसेई DC बिजली आपूर्ति पर और ताइसेई रोटेक सड़क में उपकरण लगाने के तरीकों पर काम कर र...
प्रकाशितकर्ताGPT-6 Luna से संपादितGPT Image 2 से चित्र बनाए गए
शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: How does Honda’s wireless charging system power EVs, including heavy trucks, while they drive; what roles do Honda, Taisei and Taisei Rotec. Article summary: Honda’s system puts transmitting units beneath the road and a receiving unit on the EV. As the vehicle passes over them, magnetic coupling transfers electricity without a cable; the design targets passenger vehicles and . Topic tags: general, general web. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, charts with fake numbers, click
सड़क पर चलते-चलते EV की बैटरी को बिजली मिले—होंडा की नई तकनीक का विचार यही है। सड़क की सतह के नीचे बिजली भेजने वाले उपकरण लगाए जाएंगे और वाहन में एक रिसीवर होगा। वाहन इनके ऊपर से गुजरने पर चुंबकीय युग्मन के जरिए बिजली बिना प्लग के ट्रांसफर होगी। यह प्रणाली यात्री कारों के साथ बड़े व्यावसायिक वाहनों, जैसे ट्रकों, के लिए भी विकसित की जा रही है। इसकी क्षमता 150 kW तक बताई गई है, लेकिन यह प्रकाशित तकनीकी क्षमता है—हाईवे पर साबित हो चुकी चार्जिंग गति नहीं। 3
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18
इस व्यवस्था में सड़क के भीतर ट्रांसमिटिंग उपकरण और वाहन में पावर रिसीवर होगा। वाहन जब इन उपकरणों के ऊपर से गुजरेगा, तो चुंबकीय युग्मन से बिजली वाहन तक पहुंचेगी। पारंपरिक चार्जर की तरह गाड़ी को रोककर केबल लगाने की जरूरत नहीं होगी; मकसद है कि वाहन चलते समय भी चार्ज हो सके। 2
3
तीनों साझेदारों की जिम्मेदारियां अलग-अलग हैं:
इस तकनीक को यात्री कारों से लेकर बड़े व्यावसायिक वाहनों तक के लिए तैयार किया जा रहा है। होंडा के अनुसार, सड़क की बनावट को भारी ट्रकों के भार के अनुरूप विकसित किया गया है; एक रिपोर्ट में ऐसे वाहनों का कुल वजन करीब 20 टन बताया गया है। 11
18
तीनों कंपनियों ने ताइसेई समूह की T-FIELD/SATTE सुविधा में बने प्रयोगात्मक रास्ते पर प्रणाली की जांच की है। होंडा के मुताबिक, वहां वायरलेस बिजली-हस्तांतरण प्रणाली, सड़क की परतों की संरचना और उपकरण लगाने तथा उन्हें बदलने की विधियों की तकनीकी पुष्टि हुई। 3
11
यह विकास का अहम पड़ाव है, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि प्रणाली व्यस्त सार्वजनिक हाईवे पर लंबे समय तक भरोसेमंद रहेगी। आगे वास्तविक वाहनों से टिकाऊपन की जांच, चलते समय बिजली-हस्तांतरण के परीक्षण और विद्युतचुंबकीय क्षेत्र के रिसाव को नियंत्रित करने के उपायों पर काम होना है। 11
होंडा की उपलब्ध प्रकाशित जानकारी में पूरी प्रणाली की मापी गई चार्जिंग-दक्षता का प्रतिशत नहीं दिया गया है। इसलिए अभी यह आकलन करना संभव नहीं कि सड़क से भेजी गई बिजली में से कितनी वास्तव में वाहन की बैटरी तक पहुंचेगी। 3
11
