गोल्डमैन सैक्स के अनुमान में पहली नजर में विरोधाभास दिखता है। बैंक ने दिसंबर 2026 के लिए ब्रेंट कच्चे तेल का अनुमान 5 डॉलर बढ़ाकर 85 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी मानक डब्ल्यूटीआई का अनुमान 80 डॉलर किया है। वजह है मध्य पूर्व में तेल की ढुलाई बाधित रहने की आशंका। लेकिन बढ़ाया हुआ 85 डॉलर का अनुमान भी 14 सितंबर को रॉयटर्स द्वारा दर्ज ब्रेंट के 107.81 डॉलर के भाव से कम है।
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अनुमान बढ़ने का मतलब कीमत बढ़ना क्यों नहीं?
बैंक ने अपना पुराना दिसंबर अनुमान बढ़ाया है, सितंबर के बाजार भाव का अनुमान नहीं। अगर जहाजों की आवाजाही में दिक्कत पहले की अपेक्षा अधिक समय तक बनी रहती है, तो साल के अंत का अनुमान ऊपर जा सकता है। साथ ही, अगर आगे संकट बढ़ने का डर कुछ कम हो और खरीदारों तक अधिक तेल पहुँचने लगे, तो सितंबर की ऊँची कीमत से गिरावट भी संभव है। अमेरिका की ऊर्जा सूचना एजेंसी को होर्मुज जलडमरूमध्य और वैकल्पिक रास्तों से तेल का प्रवाह धीरे-धीरे बढ़ने की उम्मीद है, हालांकि वह साल के अंत तक निर्यात पर कुछ पाबंदियाँ बनी रहने का अनुमान भी लगाती है।
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माँग भी कीमत को सहारा देने के बजाय नीचे खींच सकती है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) का सितंबर अनुमान है कि 2026 में वैश्विक तेल खपत प्रतिदिन 25 लाख बैरल घटेगी। इसका अर्थ यह नहीं कि तेल की उपलब्धता पर्याप्त होगी: एजेंसी ने आपूर्ति में इससे भी बड़ी, प्रतिदिन 57 लाख बैरल की गिरावट का अनुमान दिया है। यानी माँग और आपूर्ति दोनों एक साथ घट सकती हैं।
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85 डॉलर वाले अनुमान के लिए सबसे बड़ा जोखिम
अहम सवाल है: खाड़ी क्षेत्र से रुका हुआ तेल वास्तव में कितनी जल्दी लौटेगा? आईईए के सितंबर निष्कर्षों के सार के अनुसार, अगस्त में होर्मुज से तेल का प्रवाह औसतन प्रतिदिन 76 लाख बैरल रहा—युद्ध से पहले के स्तर से 1.31 करोड़ बैरल कम।
38 14 सितंबर की एक रिपोर्ट में कहा गया कि होर्मुज से बचकर तेल ले जाने वाली सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन ड्रोन हमलों के बाद बंद थी। यह घटना गोल्डमैन के सितंबर की शुरुआत में किए गए संशोधन के बाद की है। इसलिए इसे मूल अनुमान की वजह नहीं, बल्कि उसके सामने आया नया जोखिम समझना चाहिए; उपलब्ध रिपोर्ट से यह स्पष्ट नहीं होता कि पाइपलाइन कितने समय तक बंद रही।
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गोल्डमैन की 120 डॉलर से ऊपर वाली संभावना उसका मुख्य अनुमान नहीं है। बैंक के परिदृश्यों पर प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, अगर 2027 में खाड़ी क्षेत्र का औसत तेल उत्पादन युद्ध-पूर्व स्तर से प्रतिदिन 40 लाख बैरल कम रहे, तो ब्रेंट 120 डॉलर पार कर सकता है। उसके आधार परिदृश्य में यह कमी 5 लाख बैरल प्रतिदिन मानी गई है। रॉयटर्स ने जहाजों पर हमले बढ़ने की स्थिति में तेल के 120 डॉलर तक पहुँचने की अलग चेतावनी भी दी थी।
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कच्चा तेल सस्ता हो, तब भी एशिया को तुरंत राहत क्यों नहीं?
ऊर्जा की लागत सिर्फ ब्रेंट से तय नहीं होती। गोल्डमैन से जुड़ी रिपोर्टिंग के अनुसार, एलएनजी यानी तरलीकृत प्राकृतिक गैस और डीजल के दाम 2026 के नए उच्च स्तर पर पहुँचे थे; बढ़ी लागत सितंबर में एशिया-प्रशांत के कई देशों के आयात और उत्पादक मूल्यों में दिखने की उम्मीद थी। आईईए ने खाड़ी क्षेत्र से डीजल निर्यात पर गंभीर बाधाएँ भी दर्ज कीं। इसलिए कच्चे तेल का भाव घटने पर भी तैयार ईंधन महँगा रह सकता है।
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घरों तक महँगाई का असर पहुँचने में और समय लग सकता है। एशियाई विकास बैंक (एडीबी) के मुताबिक, ऊर्जा कीमतों को स्थिर रखने वाली व्यापक सब्सिडी ने उपभोक्ताओं पर ऊँची वैश्विक लागत का असर कुछ कम किया है, लेकिन इससे सरकारी खजाने पर बोझ पड़ता है। एडीबी का विकासशील एशिया और प्रशांत क्षेत्र के लिए महँगाई अनुमान 2026 में 4.2% और 2027 में 3.5% है, जबकि 2025 में यह 3.0% थी। ये क्षेत्रीय औसत हैं, हर देश की स्थिति नहीं: गोल्डमैन के 2027 के महँगाई अनुमान बाजार की सहमति से सबसे अधिक ऊपर भारत और मलेशिया में, और सबसे अधिक नीचे जापान, वियतनाम तथा फिलीपींस में हैं।
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निष्कर्ष यही है: कीमत घटने और स्थिति सामान्य होने में फर्क है। ब्रेंट सितंबर की ऊँचाई से नीचे आ सकता है, भले खाड़ी क्षेत्र का निर्यात पूरी तरह न संभले। इसी तरह एशिया में महँगाई की रफ्तार धीमी पड़ सकती है, जबकि ऊर्जा लागत पहले से ऊँची बनी रहे।
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