आज के चमगादड़ दुनिया भर में मिलते हैं, लेकिन केवल जीवित प्रजातियों को देखकर यह तय करना कठिन है कि उनके सबसे पुराने पूर्वज कहाँ रहते थे। 23 सितंबर 2026 को Nature में प्रकाशित अध्ययन में Bat1K शोध समूह ने जीनोम और जीवाश्म, दोनों को मिलाकर उनका विकासक्रम दोबारा बनाया। निष्कर्ष यह है कि चमगादड़ लगभग 6.5 करोड़ साल पहले यूरोप में उभरे होंगे, फिर अन्य महाद्वीपों तक फैले। यह सबसे अधिक समर्थित वैज्ञानिक अनुमान है, पहले चमगादड़ का प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं।
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जीवित प्रजातियों के साथ जीवाश्म क्यों ज़रूरी थे?
शोधकर्ताओं ने चमगादड़ों की 103 जीवित प्रजातियों के गुणसूत्र-स्तर के जीनोम का विश्लेषण किया। इनमें 42 नए तैयार किए गए जीनोम थे और आज मान्यता प्राप्त सभी 21 चमगादड़ कुलों का प्रतिनिधित्व था। इससे जीवित प्रजातियों के आपसी रिश्ते समझने में मदद मिली।
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इसके बाद उन्होंने 65 प्रजातियों की शरीर-रचना से जुड़े 699 लक्षणों को विश्लेषण में शामिल किया। इनमें चतुर्थ कल्प से पहले के 44 जीवाश्मों से मिली जानकारी भी थी। विलुप्त शाखाओं को जोड़ना अहम है: आज चमगादड़ जहाँ पाए जाते हैं, उससे अकेले यह नहीं पता चलता कि उनके पूर्वज कभी कहाँ-कहाँ रहे थे।
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जीवित प्रजातियों के जीनोम की तुलना से टीम ने पूर्वज चमगादड़ों के 26 गुणसूत्रों की संरचना का अनुमान भी लगाया। इसका मतलब यह नहीं कि इतने पुराने जीवाश्मों से डीएनए निकाला गया। इन साक्ष्यों के संयुक्त विश्लेषण ने एशिया, अफ्रीका या उत्तरी अमेरिका के बजाय पुराजीवी युग के अंतिम पैलियोसीन काल में यूरोपीय उत्पत्ति को अधिक समर्थन दिया।
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उड़ान और आवाज़ से रास्ता पहचानने के बारे में क्या पता चला?
नए वंश-वृक्ष के अनुसार, आज जीवित चमगादड़ों के साझा पूर्वज में सक्रिय उड़ान और प्रतिध्वनि से दिशा पहचानने की क्षमता पहले से मौजूद रही होगी। प्रतिध्वनि-आधारित यह क्षमता आवाज़ निकालकर उसकी लौटती गूँज से आसपास का अंदाज़ा लगाने से जुड़ी है। निष्कर्ष बताता है कि दोनों क्षमताएँ चमगादड़ों के विकास में बहुत जल्दी उभरी होंगी; यह अध्ययन-सारांश ठीक-ठीक नहीं बताते कि वे पहली बार कैसे विकसित हुईं।
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अध्ययन के विवरण शुरुआती चमगादड़ों के यूरोप से अफ्रीका और फिर एशिया, अमेरिकी महाद्वीपों तथा ऑस्ट्रेलिया तक फैलने का संभावित क्रम बताते हैं। यह हर यात्रा के जीवाश्म मिलने का दावा नहीं, बल्कि विकासक्रम और भौगोलिक विश्लेषण से निकला अनुमान है। इसी तरह ‘लगभग 6.5 करोड़ साल पहले’ को सटीक तारीख नहीं समझना चाहिए।
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आगे इस जीनोम-संग्रह से क्या मिल सकता है?
Bat1K का लक्ष्य सभी जीवित चमगादड़ प्रजातियों के जीनोम का अनुक्रमण करना है; यह अध्ययन उस लक्ष्य की दिशा में एक कदम है, उसकी पूर्ति नहीं।
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41 ये संदर्भ जीनोम आगे पंखों, संवेदन क्षमताओं, दीर्घायु और संक्रमण के प्रति प्रतिक्रियाओं से जुड़े आनुवंशिक बदलावों के अध्ययन में उपयोगी हो सकते हैं। प्रजातियों के बीच अंतर और विविधता को समझने में भी मदद मिल सकती है। लेकिन स्वास्थ्य या संरक्षण से जुड़े ऐसे लाभ इस अध्ययन में सिद्ध नहीं किए गए हैं।
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