होंडा, ताइसेई और ताइसेई रोटेक, NEXCO East की टेटेयामा परियोजना में शामिल होने की योजना बना रहे हैं। यह परीक्षण चिबा प्रांत के टेटेयामा एक्सप्रेसवे पर होना है। जापान का 2027 वित्त वर्ष 1 अप्रैल 2027 से शुरू होता है; इसी वित्त वर्ष से परीक्षणों की योजना है। इनमें हाईवे जैसी परिस्थितियों में बिजली आपूर्ति के प्रदर्शन और टिकाऊपन को परखा जाएगा। यह प्रस्तावित परीक्षण की शुरुआत है, व्यावसायिक सेवा शुरू होने की तारीख नहीं। 3
8
16
अगर वाहन चलते समय चार्ज हो सके, तो कुछ यात्राओं में बीच रास्ते रुककर चार्ज करने की जरूरत घट सकती है। नियमित माल ढुलाई वाले मार्गों पर यह खास तौर पर उपयोगी हो सकता है। लेकिन असल फायदा इस पर निर्भर करेगा कि किसी मार्ग पर वाहन को कितनी बिजली मिलती है और रोजमर्रा के संचालन में सिस्टम कैसा प्रदर्शन करता है। 1
14
अभी उपलब्ध घोषणाओं में पूरे प्रोजेक्ट की स्थापना और संचालन लागत या निवेश-वापसी की अवधि का आंकड़ा नहीं है। सड़क में बदलाव, बिजली की आपूर्ति, रखरखाव और वाहनों में संगत रिसीवर लगाने का खर्च कितना होगा—और क्या कम चार्जिंग-स्टॉप से इसकी भरपाई हो पाएगी—यह खुला सवाल है।
चलते वाहन को वायरलेस बिजली देने का यह जापान का पहला प्रयोग नहीं है। एक अलग सार्वजनिक-सड़क परीक्षण में वास्तविक कार को करीब 10 kW बिजली ट्रांसफर की गई थी। उस अध्ययन के अनुसार, परीक्षण के दौरान कार जितनी ऊर्जा इस्तेमाल कर रही थी, उसका 63.3% वायरलेस प्रणाली से दिया गया। सड़क के नीचे दबे ट्रांसमिशन कॉइल के मानक 18 महीने के परीक्षण के बाद भी स्थिर रहे। 13
ये नतीजे एक अलग परियोजना के हैं, होंडा की प्रणाली के नहीं। टेटेयामा में प्रस्तावित परीक्षण हाईवे पर चलती EV को वायरलेस चार्ज करने की व्यवहार्यता को आगे परखेंगे; उपलब्ध जानकारी से यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि होंडा की तकनीक पहले के परीक्षणों से बेहतर साबित हो चुकी है। 13
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Studio Global AI
इस पृष्ठ में एक स्रोत-समर्थित उत्तर शामिल है जिसे आप Studio Global के अंदर जारी रख सकते हैं।
होंडा, ताइसेई और ताइसेई रोटेक सड़क में लगाए जाने वाले उपकरणों से चलते EV को वायरलेस तरीके से बिजली देने की तकनीक पर काम कर रहे हैं। रिपोर्टों में इसकी क्षमता 150 kW तक बताई गई है।
होंडा, ताइसेई और ताइसेई रोटेक सड़क में लगाए जाने वाले उपकरणों से चलते EV को वायरलेस तरीके से बिजली देने की तकनीक पर काम कर रहे हैं। रिपोर्टों में इसकी क्षमता 150 kW तक बताई गई है। होंडा R&D वाहन के रिसीवर और पावर ट्रांसफर तकनीक पर, ताइसेई DC बिजली आपूर्ति पर और ताइसेई रोटेक सड़क में उपकरण लगाने के तरीकों पर काम कर रही है।
होंडा की प्रणाली के लिए सार्वजनिक हाईवे पर टिकाऊपन या कुल चार्जिंग दक्षता अभी साबित नहीं हुई है। जापान के एक अलग परीक्षण में करीब 10 kW ट्रांसफर और 18 महीने बाद दबे कॉइल के मानकों में स्थिरता दर्ज की गई थी।
होंडा, ताइसेई और ताइसेई रोटेक सड़क में लगाए जाने वाले उपकरणों से चलते EV को वायरलेस तरीके से बिजली देने की तकनीक पर काम कर रहे हैं। रिपोर्टों में इसकी क्षमता 150 kW तक बताई गई है। होंडा R&D वाहन के रिसीवर और पावर ट्रांसफर तकनीक पर, ताइसेई DC बिजली आपूर्ति पर और ताइसेई रोटेक सड़क में उपकरण लगाने के तरीकों पर काम कर र...
