इंटरसेप्ट किए गए ड्रोन का मलबा कथित तौर पर रूस के सबसे बड़े हवाईअड्डे के पास गिरा, हालांकि अधिकारियों ने कहा कि उससे संरचनात्मक नुकसान नहीं हुआ।
भले ही बड़े पैमाने पर विनाश की पुष्टि नहीं हुई, लेकिन इस हमले ने कुछ रणनीतिक संदेश दिए:
कुछ दावे औद्योगिक ढांचे पर हमलों के भी सामने आए, लेकिन विश्वसनीय स्रोतों से उनकी पुष्टि सीमित है।
रूस का यह दावा कि 556 ड्रोन मार गिराए गए इस बात को दिखाता है कि हमले को रोकने के लिए कितनी बड़ी रक्षात्मक कार्रवाई करनी पड़ी।
इन आंकड़ों से रूस की बहु‑स्तरीय एयर‑डिफेंस प्रणाली की ताकत और सीमाएँ दोनों सामने आती हैं:
आधुनिक ड्रोन युद्ध में अक्सर ‘स्वॉर्म’ रणनीति अपनाई जाती है—यानी बहुत बड़ी संख्या में ड्रोन एक साथ भेजकर रडार, इंटरसेप्टर मिसाइलों और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों को दबाव में डालना।
मॉस्को ने जल्द ही जवाबी हमले शुरू किए। यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार रूस ने एक बड़े हमले में 500 से अधिक ड्रोन और 20 से ज्यादा बैलिस्टिक व क्रूज़ मिसाइलें दागीं।
इसी बढ़ते तनाव के दौरान यूक्रेन का कहना है कि रूस ने दो दिनों में 1,567 ड्रोन लॉन्च किए—जो युद्ध की शुरुआत के बाद सबसे बड़े हवाई हमलों में से एक था।
इन हमलों से नागरिकों को भारी नुकसान हुआ। एक बड़े ड्रोन‑और‑मिसाइल हमले में यूक्रेन में 24 लोगों की मौत की रिपोर्ट सामने आई।
ऐसे अभ्यासों में आम तौर पर कमांड‑एंड‑कंट्रोल सिस्टम की जाँच, रणनीतिक बलों की तैयारी का परीक्षण और नकली लॉन्च अभ्यास शामिल होते हैं। विशेषज्ञ आमतौर पर इन्हें रणनीतिक संदेश या दबाव बनाने की कोशिश मानते हैं, न कि तत्काल परमाणु इस्तेमाल की तैयारी।
बड़े पारंपरिक हमलों के साथ इन अभ्यासों को जोड़कर मॉस्को ने संकेत दिया कि वह युद्ध में दबाव बनाए रखते हुए प्रतिरोधक क्षमता का प्रदर्शन भी करना चाहता है।
मॉस्को पर हुआ हमला दिखाता है कि यह संघर्ष अब बड़े पैमाने के ड्रोन अभियानों के चक्र में बदलता जा रहा है।
यूक्रेन रूस के भीतर दूर तक ड्रोन भेजकर दबाव बना रहा है, जबकि रूस जवाब में और बड़े ड्रोन‑और‑मिसाइल हमले यूक्रेनी शहरों और बुनियादी ढांचे पर कर रहा है।
अब तक उपलब्ध सबूत बताते हैं कि इन हमलों का असर मिश्रित है—काफी व्यवधान और नागरिक हताहत, लेकिन मॉस्को के आसपास किसी बड़े रणनीतिक ढांचे के व्यापक विनाश की पुष्टि सीमित है।
फिर भी एक बात स्पष्ट है: ड्रोन युद्ध तेजी से तीव्र हो रहा है, और दोनों पक्ष बड़ी संख्या में हमले कर रहे हैं, जिससे आगे और सैन्य तनाव बढ़ने का खतरा बना हुआ है।
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