नई दिल्ली शिखर सम्मेलन में BRICS ने न तो साझा मुद्रा बनाई और न ही डॉलर को छोड़ने का कोई सामूहिक संकल्प लिया। डोनाल्ड ट्रंप की 100% टैरिफ चेतावनी उस संभावित मुद्रा के खिलाफ थी जो डॉलर की जगह लेने के लिए बनाई जाए; 10% अतिरिक्त टैरिफ की बात BRICS को व्यापक भू राजनीतिक चुनौती के रूप में पेश करती है। भारत रूस के बीच रुपय...
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शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: How did the 18th BRICS Summit in New Delhi, which concluded on September 13 with all 11 members adopting a 140-point New Delhi Declaration e. Article summary: The summit did not produce a BRICS plan to replace the dollar; it produced a cautious agenda to reduce payment frictions and expand members’ options. Trump nevertheless treated local-currency settlement and alternative p. Topic tags: general, general web, news. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, charts with fake numbers
नई दिल्ली में हुए 18वें BRICS शिखर सम्मेलन का सबसे अहम नतीजा राजनीतिक सहमति थी, कोई नई मुद्रा नहीं। 12 सितंबर को अपनाए गए नई दिल्ली घोषणा-पत्र में व्यापार, वित्त और वैश्विक शासन-सुधार का व्यापक एजेंडा रखा गया तथा तेज, सुलभ और सुरक्षित सीमा-पार भुगतान व्यवस्था पर आगे काम करने की बात कही गई। लेकिन इसमें न तो साझा BRICS मुद्रा शुरू की गई और न अमेरिकी डॉलर को बदलने की प्रतिबद्धता जताई गई। 4
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इसी फर्क को समझना जरूरी है। BRICS डॉलर-आधारित माध्यमों के बाहर व्यापार निपटान के कुछ विकल्प विकसित कर रहा है; वह अभी एकीकृत मौद्रिक व्यवस्था के लिए जरूरी संस्थान नहीं बना रहा है।
140 अनुच्छेदों वाले घोषणा-पत्र में आर्थिक और वित्तीय सहयोग पर जोर दिया गया। साथ ही एकतरफा टैरिफ और गैर-टैरिफ उपायों, प्रतिबंधों तथा अन्य दबावकारी आर्थिक पाबंदियों पर आपत्ति दर्ज की गई। भाषा जानबूझकर सहमति-आधारित रही: टैरिफ और प्रतिबंधों से जुड़ी चिंताओं के बावजूद इसमें अमेरिका का नाम नहीं लिया गया। 4
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भुगतान के मोर्चे पर दिशा व्यावहारिक है, क्रांतिकारी नहीं। सदस्य देशों ने ऐसे तंत्रों पर काम जारी रखने का समर्थन किया जो सीमा-पार भुगतान को तेज, कम लागत वाला, अधिक सुलभ और सुरक्षित बनाएं। जहां उपयोगी हो, वहां राष्ट्रीय मुद्राओं के ज्यादा इस्तेमाल की भी बात है। घोषणा-पत्र यह भी स्वीकार करता है कि सभी देशों के लिए एक ही मॉडल कारगर नहीं हो सकता और राष्ट्रीय प्राथमिकताएं अलग-अलग हैं। 11
निकट अवधि में यह एजेंडा भुगतान विकल्पों का विस्तार है:
यह साझा मुद्रा जारी करने, एक साझा केंद्रीय बैंक बनाने या डॉलर को दुनिया की प्रमुख रिजर्व और व्यापार मुद्रा के रूप में हटाने से बिल्कुल अलग बात है।
डोनाल्ड ट्रंप ने BRICS सदस्य देशों को 100% टैरिफ की चेतावनी उस स्थिति में दी थी, जब वे डॉलर की जगह लेने के इरादे से कोई मुद्रा बनाएं या उसका समर्थन करें। उन्होंने उन देशों पर 10% अतिरिक्त टैरिफ की धमकी भी दी थी जो उनके शब्दों में BRICS की “अमेरिका-विरोधी नीतियों” के साथ खड़े हों। 46
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इसलिए ये चेतावनियां नई दिल्ली घोषणा-पत्र के विशिष्ट उपायों से कहीं व्यापक रणनीतिक चिंता को दर्शाती हैं। स्थानीय मुद्रा में सीमित व्यापार निपटान या वैकल्पिक भुगतान संपर्क भी धीरे-धीरे डॉलर-आधारित ढांचे पर निर्भरता घटा सकते हैं। वॉशिंगटन के नजरिये से टैरिफ की धमकी ऐसे तकनीकी उपायों को एक संगठित राजनीतिक-आर्थिक चुनौती में बदलने की कीमत बढ़ाती है।
