एशिया की रिफाइनरियों के लिए सऊदी अरब से तेल मिलने की खबर राहत दे सकती है, लेकिन बिक्री और तेल की सुरक्षित डिलीवरी एक ही बात नहीं हैं। ब्लूमबर्ग ने 24 सितंबर को बताया कि सऊदी अरब ने पिछले सप्ताह के मध्य से एशियाई खरीदारों को लगभग 10 करोड़ बैरल कच्चा तेल बेचा है। अक्टूबर और नवंबर की इस आपूर्ति के लिए जहाज़ों को होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरना होगा। खरीदारों में चीन, भारत, जापान और दक्षिण कोरिया की रिफाइनरियां शामिल हैं।
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पाइपलाइन पर हमले ने रास्ता क्यों बदला?
सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन देश के आर-पार तेल को लाल सागर के यानबू बंदरगाह तक पहुंचाती है। इस रास्ते से निर्यात करने पर जहाज़ों को होर्मुज़ से नहीं गुजरना पड़ता। 10 सितंबर के हमले के बाद पाइपलाइन बंद हुई; उससे पहले इसमें रोज़ लगभग 40 से 50 लाख बैरल तेल बह रहा था। यह मुख्यतः तेल को निर्यात बंदरगाह तक पहुंचाने में आई बाधा है—इसे उतनी ही मात्रा में तेल उत्पादन घटने का प्रमाण नहीं मानना चाहिए।
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इस वैकल्पिक मार्ग के बाधित होने पर होर्मुज़ के रास्ते बिक्री सऊदी तेल को खरीदारों तक पहुंचाने का एक तरीका है। लेकिन इससे आपूर्ति ऐसे समुद्री रास्ते पर अधिक निर्भर हो जाती है, जहां संघर्ष से जुड़े जोखिम बने हुए हैं।
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पाइपलाइन चालू हुई है, पूरी तरह बहाल नहीं
रॉयटर्स के मुताबिक पाइपलाइन 22 सितंबर को फिर चालू हुई, लेकिन पूरी तरह बहाल होने में छह से आठ सप्ताह लग सकते हैं। ब्लूमबर्ग ने इससे पहले बताया था कि सऊदी अरामको क्षतिग्रस्त हिस्से के आसपास वैकल्पिक व्यवस्था बनाकर पहले आंशिक क्षमता लौटाने की कोशिश कर रही है। 26 सितंबर तक तेल का प्रवाह उल्लेखनीय स्तर पर लाने की बताई गई तारीख एक लक्ष्य थी, हमले से पहले वाली क्षमता लौट आने की पुष्टि नहीं।
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बहाली की उम्मीद से आपूर्ति घटने की कुछ आशंकाएं कम हुईं और तेल की कीमतों पर दबाव पड़ा। मगर कीमतों में टिकाऊ राहत की गारंटी इससे नहीं मिलती।
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एशिया को कितनी राहत मिल सकती है?
ब्लूमबर्ग के अनुसार, सौदों से एशिया में आसन्न आपूर्ति संकट टालने में मदद मिल सकती है। रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि अरामको ग्राहकों तक तेल पहुंचाने की व्यवस्था करने की पेशकश कर रही है। इससे उन खरीदारों को मदद मिल सकती है जो खुद खाड़ी में जहाज़ भेजने से हिचक रहे हों। हालांकि परिवहन की व्यवस्था कर देना देरी या असुरक्षित समुद्री मार्ग का जोखिम खत्म नहीं करता।
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करीब 10 करोड़ बैरल कुल बेची गई मात्रा है, रोज़ की अतिरिक्त आपूर्ति नहीं। अगर इतनी मात्रा अक्टूबर और नवंबर में बराबर बांटी जाए, तो औसत लगभग 16.4 लाख बैरल प्रतिदिन होगा। बिक्री के आंकड़े से अकेले यह भी स्पष्ट नहीं होता कि पहले से अपेक्षित निर्यात के मुकाबले कितना तेल अतिरिक्त है।
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इसलिए आगे देखने की बात सिर्फ नए सौदे नहीं, बल्कि कितने बैरल जहाज़ों पर लदे और कितने सुरक्षित पहुंचे, यह है। एशिया को स्थायी राहत ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन में भरोसेमंद प्रवाह और होर्मुज़ से जहाज़ों की सफल आवाजाही—दोनों पर निर्भर करेगी।
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