SSP5‑8.5 सीनारियो क्यों हटाया गया और CMIP7 मॉडल 2100 तक वैश्विक तापमान के बारे में क्या बताते हैं
CMIP7 जलवायु मॉडलिंग फ्रेमवर्क में अत्यधिक उत्सर्जन वाला SSP5‑8.5 सीनारियो अब ‘असंभावित’ माना गया है और इसे मुख्य मॉडलिंग सेट से हटा दिया गया है। नए मॉडल ऐसे रास्तों पर अधिक ध्यान देते हैं जिनमें तापमान पहले 1.5°C से ऊपर जा सकता है और बाद में उत्सर्जन कटौती व कार्बन हटाने से कम किया जा सकता है। मौजूदा नीतियों के आधा...
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CMIP7 जलवायु मॉडलिंग फ्रेमवर्क में अत्यधिक उत्सर्जन वाला SSP5‑8.5 सीनारियो अब ‘असंभावित’ माना गया है और इसे मुख्य मॉडलिंग सेट से हटा दिया गया है।
नए मॉडल ऐसे रास्तों पर अधिक ध्यान देते हैं जिनमें तापमान पहले 1.5°C से ऊपर जा सकता है और बाद में उत्सर्जन कटौती व कार्बन हटाने से कम किया जा सकता है।
मौजूदा नीतियों के आधार पर इस सदी के अंत तक वैश्विक तापमान लगभग 2.2°C–3.5°C तक बढ़ सकता है, जबकि तेज़ स्वच्छ‑ऊर्जा विस्तार इसे काफी कम कर सकता है।
How do the new climate scenarios published in April for CMIP7 and the upcoming IPCC Seventh Assessment Report change projections for globalNew CMIP7 climate scenarios narrow projections to more plausible futures while still indicating substantial warming risks by 2100.
AI संकेत
Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: How do the new climate scenarios published in April for CMIP7 and the upcoming IPCC Seventh Assessment Report change projections for global. Article summary: The new CMIP7/IPCC AR7 scenario design does not make 2100 warming look “safe”; it narrows the scenario set around more plausible futures, drops the old extreme SSP5-8.5 framing, and makes clear that 1.5°C can no longer b. Topic tags: general, general web, user generated, government. Reference image context from search candidates: Reference image 1: visual subject "The proposal covers a set of scenarios exploring high levels of climate change (to explore high-end climate risks), medium levels of climate" source context "GMD - The Scenario Model Intercomparison Project for CMIP7 (ScenarioMIP-CMIP7)" Reference image 2: visual subject "The image contains two graphs
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वैश्विक जलवायु विज्ञान में एक महत्वपूर्ण बदलाव हो रहा है। वैज्ञानिक अब CMIP7 (Coupled Model Intercomparison Project Phase 7) नामक नई पीढ़ी के जलवायु मॉडल तैयार कर रहे हैं, जिनका उपयोग भविष्य में IPCC की सातवीं आकलन रिपोर्ट (AR7) में किया जाएगा।
इस नई मॉडलिंग प्रणाली में भविष्य के उत्सर्जन परिदृश्यों को अपडेट किया गया है। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि लंबे समय से चर्चा में रहने वाला SSP5‑8.5 “वर्स्ट‑केस” सीनारियो अब मुख्य मॉडलिंग ढांचे से हटा दिया गया है और ध्यान उन रास्तों पर दिया जा रहा है जिन्हें वैज्ञानिक आज की दुनिया में अधिक संभव मानते हैं।
हालाँकि इसका मतलब यह नहीं है कि जलवायु जोखिम खत्म हो गए हैं। मौजूदा नीतियों के आधार पर दुनिया अब भी इस सदी के अंत तक लगभग 2°C से अधिक गर्म होने की राह पर है, और अनुमान लगभग के बीच हो सकता है।
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"SSP5‑8.5 सीनारियो क्यों हटाया गया और CMIP7 मॉडल 2100 तक वैश्विक तापमान के बारे में क्या बताते हैं" का संक्षिप्त उत्तर क्या है?