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सड़क पर चलते-चलते EV की बैटरी को बिजली मिले—होंडा की नई तकनीक का विचार यही है। सड़क की सतह के नीचे बिजली भेजने वाले उपकरण लगाए जाएंगे और वाहन में एक रिसीवर होगा। वाहन इनके ऊपर से गुजरने पर चुंबकीय युग्मन के जरिए बिजली बिना प्लग के ट्रांसफर होगी। यह प्रणाली यात्री कारों के साथ बड़े व्यावसायिक वाहनों, जैसे ट्रकों, के लिए भी विकसित की जा रही है। इसकी क्षमता 150 kW तक बताई गई है, लेकिन यह प्रकाशित तकनीकी क्षमता है—हाईवे पर साबित हो चुकी चार्जिंग गति नहीं। 3
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इस व्यवस्था में सड़क के भीतर ट्रांसमिटिंग उपकरण और वाहन में पावर रिसीवर होगा। वाहन जब इन उपकरणों के ऊपर से गुजरेगा, तो चुंबकीय युग्मन से बिजली वाहन तक पहुंचेगी। पारंपरिक चार्जर की तरह गाड़ी को रोककर केबल लगाने की जरूरत नहीं होगी; मकसद है कि वाहन चलते समय भी चार्ज हो सके। 2
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तीनों साझेदारों की जिम्मेदारियां अलग-अलग हैं:
इस तकनीक को यात्री कारों से लेकर बड़े व्यावसायिक वाहनों तक के लिए तैयार किया जा रहा है। होंडा के अनुसार, सड़क की बनावट को भारी ट्रकों के भार के अनुरूप विकसित किया गया है; एक रिपोर्ट में ऐसे वाहनों का कुल वजन करीब 20 टन बताया गया है। 11
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तीनों कंपनियों ने ताइसेई समूह की T-FIELD/SATTE सुविधा में बने प्रयोगात्मक रास्ते पर प्रणाली की जांच की है। होंडा के मुताबिक, वहां वायरलेस बिजली-हस्तांतरण प्रणाली, सड़क की परतों की संरचना और उपकरण लगाने तथा उन्हें बदलने की विधियों की तकनीकी पुष्टि हुई। 3
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यह विकास का अहम पड़ाव है, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि प्रणाली व्यस्त सार्वजनिक हाईवे पर लंबे समय तक भरोसेमंद रहेगी। आगे वास्तविक वाहनों से टिकाऊपन की जांच, चलते समय बिजली-हस्तांतरण के परीक्षण और विद्युतचुंबकीय क्षेत्र के रिसाव को नियंत्रित करने के उपायों पर काम होना है। 11
होंडा की उपलब्ध प्रकाशित जानकारी में पूरी प्रणाली की मापी गई चार्जिंग-दक्षता का प्रतिशत नहीं दिया गया है। इसलिए अभी यह आकलन करना संभव नहीं कि सड़क से भेजी गई बिजली में से कितनी वास्तव में वाहन की बैटरी तक पहुंचेगी। 3
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होंडा, ताइसेई और ताइसेई रोटेक, NEXCO East की टेटेयामा परियोजना में शामिल होने की योजना बना रहे हैं। यह परीक्षण चिबा प्रांत के टेटेयामा एक्सप्रेसवे पर होना है। जापान का 2027 वित्त वर्ष 1 अप्रैल 2027 से शुरू होता है; इसी वित्त वर्ष से परीक्षणों की योजना है। इनमें हाईवे जैसी परिस्थितियों में बिजली आपूर्ति के प्रदर्शन और टिकाऊपन को परखा जाएगा। यह प्रस्तावित परीक्षण की शुरुआत है, व्यावसायिक सेवा शुरू होने की तारीख नहीं। 3
