सोडरबर्ग के अनुसार, इंटरव्यू के कुछ हिस्सों में लेनन और ओनो ऐसे विचारों या अनुभवों की बात करते हैं जिनके लिए कोई वास्तविक आर्काइव फुटेज उपलब्ध नहीं था। ऐसे पलों को दिखाने के लिए AI से बने दृश्य प्रतीकात्मक या कल्पनात्मक चित्रण के रूप में इस्तेमाल किए गए।
उन्होंने यह भी बताया कि प्रोडक्शन के दौरान टीम को कुछ हिस्सों के लिए विज़ुअल तरीका तय करने में मुश्किल हो रही थी, और समय व बजट की सीमाओं के चलते अंततः Meta के AI टूल्स का सहारा लिया गया।
ऑस्कर विजेता निर्देशक ने इस फैसले का बचाव करते हुए कहा कि AI विज़ुअल्स का उद्देश्य दर्शकों को धोखा देना नहीं है।
उनके मुताबिक, इन्हें उसी तरह समझना चाहिए जैसे VFX या CGI—यानी ऐसे तकनीकी साधन जो कहानी को समझाने के लिए इस्तेमाल होते हैं, न कि वास्तविक घटनाओं को नकली तरीके से दोबारा बनाने के लिए।
सोडरबर्ग ने यह भी कहा कि जॉन लेनन खुद प्रयोगधर्मी कलाकार थे और संभव है कि उन्हें नई तकनीकों के साथ काम करने में दिलचस्पी होती। रिपोर्ट्स के अनुसार, लेनन के बेटे Sean Ono Lennon ने भी फिल्म में AI विज़ुअल्स के इस्तेमाल को मंजूरी दी थी।
फिर भी इस निर्णय ने फिल्म समुदाय और दर्शकों के बीच आलोचना को जन्म दिया। हाल के वर्षों में सिनेमा में AI के बढ़ते उपयोग को लेकर कई चिंताएँ सामने आई हैं, जैसे:
कुछ शुरुआती दर्शकों ने यह भी कहा कि AI से बने दृश्य डॉक्यूमेंट्री के माहौल को तोड़ते हैं और कहानी में डूबने के बजाय ध्यान भटका देते हैं।
यह विवाद ऐसे समय सामने आया जब खुद कान्स फिल्म फेस्टिवल भी AI को लेकर एक जटिल स्थिति में है।
हाल ही में कान्स ने Meta के साथ कई वर्षों का स्पॉन्सरशिप समझौता किया है, जिसके तहत कंपनी अपने AI वीडियो तकनीक को फेस्टिवल के दौरान प्रदर्शित करने वाली है।
इसके बावजूद फेस्टिवल के निदेशक थियरी फ्रेमो (Thierry Frémaux) ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि कान्स कलाकारों, लेखकों और फिल्म उद्योग से जुड़े लोगों के साथ खड़ा है, जिन्हें AI के कारण अपने काम पर खतरा महसूस हो रहा है।
इसी वजह से John Lennon: The Last Interview सिर्फ एक डॉक्यूमेंट्री नहीं रह गई—यह फिल्म उद्योग में चल रही एक बड़ी बहस का प्रतीक बन गई है।
मुख्य सवाल यह है: क्या जनरेटिव AI सिर्फ फिल्म निर्माण का एक नया उपकरण है, या यह पूरी रचनात्मक प्रक्रिया को बदल देगा?
कुछ फिल्मकार इसे CGI जैसी एक और तकनीकी प्रगति मानते हैं। वहीं कई लोगों को डर है कि इससे भविष्य में रचनात्मक काम और कलाकारों की भूमिका कम हो सकती है।
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