पूर्वी आर्थिक मंच में सर्गेई लावरोव ने कहा कि सोवियत संघ के विघटन के बाद नाटो को वारसा संधि की तरह खुद को भंग कर देना चाहिए था; उनके अनुसार गठबंधन अपने “कृत्रिम अस्तित्व” को बढ़ाने के नए बहाने खोज रहा है। [4] लावरोव ने फरवरी 2026 में शुरू हुए नाटो के आर्कटिक सेंट्री मिशन को रूस की सुरक्षा के लिए सीधा खतरा बताया और क...
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शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: How did Russian Foreign Minister Sergey Lavrov argue at the September 2026 Eastern Economic Forum in Vladivostok that NATO should have disso. Article summary: Lavrov presented NATO as a post-Cold War alliance searching for a purpose, while Rutte and von der Leyen presented Russia as the source of Europe’s worsening security crisis. The exchange shows a confrontation now spanni. Topic tags: general, news, general web, government, user generated. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermar
व्लादिवोस्तोक में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने नाटो को शीत युद्ध की ऐसी संस्था के रूप में पेश किया जिसका मूल उद्देश्य सोवियत संघ के विघटन के साथ समाप्त हो जाना चाहिए था। इसके उलट, ब्रसेल्स में यूरोपीय संघ और नाटो के नेताओं ने कहा कि यूक्रेन पर रूस का युद्ध, हवाई-क्षेत्र से जुड़े जोखिम और कथित गुप्त या “हाइब्रिड” गतिविधियां ही सामूहिक सुरक्षा की जरूरत को और बढ़ाती हैं।
3 सितंबर को पूर्वी आर्थिक मंच के दौरान लावरोव ने कहा कि सोवियत संघ के पतन के बाद नाटो को भी वारसा संधि की तरह खुद को भंग कर देना चाहिए था। इसके बजाय, उनके अनुसार गठबंधन अपने “पूरी तरह कृत्रिम अस्तित्व” को लंबा खींचने के लिए नए बहाने तलाश रहा है। 4
इस तर्क में शीत युद्ध के बाद नाटो की गतिविधियों को सुरक्षा-परिस्थितियों के अनुरूप बदलाव नहीं, बल्कि संस्था को बनाए रखने की कवायद के रूप में देखा गया है। रूस का कहना है कि गठबंधन को अपनी भूमिका सही ठहराने के लिए नए खतरों और नए अभियानों की जरूरत पड़ती है।
लावरोव ने अपनी आलोचना को आर्कटिक तक बढ़ाया। मंच से पहले प्रकाशित एक लेख में उन्होंने आर्कटिक में नाटो की गतिविधियों को रूस की सुरक्षा के लिए सीधा खतरा कहा और चेतावनी दी कि तेज सैन्य तैयारियां प्रत्यक्ष सशस्त्र टकराव का जोखिम बढ़ाती हैं। 1
यह आरोप खास तौर पर आर्कटिक सेंट्री मिशन पर केंद्रित था, जिसे नाटो ने फरवरी 2026 में सुदूर उत्तरी क्षेत्र में अपनी मौजूदगी मजबूत करने के लिए शुरू किया था। 1 मॉस्को इसे रूस के निकट एक संवेदनशील रणनीतिक क्षेत्र के सैन्यीकरण के प्रमाण के रूप में पेश करता है।
यह मिशन के उद्देश्य या प्रभाव पर रूस का आकलन है, सर्वमान्य निष्कर्ष नहीं। हालांकि राजनीतिक मायने स्पष्ट हैं: रूस अब आर्कटिक को भी उसी व्यापक सुरक्षा विवाद का हिस्सा मान रहा है, जिसमें यूरोप में नाटो की मौजूदगी और तैनाती शामिल है।
