Citigroup के विश्लेषण के मुताबिक बिटकॉइन की कुल सप्लाई का एक बड़ा हिस्सा पहले से ऐसे पते से जुड़ा है जिनकी पब्लिक‑की ब्लॉकचेन पर दिखाई दे चुकी है।
इन कॉइन को इसलिए ज्यादा जोखिम में माना जाता है क्योंकि संभावित हमलावर को पब्लिक‑की जानने के लिए किसी नए ट्रांज़ैक्शन का इंतजार नहीं करना पड़ेगा—वह पहले से ही ऑन‑चेन उपलब्ध है।
ऐसे एक्सपोज़्ड कॉइन में शामिल हो सकते हैं:
इसके अलावा लंबे समय से निष्क्रिय पड़े कॉइन भी एक समस्या हैं। कुछ वॉलेट खो चुके हो सकते हैं, कुछ यूज़र सक्रिय नहीं होंगे, और कुछ शुरुआती निवेशक शायद कभी अपने कॉइन नए सुरक्षित एड्रेस में माइग्रेट न करें।
मान लें कि क्वांटम‑रेज़िस्टेंट क्रिप्टोग्राफी तैयार भी हो जाए—तब भी उसे बिटकॉइन में लागू करना आसान नहीं होगा।
बिटकॉइन का गवर्नेंस मॉडल बहुत सावधानी से बदलाव करता है। किसी भी बड़े प्रोटोकॉल अपग्रेड के लिए डेवलपर्स, माइनर्स, नोड ऑपरेटर्स, एक्सचेंज, कस्टोडियन और यूज़र्स के बीच व्यापक सहमति जरूरी होती है।
यही कारण है कि बड़े बदलाव धीरे‑धीरे होते हैं। Citigroup के विश्लेषकों का कहना है कि इसी वजह से बिटकॉइन में पोस्ट‑क्वांटम सुरक्षा अपनाने की प्रक्रिया Ethereum जैसे नेटवर्क की तुलना में धीमी हो सकती है, जहां बड़े अपग्रेड अपेक्षाकृत तेजी से लागू किए गए हैं।
अगर बिटकॉइन को क्वांटम‑सुरक्षित बनाना है, तो संभवतः इन कदमों की जरूरत होगी:
क्वांटम सुरक्षा चर्चा में एक महत्वपूर्ण अवधारणा है “Harvest Now, Decrypt Later”।
इसका मतलब है कि हमलावर आज ही एन्क्रिप्टेड डेटा या क्रिप्टोग्राफिक जानकारी इकट्ठा कर सकते हैं—even अगर वे अभी उसे तोड़ नहीं सकते। जब भविष्य में शक्तिशाली क्वांटम कंप्यूटर उपलब्ध होंगे, तो उसी डेटा को डिक्रिप्ट किया जा सकता है।
बिटकॉइन के संदर्भ में इसका अर्थ है कि संभावित हमलावर पहले से ही उन एड्रेस की सूची बना सकते हैं जिनकी पब्लिक‑की एक्सपोज़ है। जब क्वांटम तकनीक पर्याप्त शक्तिशाली होगी, तो वही कॉइन तुरंत निशाना बन सकते हैं।
बिटकॉइन डेवलपर समुदाय इस समस्या पर पहले से चर्चा कर रहा है। दो प्रमुख प्रस्ताव हैं BIP‑360 और BIP‑361, जिनका उद्देश्य नेटवर्क को क्वांटम‑रेज़िस्टेंट क्रिप्टोग्राफी में माइग्रेट करना है।
इनमें से BIP‑361 का एक विवादास्पद विचार यह है कि पुराने सिग्नेचर सिस्टम (जैसे ECDSA या Schnorr) को धीरे‑धीरे हटाया जाए। कुछ व्याख्याओं के अनुसार अगर कोई होल्डर तय समय तक अपने कॉइन नए सुरक्षित एड्रेस में माइग्रेट नहीं करता, तो वे कॉइन स्थायी रूप से अनस्पेंडेबल हो सकते हैं।
समर्थकों का तर्क है कि इससे क्वांटम हमलावरों द्वारा चोरी रोकी जा सकती है। लेकिन आलोचकों का कहना है कि यह बिटकॉइन के उस सिद्धांत के खिलाफ है जिसमें कहा जाता है कि जब तक किसी के पास प्राइवेट‑की है, वह अपने कॉइन खर्च कर सकता है।
इस बहस से जुड़े जोखिमों में शामिल हैं:
इसी कारण अभी तक किसी एक समाधान पर व्यापक सहमति नहीं बनी है।
फिलहाल ऐसा कोई क्वांटम कंप्यूटर मौजूद नहीं है जो बड़े पैमाने पर बिटकॉइन की चाबियां तोड़ सके। इसलिए यह खतरा अभी सैद्धांतिक है।
लेकिन यह मुद्दा एक बड़ी सच्चाई दिखाता है: क्रिप्टोग्राफिक माइग्रेशन बहुत धीमी प्रक्रिया होती है, खासकर उन नेटवर्क में जहां अरबों डॉलर की संपत्ति जुड़ी हो।
अगर क्वांटम तकनीक अपेक्षा से तेज़ी से आगे बढ़ती है, तो बिटकॉइन को दो मुश्किल परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है:
दोनों ही स्थिति में दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी के गवर्नेंस मॉडल और लचीलापन की बड़ी परीक्षा होगी।
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