यह निवेश पहले से मिले समर्थन पर आधारित है, जिसमें जर्मनी के Federal Ministry for Economic Affairs and Energy और यूरोपीय संघ (EU) से मिले अनुदान शामिल हैं। इन अनुदानों ने कंपनी के शुरुआती शोध और विकास को आगे बढ़ाने में मदद की।
नई पूंजी का उपयोग कंपनी इन कामों के लिए करने की योजना बना रही है:
NanoStruct की स्थापना 2021 में Dr. Henriette Maaß, Enno Schatz और Kai Leibfried ने की थी।
यह कंपनी University of Würzburg से निकला एक स्पिन‑ऑफ है, जहाँ नैनोटेक्नोलॉजी और बायोटेक्नोलॉजी के संगम पर शोध किया जा रहा था। उसी रिसर्च से यह तकनीक विकसित हुई जिसे अब औद्योगिक फूड‑टेस्टिंग प्रक्रियाओं में लागू करने की कोशिश की जा रही है।
आज अधिकतर फूड‑पैथोजन टेस्ट लैब कल्चर तकनीक पर निर्भर करते हैं। इसमें बैक्टीरिया को बढ़ने दिया जाता है ताकि उनकी पहचान की जा सके—और इसमें अक्सर कई दिन लग जाते हैं।
NanoStruct का सिस्टम इस प्रक्रिया को तेज़ करने की कोशिश करता है। इसकी तकनीक चार प्रमुख घटकों को जोड़ती है:
इस संयोजन से सिस्टम Listeria और Salmonella जैसे खतरनाक बैक्टीरिया को भोजन के नमूनों में घंटों के भीतर पहचान सकता है।
फूड इंडस्ट्री में समय बहुत मायने रखता है। यदि दूषण देर से पता चलता है, तो पूरे बैच या कभी‑कभी पूरे देश में बेचे गए उत्पादों को वापस मंगाना पड़ सकता है।
अगर परीक्षण का समय दिनों से घटकर घंटों में आ जाए, तो कंपनियाँ:
इसके अलावा तेज़ टेस्टिंग से उत्पादन के दौरान बार‑बार निगरानी करना भी आसान हो जाता है, जिससे कुल मिलाकर खाद्य सुरक्षा बेहतर हो सकती है।
हालाँकि NanoStruct फिलहाल फूड‑सेफ्टी टेस्टिंग पर ध्यान दे रहा है, लेकिन इसकी तकनीक के अन्य संभावित उपयोग भी हो सकते हैं।
क्योंकि यह प्लेटफॉर्म तेज़ी से बैक्टीरिया पहचानने के लिए बनाया गया है, इसलिए भविष्य में इसका उपयोग इन क्षेत्रों में भी संभव बताया जाता है:
हालाँकि इन क्षेत्रों के लिए विस्तृत क्लिनिकल डेटा, नियामकीय स्वीकृतियाँ और व्यावसायिक समय‑सीमा अभी सार्वजनिक रूप से व्यापक रूप से उपलब्ध नहीं हैं।
दुनिया भर में फूड‑बोर्न बीमारियाँ अभी भी एक बड़ी चुनौती हैं, और तेज़ तथा भरोसेमंद परीक्षण इस समस्या का अहम हिस्सा हैं। NanoStruct जैसी कंपनियाँ नैनोटेक्नोलॉजी, ऑप्टिकल सेंसिंग, बायोटेक्नोलॉजी और AI को जोड़कर माइक्रोबियल डिटेक्शन को आधुनिक बनाने की कोशिश कर रही हैं।
अगर यह तकनीक वास्तविक उत्पादन माहौल में बड़े पैमाने पर सफल साबित होती है, तो उसी दिन पैथोजन पहचानने वाली टेस्टिंग भविष्य में खाद्य सुरक्षा, उपभोक्ता संरक्षण और सप्लाई‑चेन दक्षता के लिए एक बड़ा बदलाव साबित हो सकती है।