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फ़ॉन डेयर लेयेन और नाटो महासचिव मार्क रुटे ने ब्रसेल्स में बिल्कुल अलग तस्वीर पेश की। उनका कहना था कि यूक्रेन के खिलाफ रूस का युद्ध और सुरक्षा से जुड़ी बढ़ती घटनाएं यूरोप के लिए जोखिम बढ़ा रही हैं; यह नाटो को कमजोर करने का नहीं, बल्कि प्रतिरोधक क्षमता और सहयोग मजबूत करने का कारण है।
चर्चा का एक प्रमुख मुद्दा जर्मनी के लाइपज़िग/हाले हवाईअड्डे पर कथित हमला रहा। जर्मन सरकार ने निष्कर्ष निकाला कि अगस्त में हवाईअड्डे पर एक कथित ड्रोन हमले के प्रयास के पीछे रूस था और इसमें शामिल लोग रूसी सरकारी एजेंसियों की ओर से काम कर रहे थे। 20
फ़ॉन डेयर लेयेन ने कहा कि जर्मनी ने लाइपज़िग/हाले में मालवाहक विमानों को निशाना बनाने के प्रयास के पीछे रूस की पहचान की है। उन्होंने इसे सैन्य-स्तर की सामग्री से किया गया और यूरोपीय संघ की धरती पर रूसी ऑपरेटिवों द्वारा अंजाम दिया गया अभियान बताया। उनके अनुसार, यह यूरोपीय धरती पर एक नया उकसाव था। 33
हालांकि यह आरोप विवादित है। रूस ने लाइपज़िग घटना में किसी भी भूमिका से इनकार किया है। 34
रुटे ने कहा कि यूक्रेन युद्ध के दौरान रूस का व्यवहार “तेजी से लापरवाह” हुआ है। उन्होंने नाटो की पूर्वी सीमा के पास सहयोगी देशों के हवाई क्षेत्र में ड्रोन और मिसाइलों के प्रवेश तथा नाटो क्षेत्र को निशाना बनाने वाली कथित दुर्भावनापूर्ण गतिविधियों का उल्लेख किया। 42
यह बयानबाज़ी रूस-नाटो संबंधों के मूल टकराव को सामने रखती है:
मतभेद इसलिए भी गहरे हैं कि कोई भी पक्ष दूसरे की सैन्य मुद्रा को तटस्थ या केवल एहतियाती नहीं मानता। दोनों अपने सामने वाले पक्ष के कदमों को तनाव बढ़ने की मुख्य वजह बताते हैं।
यूरोपीय नेताओं के लिए लाइपज़िग का आरोप सिर्फ एक अलग सुरक्षा मामला नहीं था। इसे यूरोप की व्यापक सुरक्षा चुनौती और यूक्रेन को समर्थन जारी रखने के तर्क के रूप में पेश किया गया।
फ़ॉन डेयर लेयेन ने कहा कि दबाव या डराने की कोशिशों से यूरोप यूक्रेन के समर्थन पर पुनर्विचार नहीं करेगा; इसके बजाय, इससे उनका संकल्प मजबूत हुआ है। 33 रॉयटर्स के अनुसार, जर्मनी के निष्कर्ष के बाद उन्होंने रूस पर दबाव बढ़ाने और संभावित नए प्रतिबंधों की बात भी कही।
35
यूक्रेन के लिए उपकरण, सहायता और प्रशिक्षण से जुड़ी कथित 70 अरब यूरो की सहयोगी प्रतिबद्धता की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध कराई गई प्राथमिक सामग्री में नहीं मिली। इसलिए इसे यहां नाटो की सत्यापित प्रतिबद्धता के रूप में नहीं माना जा सकता।
लावरोव ने नाटो को शीत युद्ध के बाद अपना औचित्य खोजती संस्था बताया और आर्कटिक सेंट्री को इसका प्रमुख उदाहरण पेश किया। यूरोपीय और नाटो नेताओं का जवाब यह था कि रूस का यूक्रेन युद्ध और यूरोप में कथित गतिविधियां ही गठबंधन की सुरक्षा भूमिका की प्रासंगिकता दिखाती हैं।
अब यह टकराव केवल यूक्रेन या नाटो की पूर्वी सीमा तक सीमित नहीं बताया जा रहा। इसमें आर्कटिक में सैन्य मुद्रा, यूरोपीय हवाई क्षेत्र, महत्वपूर्ण ढांचा और कथित हाइब्रिड हमलों के आरोप शामिल हो चुके हैं—जिससे दोनों पक्षों के परस्पर विरोधी खतरे वाले दावों का महत्व और बढ़ गया है। 1
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Studio Global AI
