डार्क मैटर के संभावित कणों—खासकर WIMPs—की तलाश के लिए बनाए गए XENONnT ने अब सूर्य के भीतर चल रही परमाणु संलयन प्रक्रिया की भी झलक दिखाई है। इटली के Gran Sasso राष्ट्रीय प्रयोगशाला में किए गए नए मापन में सहयोग ने इलेक्ट्रॉनों से बिखरते कम ऊर्जा वाले सौर न्यूट्रिनो का पहली बार अवलोकन बताया है। इससे प्रत्यक्ष न्यूट्रिनो अवलोकन की ऊर्जा सीमा लगभग 17 keV तक पहुंच गई—यह अब तक बताई गई सबसे कम न्यूट्रिनो ऊर्जा सीमा है। संकेत में pp न्यूट्रिनो प्रमुख हैं।
22
न्यूट्रिनो का संकेत इतना मुश्किल क्यों है?
न्यूट्रिनो पदार्थ के साथ अत्यंत कम ही क्रिया करते हैं। जब कोई सौर न्यूट्रिनो डिटेक्टर के अंदर मौजूद तरल जेनॉन में किसी इलेक्ट्रॉन से लोचदार रूप से टकराता है, तो इलेक्ट्रॉन को बहुत थोड़ी ऊर्जा मिलती है। यह छोटी-सी ‘किक’ दो संकेत पैदा करती है:
- तरल जेनॉन से निकलने वाली तत्काल चमक,
- और मुक्त हुए इलेक्ट्रॉनों को गैसीय अवस्था में निकालने पर बनने वाली इलेक्ट्रोल्यूमिनेसेंस चमक।
इन दोनों संकेतों को साथ पढ़कर वैज्ञानिक किसी घटना की ऊर्जा और स्थान का पुनर्निर्माण कर सकते हैं। इसलिए उन्हें किसी एक न्यूट्रिनो की अलग से पहचान करने की जरूरत नहीं होती। वे अनेक इलेक्ट्रॉन-रिकॉयल घटनाओं के अपेक्षित सांख्यिकीय पैटर्न को रेडियोधर्मी और उपकरण-जनित पृष्ठभूमि से तुलना करते हैं।
यहां लगभग 17 keV का आंकड़ा उन न्यूट्रिनो ऊर्जाओं से जुड़ा है जिन्हें मापन में सुलभ बनाया गया, न कि ऐसी ऊर्जा से जो हर टक्कर में पूरी तरह इलेक्ट्रॉन को मिलती है। उपलब्ध घोषणा के अनुसार परिणाम कम ऊर्जा वाले सौर न्यूट्रिनो का पहला अवलोकन है और इसमें pp न्यूट्रिनो का योगदान प्रमुख है।
22
pp न्यूट्रिनो सूर्य के लिए क्यों अहम हैं?
pp न्यूट्रिनो सूर्य में प्रोटॉन-प्रोटॉन संलयन श्रृंखला की पहली प्रतिक्रिया में बनते हैं:
[
p+p\rightarrow d+e^++\nu_e
]
यही प्रक्रिया उस श्रृंखला की शुरुआत करती है जिसमें हाइड्रोजन धीरे-धीरे हीलियम में बदलता है। सूर्य की ऊर्जा का मुख्य स्रोत यही pp श्रृंखला है, इसलिए pp न्यूट्रिनो सूर्य के केंद्र में चल रही संलयन क्रियाओं के सीधे संदेशवाहक माने जाते हैं।
सूर्य के केंद्र से सतह तक ऊर्जा पहुंचने में प्रकाश को लंबा समय लगता है, जबकि न्यूट्रिनो लगभग तुरंत उस क्षेत्र से बाहर निकल जाते हैं जहां वे पैदा होते हैं। इसलिए pp न्यूट्रिनो को मापना सूर्य के ऊर्जा-उत्पादन तंत्र की अधिक प्रत्यक्ष जांच का अवसर देता है।
5.9 टन जेनॉन ने यह संकेत कैसे पकड़ा?
XENONnT के केंद्र में दो-चरणीय टाइम-प्रोजेक्शन चैंबर है, जिसमें 5.9 टन सक्रिय तरल जेनॉन लक्ष्य के रूप में मौजूद है। बड़ी मात्रा में जेनॉन होने से दुर्लभ टक्करों की संभावना बढ़ती है। साथ ही, चमक और आयनीकरण के दो संकेत घटनाओं की ऊर्जा तथा त्रि-आयामी स्थिति निर्धारित करने में मदद करते हैं।
5
लेकिन चुनौती केवल न्यूट्रिनो की दुर्लभता नहीं थी। डिटेक्टर की पृष्ठभूमि भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। रैडॉन और उसके क्षय-उत्पाद बीटा क्षय पैदा कर सकते हैं, जिनके संकेत कम ऊर्जा वाले न्यूट्रिनो-इलेक्ट्रॉन बिखराव जैसे दिखते हैं।
इस समस्या से निपटने के लिए XENON सहयोग ने ऑनलाइन क्रायोजेनिक डिस्टिलेशन प्रणाली विकसित की। यह प्रणाली डिटेक्टर में मौजूद जेनॉन से रैडॉन को लगातार हटाती है। सक्रिय लक्ष्य में (^{222}\mathrm{Rn}) की गतिविधि लगभग (0.90\ \mu\mathrm{Bq/kg}) तक घटाई गई—ऐसा स्तर जहां रैडॉन की पृष्ठभूमि सौर न्यूट्रिनो से आने वाली अपरिहार्य पृष्ठभूमि के बराबर हो जाती है।
18
19
Gran Sasso पर्वत के नीचे लगभग 1,400 मीटर की गहराई में प्रयोगशाला स्थित होने से कॉस्मिक किरणों से पैदा होने वाली घटनाएं भी काफी कम होती हैं। इस तरह शोधकर्ता बहुत कमजोर संकेत को बड़े शोर में खोने देने के बजाय पूरे ऊर्जा-स्पेक्ट्रम का सांख्यिकीय विश्लेषण कर सके।
2024 के 8B न्यूट्रिनो परिणाम से क्या अलग है?
