गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि 2026 के अंत तक सोना लगभग $5,400 प्रति औंस तक पहुंच सकता है, जिसकी बड़ी वजह केंद्रीय बैंकों द्वारा हर महीने औसतन करीब 60 टन सोने की खरीद मानी जा रही है।[4][19] बैंक के मुताबिक वैश्विक नीतिगत जोखिम और आर्थिक अनिश्चितता से बचाव के लिए निजी निवेशक भी सोने में रणनीतिक निवेश बढ़ा रहे हैं, जि...

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: How does Goldman Sachs justify its bullish 2026 gold outlook—expecting central banks to buy 60 tons of gold per month, maintaining a $5,400. Article summary: Goldman Sachs’ bullish 2026 gold case rests mainly on sustained official-sector demand: it expects central banks to buy about 60 tons per month through 2026 and says that should help gold recover to its $5,400/oz year-en. Topic tags: general, general web. Reference image context from search candidates: Reference image 1: visual subject "**Goldman Sachs** has raised its end-2026 gold price forecast to $5,400 per ounce from $4,900, citing strengthening structural demand for the metal. The bank notes the emerging-mar" source context "Goldman Bumps Gold Target, Sees $5400 In 2026 - Finviz" Reference image 2: visual subject "# Goldman Sachs has blunt message on gold
गोल्डमैन सैक्स ने सोने को लेकर बेहद सकारात्मक (bullish) दृष्टिकोण दोहराया है। बैंक का अनुमान है कि 2026 के अंत तक सोने की कीमत लगभग $5,400 प्रति औंस तक पहुंच सकती है। इस अनुमान का आधार केवल अल्पकालिक बाजार रैली नहीं, बल्कि वैश्विक मांग में एक संरचनात्मक बदलाव है—खासकर केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने के भंडार की लगातार बढ़ती खरीद।
गोल्डमैन के विश्लेषकों के अनुसार, दुनिया भर के केंद्रीय बैंक 2026 तक औसतन हर महीने लगभग 60 टन सोना खरीद सकते हैं। इतनी बड़ी मांग कीमतों को सहारा दे सकती है, भले ही बाजार में अस्थिरता बनी रहे।
गोल्डमैन सैक्स का मानना है कि सोने की तेजी की कहानी का सबसे मजबूत आधार आधिकारिक संस्थानों—यानी केंद्रीय बैंकों—की मांग है। खासकर उभरती अर्थव्यवस्थाओं के कई देश अपने विदेशी मुद्रा भंडार को विविध बनाने के लिए सोना बढ़ा रहे हैं।
इसके पीछे कई कारण बताए जाते हैं:
गोल्डमैन के अनुमान के मुताबिक, 2026 की शुरुआत से पहले के 12 महीनों में केंद्रीय बैंकों की खरीद औसतन लगभग 50 टन प्रति माह रही है, जो आगे बढ़कर 60 टन मासिक तक पहुंच सकती है।
यदि यह प्रवृत्ति जारी रहती है, तो बैंक का मानना है कि इससे सोने की कीमतों के लिए एक मजबूत "प्राइस फ्लोर" बन सकता है।
सिर्फ केंद्रीय बैंक ही नहीं, बल्कि निजी निवेशक भी सोने की मांग बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। गोल्डमैन के अनुसार कई निवेशक सोने को दीर्घकालिक हेज (सुरक्षा कवच) की तरह देखते हैं—खासकर वैश्विक आर्थिक और नीतिगत जोखिमों के खिलाफ।
इस तरह का निवेश अल्पकालिक सट्टेबाजी से अलग होता है। जब निवेशक सोने को रणनीतिक सुरक्षा संपत्ति के रूप में रखते हैं, तो बाजार गिरने पर भी वे जल्दी बेचते नहीं। इससे कीमतों में गिरावट सीमित हो सकती है।
गोल्डमैन सैक्स यह भी मानता है कि सोने की कीमतें सीधे ऊपर नहीं जाएंगी। रास्ते में कई अल्पकालिक जोखिम आ सकते हैं:
इसलिए बैंक का अनुमान है कि सोने की कीमतें लगातार सीधी रेखा में नहीं बढ़ेंगी, बल्कि संरचनात्मक मांग अंततः चक्रीय दबावों से ज्यादा मजबूत साबित हो सकती है।
दिलचस्प बात यह है कि गोल्डमैन सैक्स का $5,400 का लक्ष्य वॉल स्ट्रीट के कुछ अन्य बड़े बैंकों की तुलना में थोड़ा कम आक्रामक माना जा रहा है।
हाल के अनुमानों में:
कुल मिलाकर प्रमुख वित्तीय संस्थानों के अनुमान $5,400 से $6,300 प्रति औंस के बीच हैं, जो यह संकेत देते हैं कि कई विश्लेषक मानते हैं कि सोने को ऊपर ले जाने वाली दीर्घकालिक ताकतें अभी भी बनी हुई हैं।
गोल्डमैन सैक्स का अनुमान अल्पकालिक बाजार रुझानों से ज्यादा संरचनात्मक मांग पर आधारित है। बैंक को उम्मीद है कि केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीद (लगभग 60 टन प्रति माह) और निवेशकों की हेजिंग मांग 2026 तक सोने की कीमतों को मजबूत सहारा दे सकती है।
हालांकि बॉन्ड बाजार, महंगाई और भू‑राजनीतिक घटनाओं से कीमतों में उतार‑चढ़ाव आ सकता है, लेकिन यदि केंद्रीय बैंक सोना जमा करना जारी रखते हैं तो बैंक के अनुसार कीमतें अंततः $5,400 प्रति औंस के लक्ष्य तक पहुंच सकती हैं।
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गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि 2026 के अंत तक सोना लगभग $5,400 प्रति औंस तक पहुंच सकता है, जिसकी बड़ी वजह केंद्रीय बैंकों द्वारा हर महीने औसतन करीब 60 टन सोने की खरीद मानी जा रही है।[4][19]
गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि 2026 के अंत तक सोना लगभग $5,400 प्रति औंस तक पहुंच सकता है, जिसकी बड़ी वजह केंद्रीय बैंकों द्वारा हर महीने औसतन करीब 60 टन सोने की खरीद मानी जा रही है।[4][19] बैंक के मुताबिक वैश्विक नीतिगत जोखिम और आर्थिक अनिश्चितता से बचाव के लिए निजी निवेशक भी सोने में रणनीतिक निवेश बढ़ा रहे हैं, जिससे दीर्घकालिक मांग मजबूत बनी रह सकती है।[4][6]
हालांकि बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और बाजार की अस्थिरता जैसी अल्पकालिक चुनौतियां मौजूद हैं, फिर भी वॉल स्ट्रीट के कई बड़े बैंक 2026 में सोने को $5,400 से $6,300 प्रति औंस के दायरे में देखते हैं।[1][33][36]