बेपीकोलंबो ने 3 सितंबर 2026 को मर्करी ट्रांसफर मॉड्यूल को सफलतापूर्वक अलग किया; इसी के साथ आठ साल की यात्रा के बाद बुध का आगमन चरण शुरू हुआ। विद्युत शक्ति की एक समस्या के कारण थ्रस्टर पूरे जोर से नहीं चल सके। मिशन की राह बदली गई और 2025 की जगह नवंबर 2026 में कक्षा प्रवेश की योजना बनी। ESA का MPO और JAXA का Mio अप्रै...
प्रकाशितकर्ताGPT-5.6 Terra से संपादितGPT Image 2 से चित्र बनाए गए
शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: How did the European-Japanese BepiColombo mission, launched in 2018, reach the start of its Mercury arrival phase after an eight-year, 10-bi. Article summary: BepiColombo reached Mercury’s arrival phase by combining continuous low-thrust electric propulsion with gravity assists that progressively slowed and reshaped its solar orbit—an unusually difficult requirement for reachi. Topic tags: general, general web. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, charts with fake numbers, clic
बुध तक पहुंचना सिर्फ सूर्य की दिशा में उड़ जाने जितना आसान नहीं है। पृथ्वी से निकलने वाला अंतरिक्षयान पहले से सूर्य के चारों ओर बहुत तेज गति से घूम रहा होता है। इसलिए बुध की कक्षा में प्रवेश के लिए उसे अपनी सौर-कक्षीय ऊर्जा का बड़ा हिस्सा कम करना पड़ता है। बेपीकोलंबो ने इस चुनौती को सौर-विद्युत प्रणोदन और ग्रैविटी-असिस्ट फ्लाईबाय की लंबी, सावधानी से बनाई गई श्रृंखला से हल किया। 3 सितंबर 2026 को उसने बुध के आगमन-चरण में एक अहम बदलाव सफलतापूर्वक पूरा किया। 33
11
यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) और जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (JAXA) का संयुक्त मिशन बेपीकोलंबो 20 अक्टूबर 2018 को प्रक्षेपित हुआ था। यात्रा के दौरान इसके दो वैज्ञानिक ऑर्बिटर एक साथ जुड़े रहे और मर्करी ट्रांसफर मॉड्यूल (MTM) ने उन्हें बिजली तथा विद्युत प्रणोदन उपलब्ध कराया। 15
7
इस मिशन ने सीधा रास्ता नहीं चुना। इसने कुल नौ ग्रहों के फ्लाईबाय किए—पृथ्वी का एक, शुक्र के दो और बुध के छह। हर निकट-पारगमन ने अंतरिक्षयान की सूर्य-कक्षा को बदला और उसे बुध की तुलना में धीमा करने में मदद दी। यह तरीका इतना ईंधन साथ ले जाने की जरूरत से बचाता है, जितना सीधे ब्रेक लगाने के लिए चाहिए होता। 15
33
फ्लाईबाय के बीच MTM का सौर-विद्युत प्रणोदन तंत्र सूर्य के चारों ओर बने पथों पर कम लेकिन लगातार धक्का देता रहा। ESA के अनुसार, विद्युत प्रणोदन और फ्लाईबाय का यह संयोजन बेपीकोलंबो को बुध के पास इतनी कम सापेक्ष गति से लाने के लिए बनाया गया था कि वह उसकी कक्षा में पकड़ा जा सके। 45
यात्रा के दौरान एक विद्युत-शक्ति समस्या आई, जिसने MTM के थ्रस्टरों को मिलने वाली शक्ति सीमित कर दी। ESA ने बताया कि थ्रस्टर पूरी क्षमता पर नहीं चल पा रहे थे। टीमों ने थ्रस्ट को उसकी पहले की क्षमता के करीब 90% तक बहाल कर दिया, लेकिन उपलब्ध बिजली कम बनी रही। 44
