बताया जाता है कि इस हमले में कई मिड‑रेंज स्ट्राइक ड्रोन का इस्तेमाल हुआ। हमले के बाद ऑनलाइन सामने आए वीडियो में इमारतों में बड़ी आग और भारी नुकसान दिखाई दिया।
विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे प्रशिक्षण केंद्रों को निशाना बनाकर यूक्रेन सिर्फ तत्काल सैन्य क्षमता नहीं, बल्कि रूस की भविष्य की ड्रोन क्षमता को भी कम करने की कोशिश कर रहा है।
एक अलग ऑपरेशन में यूक्रेनी ड्रोन ने कब्ज़े वाले खेरसॉन क्षेत्र में हेनिचेस्का हिरका (Henicheska Hirka) गांव में स्थित रूसी FSB मुख्यालय को निशाना बनाया। यह ऑपरेशन SBU की विशेष इकाई स्पेशल ऑपरेशंस सेंटर “A” (अल्फ़ा) ने अंजाम दिया।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की के अनुसार इस हमले में लगभग 100 रूसी सैनिक मारे गए या घायल हुए। साथ ही वहां तैनात Pantsir‑S1 सतह‑से‑हवा मिसाइल प्रणाली भी नष्ट हो गई।
Pantsir‑S1 रूस का एक मोबाइल एयर‑डिफेंस प्लेटफॉर्म है जिसे विमान, मिसाइल और ड्रोन को मार गिराने के लिए बनाया गया है। आम तौर पर इसे कमांड सेंटर या सैन्य ठिकानों की सुरक्षा के लिए लगाया जाता है। इस सिस्टम के नष्ट होने से उस इलाके की स्थानीय वायु‑रक्षा क्षमता कमजोर पड़ सकती है।
रिपोर्टों के अनुसार यह हमला एक समन्वित ड्रोन ऑपरेशन के रूप में किया गया था, जिससे यह संकेत मिलता है कि यूक्रेन अब अच्छी तरह सुरक्षित क्षेत्रों में भी घुसकर हमला करने की क्षमता बढ़ा रहा है।
इन दोनों हमलों से यूक्रेन की सैन्य रणनीति के कुछ महत्वपूर्ण रुझान सामने आते हैं।
यूक्रेन अब सिर्फ उड़ते हुए ड्रोन को मार गिराने या अग्रिम मोर्चे के लक्ष्य पर हमला करने तक सीमित नहीं है। इसके बजाय वह ड्रोन प्रशिक्षण स्कूल, उत्पादन कार्यशालाएँ और कमांड सेंटर जैसे ढांचे को निशाना बना रहा है।
इससे ड्रोन ऑपरेटरों की पूरी आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो सकती है।
स्निझने और हेनिचेस्क दोनों ही लक्ष्य फ्रंटलाइन से काफी पीछे स्थित थे। यह दिखाता है कि यूक्रेन के पास अब ऐसे ड्रोन हैं जो लंबी दूरी तक जाकर सटीक हमला कर सकते हैं।
इससे युद्ध का दायरा केवल अग्रिम मोर्चे तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पीछे के प्रशासनिक और लॉजिस्टिक केंद्र भी जोखिम में आ जाते हैं।
इन हमलों में यूक्रेन की Unmanned Systems Forces और SBU के बीच समन्वय दिखाई देता है।
इस तरह के लक्ष्य—जैसे प्रशिक्षण केंद्र या सुरक्षा एजेंसी का मुख्यालय—आमतौर पर लंबे समय तक की गई खुफिया निगरानी और लक्ष्य पहचान के बाद चुने जाते हैं।
खेरसॉन क्षेत्र के हमले में Pantsir‑S1 को नष्ट किया जाना एक और रणनीति की ओर इशारा करता है: कमांड ढांचे और उसे बचाने वाले एयर‑डिफेंस सिस्टम दोनों पर एक साथ हमला।
ऐसा करने से आगे के हमलों के लिए क्षेत्र अपेक्षाकृत खुला हो सकता है।
स्निझने और हेनिचेस्क की घटनाएँ व्यापक प्रवृत्ति का हिस्सा हैं। यूक्रेन और रूस दोनों अब निगरानी, लक्ष्य निर्धारण और हमले के लिए ड्रोन का बड़े पैमाने पर उपयोग कर रहे हैं।
हालाँकि हाल के महीनों में यूक्रेन ने खास तौर पर मिड‑ और लॉन्ग‑रेंज ड्रोन हमलों पर जोर दिया है, जिनका लक्ष्य अक्सर सैन्य ढांचा, कमांड नोड्स और लॉजिस्टिक केंद्र होते हैं।
अगर यह रुझान जारी रहता है, तो प्रशिक्षण केंद्रों, मुख्यालयों और एयर‑डिफेंस प्रणालियों पर ऐसे हमले आने वाले समय में इस युद्ध के हवाई आयाम को और भी निर्णायक रूप से बदल सकते हैं।
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