इस पृष्ठ में एक स्रोत-समर्थित उत्तर शामिल है जिसे आप Studio Global के अंदर जारी रख सकते हैं।
पूर्वी आर्थिक मंच में सर्गेई लावरोव ने कहा कि सोवियत संघ के विघटन के बाद नाटो को वारसा संधि की तरह खुद को भंग कर देना चाहिए था; उनके अनुसार गठबंधन अपने “कृत्रिम अस्तित्व” को बढ़ाने के नए बहाने खोज रहा है। [4]
पूर्वी आर्थिक मंच में सर्गेई लावरोव ने कहा कि सोवियत संघ के विघटन के बाद नाटो को वारसा संधि की तरह खुद को भंग कर देना चाहिए था; उनके अनुसार गठबंधन अपने “कृत्रिम अस्तित्व” को बढ़ाने के नए बहाने खोज रहा है। [4] लावरोव ने फरवरी 2026 में शुरू हुए नाटो के आर्कटिक सेंट्री मिशन को रूस की सुरक्षा के लिए सीधा खतरा बताया और कहा कि सुदूर उत्तरी क्षेत्र में सैन्य तैयारियां सीधे सशस्त्र टकराव का जोखिम बढ़ाती हैं। [1]
जर्मनी द्वारा लाइपज़िग/हाले हवाईअड्डे पर अगस्त में कथित ड्रोन हमले के लिए रूस को जिम्मेदार ठहराना ब्रसेल्स की प्रतिक्रिया का प्रमुख मुद्दा बना। रूस ने आरोप से इनकार किया है। [20][34]
पूर्वी आर्थिक मंच में सर्गेई लावरोव ने कहा कि सोवियत संघ के विघटन के बाद नाटो को वारसा संधि की तरह खुद को भंग कर देना चाहिए था; उनके अनुसार गठबंधन अपने “कृत्रिम अस्तित्व” को बढ़ाने के नए बहाने खोज रहा है। [4] लावरोव ने फरवरी 2026 में शुरू हुए नाटो के आर्कटिक सेंट्री मिशन को रूस की सुरक्षा के लिए सीधा खतरा बताया और क...
प्रकाशितकर्ताGPT-5.6 Terra से संपादितGPT Image 2 से चित्र बनाए गए
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व्लादिवोस्तोक में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने नाटो को शीत युद्ध की ऐसी संस्था के रूप में पेश किया जिसका मूल उद्देश्य सोवियत संघ के विघटन के साथ समाप्त हो जाना चाहिए था। इसके उलट, ब्रसेल्स में यूरोपीय संघ और नाटो के नेताओं ने कहा कि यूक्रेन पर रूस का युद्ध, हवाई-क्षेत्र से जुड़े जोखिम और कथित गुप्त या “हाइब्रिड” गतिविधियां ही सामूहिक सुरक्षा की जरूरत को और बढ़ाती हैं।
3 सितंबर को पूर्वी आर्थिक मंच के दौरान लावरोव ने कहा कि सोवियत संघ के पतन के बाद नाटो को भी वारसा संधि की तरह खुद को भंग कर देना चाहिए था। इसके बजाय, उनके अनुसार गठबंधन अपने “पूरी तरह कृत्रिम अस्तित्व” को लंबा खींचने के लिए नए बहाने तलाश रहा है। 4
इस तर्क में शीत युद्ध के बाद नाटो की गतिविधियों को सुरक्षा-परिस्थितियों के अनुरूप बदलाव नहीं, बल्कि संस्था को बनाए रखने की कवायद के रूप में देखा गया है। रूस का कहना है कि गठबंधन को अपनी भूमिका सही ठहराने के लिए नए खतरों और नए अभियानों की जरूरत पड़ती है।
लावरोव ने अपनी आलोचना को आर्कटिक तक बढ़ाया। मंच से पहले प्रकाशित एक लेख में उन्होंने आर्कटिक में नाटो की गतिविधियों को रूस की सुरक्षा के लिए सीधा खतरा कहा और चेतावनी दी कि तेज सैन्य तैयारियां प्रत्यक्ष सशस्त्र टकराव का जोखिम बढ़ाती हैं। 1
यह आरोप खास तौर पर आर्कटिक सेंट्री मिशन पर केंद्रित था, जिसे नाटो ने फरवरी 2026 में सुदूर उत्तरी क्षेत्र में अपनी मौजूदगी मजबूत करने के लिए शुरू किया था। 1 मॉस्को इसे रूस के निकट एक संवेदनशील रणनीतिक क्षेत्र के सैन्यीकरण के प्रमाण के रूप में पेश करता है।