CMIP7 जलवायु मॉडलिंग फ्रेमवर्क में अत्यधिक उत्सर्जन वाला SSP5‑8.5 सीनारियो अब ‘असंभावित’ माना गया है और इसे मुख्य मॉडलिंग सेट से हटा दिया गया है।
सबसे पहले सत्यापित करने योग्य मुख्य बिंदु क्या हैं?
CMIP7 जलवायु मॉडलिंग फ्रेमवर्क में अत्यधिक उत्सर्जन वाला SSP5‑8.5 सीनारियो अब ‘असंभावित’ माना गया है और इसे मुख्य मॉडलिंग सेट से हटा दिया गया है। नए मॉडल ऐसे रास्तों पर अधिक ध्यान देते हैं जिनमें तापमान पहले 1.5°C से ऊपर जा सकता है और बाद में उत्सर्जन कटौती व कार्बन हटाने से कम किया जा सकता है।
मुझे अभ्यास में आगे क्या करना चाहिए?
मौजूदा नीतियों के आधार पर इस सदी के अंत तक वैश्विक तापमान लगभग 2.2°C–3.5°C तक बढ़ सकता है, जबकि तेज़ स्वच्छ‑ऊर्जा विस्तार इसे काफी कम कर सकता है।
जलवायु मॉडल चलाने के लिए वैज्ञानिक विभिन्न उत्सर्जन मार्ग (scenarios) बनाते हैं—जिनसे यह समझा जाता है कि अलग‑अलग नीतियों और तकनीकी बदलावों के तहत पृथ्वी का तापमान कैसे बदलेगा।
CMIP7 के नए फ्रेमवर्क में कुछ अहम बदलाव किए गए हैं:
1. अधिक यथार्थवादी भविष्य पर ध्यान
नए सीनारियो इस तरह बनाए गए हैं कि वे वर्तमान नीतियों और तकनीकी रुझानों के आधार पर संभावित भविष्य को दर्शाएँ, न कि केवल अत्यधिक या बहुत कम संभावनाओं वाले विकल्पों को।
2. उत्सर्जन‑आधारित मॉडलिंग
कई नए मॉडल सीधे ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन से शुरू होते हैं और फिर यह गणना करते हैं कि वे वातावरण में कितनी सांद्रता और तापमान परिवर्तन पैदा करेंगे। इससे कार्बन चक्र और पृथ्वी प्रणाली की अनिश्चितताओं को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है।
3. “पीक और गिरावट” वाले रास्तों पर ध्यान
कई सीनारियो ऐसे बनाए गए हैं जिनमें उत्सर्जन पहले बढ़ता है, फिर मध्य या बाद की सदी में घटता है। इससे वैज्ञानिक यह अध्ययन कर सकते हैं कि यदि तापमान किसी लक्ष्य से ऊपर चला जाए तो बाद में उसे कितना वापस लाया जा सकता है।
SSP5‑8.5 ‘वर्स्ट‑केस’ सीनारियो क्यों हटाया गया
पिछले दशक में जलवायु विज्ञान और मीडिया में सबसे अधिक चर्चा जिस सीनारियो की होती थी, वह था SSP5‑8.5। यह एक ऐसा भविष्य मानकर चलता था जिसमें दुनिया में जीवाश्म ईंधन का उपयोग तेज़ी से बढ़ता रहता है और 2100 तक बहुत अधिक रेडिएटिव फोर्सिंग (8.5 W/m²) हो जाती है।
लेकिन CMIP7 डिजाइन प्रक्रिया के दौरान वैज्ञानिकों ने निष्कर्ष निकाला कि यह स्तर अब “असंभावित” माना जा सकता है।
इसके पीछे कई कारण हैं:
वास्तविक दुनिया में उत्सर्जन वृद्धि पहले की तुलना में धीमी पड़ रही है।
सौर और पवन जैसी स्वच्छ ऊर्जा का विस्तार तेज़ हुआ है।
ऊर्जा प्रणालियाँ पूरी तरह कोयला‑आधारित दिशा में लौटती हुई नहीं दिखतीं।
