इसका मतलब है कि अलग‑अलग वेबसाइटों के कई प्रोडक्ट एक ही जगह इकट्ठे हो सकते हैं। यूज़र बाद में उसी कार्ट में जाकर आइटम्स देख सकता है, कीमतों की तुलना कर सकता है और जब चाहे खरीदारी पूरी कर सकता है।
शुरुआती रोलआउट Search और Gemini से शुरू हो रहा है, जबकि बाद में YouTube और Gmail में भी यह सुविधा जोड़ी जाएगी।
जैसे ही आप किसी प्रोडक्ट को Universal Cart में जोड़ते हैं, Gemini AI बैकग्राउंड में काम करना शुरू कर देता है। यह कार्ट में मौजूद आइटम्स से जुड़ी बाज़ार जानकारी को लगातार ट्रैक करता रहता है।
AI इन चीज़ों पर नज़र रख सकता है:
इससे कार्ट सिर्फ़ एक सूची नहीं रह जाता, बल्कि एक तरह का स्मार्ट असिस्टेंट बन जाता है। अगर किसी प्रोडक्ट पर अचानक सेल लगती है या वह फिर से स्टॉक में आता है, तो सिस्टम यूज़र को बता सकता है कि खरीदने का सही समय कब है।
Google का कहना है कि यह कार्ट "इंटेलिजेंट" है—मतलब Gemini सिर्फ़ कीमत नहीं देखता, बल्कि कार्ट में मौजूद प्रोडक्ट्स के आपसी संबंध को भी समझ सकता है।
उदाहरण के तौर पर, अगर कोई व्यक्ति कस्टम पीसी बनाते समय अलग‑अलग पार्ट्स चुन रहा है, तो AI यह संकेत दे सकता है कि कौन‑से पार्ट्स एक‑दूसरे के साथ सही काम नहीं करेंगे और उनके विकल्प भी सुझा सकता है।
हालांकि Google ने अभी तक सार्वजनिक रूप से यह विस्तार से नहीं बताया है कि ये कम्पैटिबिलिटी चेक किस तकनीकी मॉडल या डेटा पर आधारित होंगे। इसलिए इसके सटीक तकनीकी तरीके पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं।
जब यूज़र खरीदारी पूरी करना चाहता है, तो Universal Cart को Google Pay या Google Wallet से जोड़ा गया है। इससे भुगतान की प्रक्रिया तेज़ और आसान हो सकती है।
इस व्यवस्था में कुछ चीज़ें एक साथ काम करती हैं:
Universal Cart के पीछे एक तकनीकी मानक भी है जिसे Universal Commerce Protocol (UCP) कहा जाता है। यह एक ओपन स्टैंडर्ड है जो व्यापारियों (merchants) को Google के AI सिस्टम से जोड़ने में मदद करता है।
सरल भाषा में कहें तो UCP एक साझा तकनीकी "भाषा" की तरह काम करता है। अगर कोई ऑनलाइन स्टोर इसे अपनाता है, तो Google के AI टूल्स जैसे Search या Gemini यह कर सकते हैं:
Google ने एक और सिस्टम पेश किया है जिसे Agent Payments Protocol (AP2) कहा जाता है। इसका काम AI‑आधारित खरीदारी के दौरान सुरक्षा और अनुमति (authorization) को संभालना है।
AP2 के तहत AI एजेंट—जैसे Gemini—यूज़र की ओर से खरीदारी पूरी कर सकता है, लेकिन केवल तभी जब यूज़र ने पहले से अनुमति दी हो। यह अनुमति क्रिप्टोग्राफ़िक रूप से साइन किए गए "mandates" के रूप में रिकॉर्ड होती है।
एक सामान्य प्रक्रिया इस तरह हो सकती है:
क्योंकि यह अनुमति क्रिप्टोग्राफ़िक रूप से साइन होती है, इसलिए हर लेन‑देन का एक सुरक्षित और जांच योग्य रिकॉर्ड बनता है। इससे यह स्पष्ट रहता है कि यूज़र ने क्या अनुमति दी थी और AI ने क्या कार्रवाई की।
AP2 में खर्च की सीमा या शर्तें भी तय की जा सकती हैं—जैसे अधिकतम कीमत या विशेष ब्रांड—ताकि AI एजेंट उसी दायरे में काम करे जो यूज़र ने निर्धारित किया है।
Universal Cart, UCP और AP2 मिलकर उस ढांचे का हिस्सा हैं जिसे Google "agentic commerce" कहता है। इसका मतलब है कि भविष्य में AI ऑनलाइन खरीदारी के बड़े हिस्से को खुद संभाल सकता है।
इस मॉडल में Google केवल सर्च इंजन नहीं रहता, बल्कि शॉपिंग प्रक्रिया के कई चरणों को नियंत्रित करने वाली एक केंद्रीय परत बन जाता है, जैसे:
यूज़र्स के लिए इसका वादा आसान और अधिक ऑटोमेटेड शॉपिंग अनुभव है। लेकिन ई‑कॉमर्स कंपनियों और रिटेलरों के लिए इसका मतलब यह भी हो सकता है कि भविष्य में ऑनलाइन खरीदारी का बड़ा हिस्सा सीधे वेबसाइटों के बजाय AI असिस्टेंट्स के जरिए हो।
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