स्थानीय मानवाधिकार समूह Emergency Lawyers ने भी कम से कम 28 मौतों और कई घायलों की पुष्टि की। समूह ने हमले के लिए सूडानी सेना (SAF) को जिम्मेदार ठहराया, हालांकि सेना आमतौर पर नागरिकों को जानबूझकर निशाना बनाने के आरोपों से इनकार करती है। इसलिए हमले की अंतिम जिम्मेदारी स्वतंत्र जांच के बिना पूरी तरह तय नहीं मानी जा सकती।
घुबैश का हमला उस व्यापक रुझान का हिस्सा है जिसमें सूडान के युद्ध में ड्रोन हमलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। विशेष रूप से कोर्दोफ़ान और दारफुर क्षेत्र अब इन हमलों के प्रमुख केंद्र बनते जा रहे हैं।
हालिया घटनाएँ इस प्रवृत्ति को स्पष्ट करती हैं:
इन घटनाओं से पता चलता है कि युद्ध के दौरान बाज़ार, सड़कें और परिवहन मार्ग जैसे नागरिक क्षेत्रों पर बार‑बार हमले हो रहे हैं। ड्रोन तकनीक के कारण लड़ाकू पक्ष बिना सीधे ज़मीनी लड़ाई के भी दूरस्थ इलाकों पर हमला कर सकते हैं।
संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि सूडान का संघर्ष अब और अधिक खतरनाक चरण में प्रवेश कर रहा है, मुख्य रूप से ड्रोन युद्ध के कारण।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के अनुसार:
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर टुर्क (Volker Türk) ने कहा कि सशस्त्र ड्रोन अब युद्ध में "नागरिक मौतों का सबसे बड़ा कारण" बन चुके हैं।
संयुक्त राष्ट्र अधिकारियों का कहना है कि यदि यह प्रवृत्ति जारी रही तो संघर्ष और अधिक घातक हो सकता है—खासकर उन जगहों पर जहाँ बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा होते हैं, जैसे बाज़ार।
युद्ध प्रभावित इलाकों में बाज़ार अक्सर नागरिकों की भीड़, परिवहन मार्गों और स्थानीय चौकियों के पास होते हैं। अगर आसपास सैन्य वाहन, लड़ाके या आपूर्ति मौजूद हों तो ये स्थान हवाई हमलों के लिए संवेदनशील हो जाते हैं।
कुछ मामलों में रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि ड्रोन ने पहले किसी वाहन या लड़ाकों को निशाना बनाया, लेकिन विस्फोट का असर आसपास मौजूद नागरिकों पर पड़ा। इससे अचानक बड़ी संख्या में लोग हताहत हो सकते हैं।
सूडान का मौजूदा संघर्ष अप्रैल 2023 में शुरू हुआ था, जब सत्ता संघर्ष के कारण दो प्रमुख ताकतों के बीच लड़ाई छिड़ गई:
अब यह युद्ध अपने चौथे वर्ष में प्रवेश कर चुका है, और विशेषज्ञों का कहना है कि निकट भविष्य में इसके समाप्त होने की संभावना कम दिखाई देती है। कूटनीतिक प्रयास अब तक ज़मीनी हालात बदलने में सफल नहीं हुए हैं।
घुबैश बाज़ार पर हुआ हमला सूडान के युद्ध के कई कठोर सच सामने लाता है:
इन परिस्थितियों में सूडान के कई क्षेत्रों में रहने वाले आम लोगों के लिए खतरा अब केवल युद्ध के मोर्चों तक सीमित नहीं रहा। बाज़ार, सड़कें और रोज़मर्रा की जगहें भी इस संघर्ष में संभावित निशाने बनती जा रही हैं।
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