नया मापन 2024 के XENONnT परिणाम का विस्तार है, लेकिन दोनों में न्यूट्रिनो पकड़ने का तरीका अलग है। 2024 में सहयोग ने 8B सौर न्यूट्रिनो को सुसंगत लोचदार न्यूट्रिनो-नाभिक बिखराव यानी CEνNS के जरिए खोजा था। इसमें न्यूट्रिनो जेनॉन के पूरे नाभिक को हल्की-सी रिकॉयल देता है। उस विश्लेषण में पृष्ठभूमि-भर की परिकल्पना के विरुद्ध 2.73σ का संकेत मिला था—यह 5σ वाली खोज नहीं थी।
2
3
नया परिणाम इसके बजाय न्यूट्रिनो-इलेक्ट्रॉन बिखराव पर आधारित है। दोनों चैनल मिलकर सूर्य से आने वाले अलग-अलग संकेतों को सामने लाते हैं:
- इलेक्ट्रॉनिक रिकॉयल: इलेक्ट्रॉन से बिखराव, जिसमें कम ऊर्जा वाले pp न्यूट्रिनो प्रमुख होते हैं।
- नाभिकीय रिकॉयल: CEνNS के दौरान जेनॉन नाभिक को मिली ऊर्जा, जैसा 8B न्यूट्रिनो विश्लेषण में देखा गया।
यह अंतर महत्वपूर्ण है, क्योंकि दोनों चैनल सौर न्यूट्रिनो के ऊर्जा-स्पेक्ट्रम और सूर्य की आंतरिक भौतिकी के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंच देते हैं।
‘न्यूट्रिनो फॉग’ डार्क मैटर के लिए चेतावनी क्यों है?
डार्क मैटर प्रयोगों के लिए सौर न्यूट्रिनो एक दिलचस्प संकेत भी हैं और एक कठिन पृष्ठभूमि भी। उनके कारण होने वाली रिकॉयल घटनाएं WIMP से अपेक्षित घटनाओं जैसी दिख सकती हैं। उन्हें सामान्य परिरक्षण से हटाया नहीं जा सकता, क्योंकि न्यूट्रिनो पदार्थ को लगभग बिना रुके पार कर जाते हैं।
इसी अपरिहार्य पृष्ठभूमि को अक्सर ‘न्यूट्रिनो फॉग’ कहा जाता है। यह कोई बिल्कुल कठोर सीमा नहीं है। ऊर्जा-स्पेक्ट्रम का आकार, अलग-अलग लक्ष्य-पदार्थों की तुलना, दिशा-संबंधी जानकारी और सौर न्यूट्रिनो प्रवाह का बेहतर मापन किसी WIMP संकेत को सांख्यिकीय रूप से अलग करने में मदद कर सकते हैं। फिर भी संवेदनशीलता बढ़ने के साथ सुधार कठिन होते जाते हैं और व्यवस्थित अनिश्चितताएं अधिक महत्वपूर्ण बनती हैं।
XENONnT का 2024 वाला 8B CEνNS परिणाम इस ‘फॉग’ की शुरुआती प्रत्यक्ष झलकियों में से एक था। नया pp न्यूट्रिनो परिणाम दिखाता है कि वही डिटेक्टर अब इलेक्ट्रॉनिक रिकॉयल वाले कम ऊर्जा संकेतों तक भी पहुंच बना रहा है।
1
2
XLZD अगला कदम कैसे बढ़ाएगा?
XLZD को अगली पीढ़ी की तरल-जेनॉन दुर्लभ-घटना वेधशाला के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके मूल डिजाइन में लगभग 60 टन सक्रिय तरल जेनॉन लक्ष्य होगा, जिसे परिस्थितियों के अनुकूल होने पर 80 टन तक बढ़ाया जा सकता है। यह XENONnT की तुलना में लगभग एक क्रम अधिक सक्रिय जेनॉन के बराबर है।
32
35
इतना बड़ा लक्ष्य केवल घटनाओं की संख्या नहीं बढ़ाएगा। इससे pp न्यूट्रिनो के प्रवाह और ऊर्जा-स्पेक्ट्रम का अधिक सटीक मापन संभव हो सकता है। वैज्ञानिक यह भी बेहतर ढंग से जांच सकेंगे कि सूर्य से पृथ्वी तक आते समय इलेक्ट्रॉन न्यूट्रिनो के बचने की संभावना कैसे बदलती है। साथ ही, XLZD WIMP संकेतों को उस क्षेत्र तक तलाशने के लिए बनाया जा रहा है जहां वे न्यूट्रिनो फॉग के साथ ओवरलैप करने लगते हैं।
32
39
XENONnT का व्यापक संदेश यही है कि डार्क मैटर की खोज और सौर न्यूट्रिनो खगोल-विज्ञान अब अलग-अलग प्रयास नहीं रहे। जिस अत्यधिक शुद्धता, कम शोर और संवेदनशील तकनीक की जरूरत एक दुर्लभ WIMP घटना के लिए होती है, वही सूर्य के केंद्र में चल रहे संलयन से निकले लगभग अदृश्य कणों को भी दर्ज कर सकती है।