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अगर वाहन चलते समय चार्ज हो सके, तो कुछ यात्राओं में बीच रास्ते रुककर चार्ज करने की जरूरत घट सकती है। नियमित माल ढुलाई वाले मार्गों पर यह खास तौर पर उपयोगी हो सकता है। लेकिन असल फायदा इस पर निर्भर करेगा कि किसी मार्ग पर वाहन को कितनी बिजली मिलती है और रोजमर्रा के संचालन में सिस्टम कैसा प्रदर्शन करता है। 1
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अभी उपलब्ध घोषणाओं में पूरे प्रोजेक्ट की स्थापना और संचालन लागत या निवेश-वापसी की अवधि का आंकड़ा नहीं है। सड़क में बदलाव, बिजली की आपूर्ति, रखरखाव और वाहनों में संगत रिसीवर लगाने का खर्च कितना होगा—और क्या कम चार्जिंग-स्टॉप से इसकी भरपाई हो पाएगी—यह खुला सवाल है।
चलते वाहन को वायरलेस बिजली देने का यह जापान का पहला प्रयोग नहीं है। एक अलग सार्वजनिक-सड़क परीक्षण में वास्तविक कार को करीब 10 kW बिजली ट्रांसफर की गई थी। उस अध्ययन के अनुसार, परीक्षण के दौरान कार जितनी ऊर्जा इस्तेमाल कर रही थी, उसका 63.3% वायरलेस प्रणाली से दिया गया। सड़क के नीचे दबे ट्रांसमिशन कॉइल के मानक 18 महीने के परीक्षण के बाद भी स्थिर रहे। 13
ये नतीजे एक अलग परियोजना के हैं, होंडा की प्रणाली के नहीं। टेटेयामा में प्रस्तावित परीक्षण हाईवे पर चलती EV को वायरलेस चार्ज करने की व्यवहार्यता को आगे परखेंगे; उपलब्ध जानकारी से यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि होंडा की तकनीक पहले के परीक्षणों से बेहतर साबित हो चुकी है। 13
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Studio Global AI
इस पृष्ठ में एक स्रोत-समर्थित उत्तर शामिल है जिसे आप Studio Global के अंदर जारी रख सकते हैं।
होंडा, ताइसेई और ताइसेई रोटेक सड़क में लगाए जाने वाले उपकरणों से चलते EV को वायरलेस तरीके से बिजली देने की तकनीक पर काम कर रहे हैं। रिपोर्टों में इसकी क्षमता 150 kW तक बताई गई है।
होंडा, ताइसेई और ताइसेई रोटेक सड़क में लगाए जाने वाले उपकरणों से चलते EV को वायरलेस तरीके से बिजली देने की तकनीक पर काम कर रहे हैं। रिपोर्टों में इसकी क्षमता 150 kW तक बताई गई है। होंडा R&D वाहन के रिसीवर और पावर ट्रांसफर तकनीक पर, ताइसेई DC बिजली आपूर्ति पर और ताइसेई रोटेक सड़क में उपकरण लगाने के तरीकों पर काम कर रही है।
होंडा की प्रणाली के लिए सार्वजनिक हाईवे पर टिकाऊपन या कुल चार्जिंग दक्षता अभी साबित नहीं हुई है। जापान के एक अलग परीक्षण में करीब 10 kW ट्रांसफर और 18 महीने बाद दबे कॉइल के मानकों में स्थिरता दर्ज की गई थी।