CCM का मूल विचार है कि किसी संगठन के पूरे ऑपरेशनल सिस्टम का एक रियल‑टाइम डिजिटल ट्विन तैयार किया जाए।
Celonis Context Model:
Celonis के अनुसार यह मॉडल AI को यह समझने देता है कि प्रक्रियाएँ डिज़ाइन के अनुसार नहीं बल्कि वास्तविकता में कैसे चल रही हैं।
इसमें शामिल हो सकता है:
इस तरह AI को एक ऑपरेशनल “मैप” मिल जाता है, जिससे उसके सुझाव और ऑटोमेशन ज्यादा सटीक और explainable बन सकते हैं।
Celonis का अगला कदम है CCM को सिर्फ visibility से आगे बढ़ाकर decision intelligence तक ले जाना। यही काम Ikigai Labs की तकनीक करेगी।
Ikigai Labs की तकनीक MIT से जुड़ी रिसर्च पर आधारित है और इसमें Large Graphical Model (LGM) नाम का पेटेंटेड एप्रोच इस्तेमाल होता है। यह खास तौर पर उन डेटा प्रकारों के लिए बनाया गया है जो एंटरप्राइज में सबसे ज्यादा मिलते हैं—जैसे spreadsheets, databases और time‑series डेटा।
इस तकनीक से Celonis प्लेटफ़ॉर्म में कई नई क्षमताएँ जुड़ती हैं:
इसका मतलब है कि सिस्टम सिर्फ यह नहीं बताएगा कि अभी क्या हो रहा है, बल्कि यह भी दिखा सकेगा कि अगर कोई निर्णय लिया जाए तो आगे क्या हो सकता है।
आज का अधिकांश एंटरप्राइज AI मुख्य रूप से विश्लेषण या ऑटोमेशन पर केंद्रित है। लेकिन जब उसमें simulation जुड़ जाती है तो कंपनियाँ निर्णय लेने का तरीका बदल सकती हैं।
CCM और Ikigai को साथ मिलाकर कंपनियाँ:
उदाहरण के लिए सप्लाई चेन या मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में इससे कंपनियाँ reactive ऑपरेशन्स से predictive और scenario‑driven फैसलों की ओर बढ़ सकती हैं।
Celonis का लक्ष्य सिर्फ AI टूल देना नहीं है, बल्कि ऐसा प्लेटफ़ॉर्म बनाना है जिसमें AI एजेंट वास्तविक बिज़नेस प्रक्रियाओं के अंदर सुरक्षित तरीके से काम कर सकें।
अगर AI को सही ऑपरेशनल कॉन्टेक्स्ट मिले, तो कंपनियाँ:
व्यवहार में CCM को उस साझा ऑपरेशनल मैप के रूप में देखा जा रहा है जिसे AI एजेंट्स विश्लेषण, सुझाव और ऑटोमेशन के दौरान इस्तेमाल करेंगे।
इतिहास में Celonis मुख्य रूप से process mining और process intelligence के लिए जाना जाता था। लेकिन Context Model और Ikigai Labs का अधिग्रहण दिखाता है कि कंपनी अब खुद को एंटरप्राइज AI के लिए एक बुनियादी प्लेटफ़ॉर्म के रूप में स्थापित करना चाहती है।
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