हालांकि, शिखर सम्मेलन की भाषा बताती है कि सदस्य देश इस जोखिम को भी संभाल रहे थे। भारत स्पष्ट कर चुका है कि वह साझा BRICS मुद्रा या खुले तौर पर डॉलर-विरोधी परियोजना का समर्थक नहीं है। भारत का जोर राष्ट्रीय मुद्राओं में निपटान और डिजिटल भुगतान के जरिए सीमा-पार व्यापार की लागत घटाने पर है। 40
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रिपोर्ट के अनुसार, भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय व्यापार का 96% अब रुपये और रूबल में उनकी विकसित होती भुगतान व्यवस्था के जरिए किया जा सकता है। 21 यह महत्वपूर्ण उदाहरण है कि पर्याप्त व्यापार, समान प्रोत्साहन और भुगतान ढांचा होने पर स्थानीय मुद्रा में निपटान बढ़ सकता है।
लेकिन दो देशों की सफलता अपने-आप पूरे BRICS में नहीं दोहराई जा सकती। व्यापक व्यवस्था के सामने अधिक कठिन सवाल होंगे:
घोषणा-पत्र का लचीले रुख पर जोर इन्हीं बाधाओं को दर्शाता है। 11 स्थानीय मुद्राओं में बिलिंग कुछ व्यापार गलियारों में डॉलर पर निर्भरता घटा सकती है, मगर इससे स्वतः सभी के लिए उपयोगी साझा मौद्रिक नेटवर्क नहीं बन जाता।
शिखर सम्मेलन ने दिखाया कि BRICS बड़े एजेंडे पर साझा भाषा तैयार कर सकता है। पर यह भी दिखा कि उसके लिए कितनी सावधानी से कूटनीतिक संतुलन बनाना पड़ता है। पश्चिम एशिया पर समूह के बयान में गहरी चिंता और “अधिकतम संयम” की अपील थी, लेकिन किसी देश को जिम्मेदार नहीं ठहराया गया। 1
यह सतर्क शब्दावली सदस्य देशों ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच तीखे तनाव के माहौल में आई। रॉयटर्स के अनुसार, संघर्ष के दौरान ईरानी मिसाइल हमलों के बाद यूएई ने अगस्त में ईरान के साथ व्यापार और वित्तीय लेनदेन निलंबित कर दिए थे। 17 जब समूह के सदस्य ही संघर्ष के कारण एक-दूसरे के साथ व्यापार और वित्त रोक दें, तो एकीकृत भुगतान व्यवस्था की सीमाएं साफ दिखती हैं।
बड़ी समस्या रणनीतिक विविधता की है। BRICS सदस्य प्रतिबंधों, टैरिफ या पश्चिम-नेतृत्व वाली संस्थाओं में प्रभाव के केंद्रीकरण पर आपत्ति साझा कर सकते हैं, लेकिन सुरक्षा, व्यापारिक निर्भरता और समूह के अंतिम उद्देश्य पर उनकी राय अलग है। सामान्य सिद्धांतों पर सहमति से न साझा मौद्रिक प्राधिकरण बनता है, न साझा राजकोषीय नीति, न एकीकृत विदेश नीति।
BRICS के डी-डॉलराइजेशन की असली परीक्षा शिखर सम्मेलन की भाषा नहीं, उसका क्रियान्वयन होगा। इन चार बातों पर नजर रखनी चाहिए:
नई दिल्ली ने BRICS को वित्तीय विकल्पों के विस्तार की दिशा में आगे बढ़ाया है, डॉलर के विकल्प की दिशा में नहीं। घोषणा-पत्र राष्ट्रीय मुद्राओं में निपटान, भुगतान प्रणाली सहयोग और वैश्विक संस्थानों में सुधार का समर्थन करता है, लेकिन साझा मुद्रा या डॉलर-आधारित व्यापार से सामूहिक बाहर निकलने की बात नहीं करता। 4
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ट्रंप की टैरिफ धमकियां बताती हैं कि सीमित विकल्प भी राजनीतिक रूप से संवेदनशील हैं। वे कुछ सरकारों और कंपनियों को धीमा कर सकती हैं, वहीं अन्य को वैकल्पिक भुगतान साधन बनाए रखने के लिए प्रेरित भी कर सकती हैं। फिलहाल BRICS का डी-डॉलराइजेशन एक क्रमिक, द्विपक्षीय और तकनीकी पहलों का संग्रह है—डॉलर की वैश्विक भूमिका के लिए कोई एकीकृत और विश्वसनीय मौद्रिक चुनौती नहीं।
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नई दिल्ली शिखर सम्मेलन में BRICS ने न तो साझा मुद्रा बनाई और न ही डॉलर को छोड़ने का कोई सामूहिक संकल्प लिया।
नई दिल्ली शिखर सम्मेलन में BRICS ने न तो साझा मुद्रा बनाई और न ही डॉलर को छोड़ने का कोई सामूहिक संकल्प लिया। डोनाल्ड ट्रंप की 100% टैरिफ चेतावनी उस संभावित मुद्रा के खिलाफ थी जो डॉलर की जगह लेने के लिए बनाई जाए; 10% अतिरिक्त टैरिफ की बात BRICS को व्यापक भू राजनीतिक चुनौती के रूप में पेश करती है।
भारत रूस के बीच रुपये रूबल में कथित तौर पर 96% द्विपक्षीय व्यापार का निपटान संभव होना स्थानीय मुद्रा व्यवस्था की उपयोगिता दिखाता है, लेकिन यह BRICS व्यापी मौद्रिक व्यवस्था के बराबर नहीं है।