इसलिए नए फ्रेमवर्क में उच्च उत्सर्जन वाला सीनारियो अब भी मौजूद है, लेकिन उसका अनुमानित प्रभाव SSP5‑8.5 से कम माना जाता है।
1.5°C लक्ष्य बिना “ओवरशूट” के क्यों मुश्किल माना जा रहा है
पेरिस समझौते का लक्ष्य है कि वैश्विक तापमान वृद्धि को प्री‑इंडस्ट्रियल स्तर से 1.5°C के भीतर रखा जाए। लेकिन कई हालिया विश्लेषण बताते हैं कि वास्तविक नीतियों और उत्सर्जन रुझानों को देखते हुए यह लक्ष्य बिना अस्थायी रूप से सीमा पार किए हासिल करना कठिन हो गया है।
इसलिए CMIP7 सीनारियो में “ओवरशूट” मार्ग शामिल किए गए हैं। इनमें तापमान पहले 1.5°C से ऊपर जा सकता है और बाद में गहरे उत्सर्जन कटौती तथा कार्बन डाइऑक्साइड हटाने (CDR) तकनीकों के जरिए कम किया जा सकता है।
IPCC के विश्लेषण के अनुसार, यदि केवल मौजूदा नीतियों को जारी रखा जाए तो इस सदी के अंत तक औसत तापमान वृद्धि लगभग 2.2°C से 3.5°C तक पहुँच सकती है।
मौजूदा नीतियाँ 2100 तक कितना तापमान बढ़ने का संकेत देती हैं
स्वतंत्र शोध समूह Climate Action Tracker के विश्लेषण के अनुसार, दुनिया की वर्तमान नीतियाँ लगभग 2.6°C से 2.8°C तक वैश्विक तापमान वृद्धि की ओर इशारा करती हैं।
यह अनुमान IPCC के व्यापक रेंज 2.2°C–3.5°C के भीतर ही आता है।
इसका अर्थ है कि पेरिस समझौते के लक्ष्यों और वर्तमान नीति‑पथ के बीच अभी भी बड़ा अंतर बना हुआ है।
स्वच्छ ऊर्जा प्रगति कितनी फर्क डाल सकती है
हालाँकि भविष्य पूरी तरह तय नहीं है। ऊर्जा प्रणाली में तेज़ बदलाव तापमान वृद्धि को काफी कम कर सकते हैं।
Climate Action Tracker के अनुसार तीन बड़े कदम इस सदी के अनुमानित तापमान को लगभग 0.9°C तक कम कर सकते हैं:
वैश्विक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को तीन गुना करना
ऊर्जा दक्षता सुधार की दर को दोगुना करना
मीथेन उत्सर्जन में तेज़ कटौती
इन उपायों से तापमान वृद्धि का अनुमान लगभग 2.6°C से घटकर लगभग 1.7°C तक आ सकता है।
बड़ी तस्वीर
CMIP7 का नया ढांचा यह नहीं कहता कि जलवायु संकट खत्म हो गया है। बल्कि इसका मतलब यह है कि वैज्ञानिक अब अत्यधिक काल्पनिक सीनारियो के बजाय अधिक यथार्थवादी और नीति‑संबंधी भविष्य का अध्ययन करना चाहते हैं।
आज की स्थिति को संक्षेप में समझें तो:
अत्यधिक जीवाश्म‑ईंधन विस्तार वाला SSP5‑8.5 अब कम संभावित माना जाता है
वर्तमान नीतियाँ अभी भी लगभग 2°C से अधिक गर्म दुनिया की ओर संकेत देती हैं
1.5°C लक्ष्य संभवतः ओवरशूट और बाद की कार्बन हटाने तकनीकों के बिना हासिल करना मुश्किल है
स्वच्छ ऊर्जा और मीथेन कटौती भविष्य के तापमान को काफी कम कर सकती हैं
अगले दशक में नीति और तकनीक की दिशा तय करेगी कि दुनिया इस सदी के अंत तक किस तापमान स्तर तक पहुँचती है।
climateactiontracker.org
[PDF] Global Update - Little change in warming outlook for four years