अमेरिकी यील्ड घटने का सीधा अर्थ है कि डॉलर आधारित परिसंपत्तियां रखने पर मिलने वाला संभावित रिटर्न, बाकी परिस्थितियां समान रहने पर, कम आकर्षक हो जाता है। इससे डॉलर पर दबाव आता है—खासकर तब, जब गिरावट ब्याज दर कर्व के लंबे सिरे पर हो। बुधवार को डॉलर इंडेक्स 0.9% गिरा और 14 मई के बाद के सबसे निचले स्तर तक पहुंच गया।
विदेशी मुद्रा बाजार में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव अमेरिका और यूरोजोन की अपेक्षित ब्याज दरों के अंतर में आया। अमेरिकी यील्ड गिरने से डॉलर वाली परिसंपत्तियों की आकर्षकता कम हुई, जबकि ECB की अगली बैठक में दर वृद्धि की मजबूत उम्मीदों ने यूरो को सहारा दिया।
एक बाजार रिपोर्ट के मुताबिक, निवेशक 9 सितंबर की अगली नीति बैठक में ECB द्वारा दर को 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 2.50% करने की 90%–94% संभावना मान रहे थे। इसके विपरीत, सितंबर में Federal Reserve की दर वृद्धि की संभावना करीब एक-तिहाई थी—एक रिपोर्ट में यह 34% और अन्य रिपोर्टों में लगभग 30% बताई गई।
इससे यूरो के लिए अनुकूल स्थिति बनी: Fed की जल्द दर बढ़ाने की उम्मीद कमजोर, ECB की दर वृद्धि पर भरोसा मजबूत और लंबी अवधि की अमेरिकी यील्ड में अचानक गिरावट। नतीजतन, दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच अपेक्षित ब्याज दर का अंतर घटा और डॉलर कमजोर हुआ।
28–29 जुलाई की Federal Open Market Committee यानी FOMC बैठक के मिनट्स में सख्त रुख दिखाई दिया। अधिकारियों ने संकेत दिया कि अगर महंगाई में कमी की प्रक्रिया रुकती है, तो आगे दर वृद्धि जरूरी हो सकती है। Cleveland Fed की Beth Hammack, Minneapolis Fed के Neel Kashkari और Dallas Fed की Lorie Logan ने 25 बेसिस पॉइंट की तत्काल दर वृद्धि के पक्ष में असहमति जताई।
लेकिन बैठक में वास्तविक फैसला ब्याज दरों को 3.50%–3.75% की सीमा में बनाए रखने का था। मतदान का परिणाम 9–3 रहा।
मुद्रा बाजार के लिए यह अंतर अहम था। मिनट्स भविष्य के महंगाई आंकड़ों पर निर्भर एक सशर्त जोखिम बता रहे थे, जबकि ट्रेजरी की घोषणा ने उसी समय बॉन्ड बाजार की ट्रेडिंग स्थितियों को बदल दिया। इसके अलावा, सितंबर की Fed दर वृद्धि की बाजार संभावना पहले ही कुछ हफ्तों में करीब 60% से घटकर लगभग 34% रह गई थी।
इसलिए निवेशकों ने मिनट्स को सख्त जरूर माना, लेकिन उन्हें तत्काल नीति कार्रवाई के रूप में नहीं देखा। अमेरिकी यील्ड में तत्काल गिरावट और डॉलर की बिकवाली का असर ज्यादा भारी पड़ा।
येन में मजबूती ने यह धारणा मजबूत की कि बुधवार की चाल केवल यूरो की तेजी नहीं, बल्कि व्यापक डॉलर बिकवाली थी। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड घटने के बीच येन समेत प्रमुख मुद्राओं पर बाजार की नजर रही।
येन की भूमिका सहायक थी, लेकिन मुख्य कारण नहीं। बाजार की प्राथमिक प्रतिक्रिया ट्रेजरी की घोषणा और लंबी अवधि की अमेरिकी यील्ड पर उसके असर से आई। यूरो की तेजी इसलिए और बढ़ी क्योंकि ECB से Fed की तुलना में अगली दर वृद्धि की उम्मीद कहीं ज्यादा मजबूत थी।
आगे की दिशा केवल बायबैक घोषणा से तय नहीं होगी। असली सवाल यह है कि अमेरिकी और यूरोजोन की ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदें किस ओर जाती हैं। ट्रेडर इन संकेतकों पर नजर रख रहे थे:
अगर अमेरिकी आंकड़े उम्मीद से मजबूत आते हैं या Fed अधिकारी स्पष्ट रूप से सख्त रुख अपनाते हैं, तो ट्रेजरी यील्ड फिर बढ़ सकती है और डॉलर को कुछ समर्थन मिल सकता है। इसके उलट, कमजोर अमेरिकी आंकड़े या ECB की दर वृद्धि की लगातार पुष्टि यूरो के पक्ष और डॉलर के खिलाफ चल रहे कारोबार को मजबूत कर सकती है।
यूरो इसलिए चढ़ा क्योंकि अमेरिकी ट्रेजरी के बड़े बॉन्ड बायबैक संकेत ने लंबी अवधि की अमेरिकी यील्ड को नीचे धकेला। यह ऐसे समय हुआ जब बाजार ECB की दर वृद्धि को Fed की तुलना में कहीं ज्यादा संभावित मान रहा था। इससे अपेक्षित ब्याज दर का अंतर घटा और डॉलर कमजोर हुआ।
Fed के हॉकिश मिनट्स महत्वपूर्ण थे, लेकिन उनका संदेश सशर्त और पिछली बैठक पर आधारित था। इसके विपरीत, ट्रेजरी की घोषणा ने बाजार की तत्काल यील्ड संरचना बदल दी। इसी वजह से बॉन्ड बाजार की प्रतिक्रिया और उससे आई डॉलर कमजोरी यूरो की 0.8% से अधिक तेजी की सबसे बड़ी वजह बनी।