मिशन योजनाकारों ने कम प्रदर्शन के अनुरूप प्रक्षेपपथ और संचालन योजना को फिर से तैयार किया। मिशन संभव बना रहा, लेकिन बुध की कक्षा में प्रवेश पहले की 2025 योजना से खिसककर नवंबर 2026 में चला गया। 1
11
यही वजह है कि यह लंबा रास्ता केवल यात्रा का समय नहीं था। यह एक लंबा कक्षीय अभियान था, जिसमें सुरक्षित आगमन के लिए अंतरिक्षयान की गति और पथ को लगातार बदला गया।
3 सितंबर 2026 को बेपीकोलंबो MTM से सफलतापूर्वक अलग हुआ। ESA इसी घटना को बुध के आगमन-चरण की शुरुआत मानता है। स्पेन के सेब्रेरेस और अर्जेंटीना के मालार्गुए स्थित ESA के डीप-स्पेस एंटेना ने सिग्नल प्राप्त कर अलगाव की पुष्टि की। 11
MTM अपना काम पूरा कर चुका था: अंतरग्रहीय यात्रा के दौरान उसने पूरे यान-समूह को ऊर्जा और प्रणोदन दिया। अब बचा संयुक्त अंतरिक्षयान ESA का मर्करी प्लैनेटरी ऑर्बिटर (MPO), JAXA का मियो चुंबकमंडल ऑर्बिटर और उनकी सुरक्षात्मक इंटरफेस संरचना है। बुध की कक्षा में पकड़ और फिर तैनाती के लिए जरूरी कठिन युद्धाभ्यास शुरू करते हुए दोनों ऑर्बिटर शुरुआत में एक-दूसरे से जुड़े रहेंगे। 7
38
आगमन किसी एक पल का नाम नहीं है, बल्कि कई योजनाबद्ध चरणों की श्रृंखला है:
ये नियोजित मिशन-तिथियां हैं; अंतिम सफलता आगमन युद्धाभ्यासों और अंतरिक्षयानों की तैनाती के सफल निष्पादन पर निर्भर करेगी।
बेपीकोलंबो का वैज्ञानिक ढांचा इस विचार पर बना है कि दो अलग-अलग ऑर्बिटर एक ही समय पर बुध और उसके आसपास के अंतरिक्षीय परिवेश का अध्ययन करें।
ESA द्वारा विकसित MPO का केंद्र बुध ग्रह स्वयं है—उसकी सतह, रासायनिक संरचना, गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र, चुंबकीय क्षेत्र और आंतरिक बनावट। JAXA का मियो बुध के चुंबकीय क्षेत्र, चुंबकमंडल, अत्यंत विरल बाह्य वायुमंडल (एक्सोस्फीयर) और आसपास के प्लाज्मा परिवेश का अध्ययन करेगा। 20
21
दोनों ऑर्बिटर मिलकर यह समझने में मदद करेंगे कि बुध की सतह और आंतरिक संरचना का उसके असामान्य रूप से सक्रिय अंतरिक्षीय परिवेश से क्या संबंध है। करीब आठ साल और अरबों किलोमीटर की यात्रा के बाद MTM का अलगाव लंबे क्रूज़ चरण का अंत है—और मिशन के सबसे चुनौतीपूर्ण संचालन चरण की शुरुआत भी। 11
5
Studio Global AI
इस पृष्ठ में एक स्रोत-समर्थित उत्तर शामिल है जिसे आप Studio Global के अंदर जारी रख सकते हैं।
बेपीकोलंबो ने 3 सितंबर 2026 को मर्करी ट्रांसफर मॉड्यूल को सफलतापूर्वक अलग किया; इसी के साथ आठ साल की यात्रा के बाद बुध का आगमन चरण शुरू हुआ।
बेपीकोलंबो ने 3 सितंबर 2026 को मर्करी ट्रांसफर मॉड्यूल को सफलतापूर्वक अलग किया; इसी के साथ आठ साल की यात्रा के बाद बुध का आगमन चरण शुरू हुआ। विद्युत शक्ति की एक समस्या के कारण थ्रस्टर पूरे जोर से नहीं चल सके। मिशन की राह बदली गई और 2025 की जगह नवंबर 2026 में कक्षा प्रवेश की योजना बनी।
ESA का MPO और JAXA का Mio अप्रैल 2027 से नियमित विज्ञान अभियान शुरू करने वाले हैं, जिसमें बुध की सतह, आंतरिक बनावट और चुंबकीय परिवेश का अध्ययन होगा।