यह मिशन के उद्देश्य या प्रभाव पर रूस का आकलन है, सर्वमान्य निष्कर्ष नहीं। हालांकि राजनीतिक मायने स्पष्ट हैं: रूस अब आर्कटिक को भी उसी व्यापक सुरक्षा विवाद का हिस्सा मान रहा है, जिसमें यूरोप में नाटो की मौजूदगी और तैनाती शामिल है।
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फ़ॉन डेयर लेयेन और नाटो महासचिव मार्क रुटे ने ब्रसेल्स में बिल्कुल अलग तस्वीर पेश की। उनका कहना था कि यूक्रेन के खिलाफ रूस का युद्ध और सुरक्षा से जुड़ी बढ़ती घटनाएं यूरोप के लिए जोखिम बढ़ा रही हैं; यह नाटो को कमजोर करने का नहीं, बल्कि प्रतिरोधक क्षमता और सहयोग मजबूत करने का कारण है।
चर्चा का एक प्रमुख मुद्दा जर्मनी के लाइपज़िग/हाले हवाईअड्डे पर कथित हमला रहा। जर्मन सरकार ने निष्कर्ष निकाला कि अगस्त में हवाईअड्डे पर एक कथित ड्रोन हमले के प्रयास के पीछे रूस था और इसमें शामिल लोग रूसी सरकारी एजेंसियों की ओर से काम कर रहे थे। 20
फ़ॉन डेयर लेयेन ने कहा कि जर्मनी ने लाइपज़िग/हाले में मालवाहक विमानों को निशाना बनाने के प्रयास के पीछे रूस की पहचान की है। उन्होंने इसे सैन्य-स्तर की सामग्री से किया गया और यूरोपीय संघ की धरती पर रूसी ऑपरेटिवों द्वारा अंजाम दिया गया अभियान बताया। उनके अनुसार, यह यूरोपीय धरती पर एक नया उकसाव था। 33
हालांकि यह आरोप विवादित है। रूस ने लाइपज़िग घटना में किसी भी भूमिका से इनकार किया है। 34
रुटे ने कहा कि यूक्रेन युद्ध के दौरान रूस का व्यवहार “तेजी से लापरवाह” हुआ है। उन्होंने नाटो की पूर्वी सीमा के पास सहयोगी देशों के हवाई क्षेत्र में ड्रोन और मिसाइलों के प्रवेश तथा नाटो क्षेत्र को निशाना बनाने वाली कथित दुर्भावनापूर्ण गतिविधियों का उल्लेख किया। 42
यह बयानबाज़ी रूस-नाटो संबंधों के मूल टकराव को सामने रखती है:
मतभेद इसलिए भी गहरे हैं कि कोई भी पक्ष दूसरे की सैन्य मुद्रा को तटस्थ या केवल एहतियाती नहीं मानता। दोनों अपने सामने वाले पक्ष के कदमों को तनाव बढ़ने की मुख्य वजह बताते हैं।
यूरोपीय नेताओं के लिए लाइपज़िग का आरोप सिर्फ एक अलग सुरक्षा मामला नहीं था। इसे यूरोप की व्यापक सुरक्षा चुनौती और यूक्रेन को समर्थन जारी रखने के तर्क के रूप में पेश किया गया।
फ़ॉन डेयर लेयेन ने कहा कि दबाव या डराने की कोशिशों से यूरोप यूक्रेन के समर्थन पर पुनर्विचार नहीं करेगा; इसके बजाय, इससे उनका संकल्प मजबूत हुआ है। 33 रॉयटर्स के अनुसार, जर्मनी के निष्कर्ष के बाद उन्होंने रूस पर दबाव बढ़ाने और संभावित नए प्रतिबंधों की बात भी कही।
35
यूक्रेन के लिए उपकरण, सहायता और प्रशिक्षण से जुड़ी कथित 70 अरब यूरो की सहयोगी प्रतिबद्धता की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध कराई गई प्राथमिक सामग्री में नहीं मिली। इसलिए इसे यहां नाटो की सत्यापित प्रतिबद्धता के रूप में नहीं माना जा सकता।
लावरोव ने नाटो को शीत युद्ध के बाद अपना औचित्य खोजती संस्था बताया और आर्कटिक सेंट्री को इसका प्रमुख उदाहरण पेश किया। यूरोपीय और नाटो नेताओं का जवाब यह था कि रूस का यूक्रेन युद्ध और यूरोप में कथित गतिविधियां ही गठबंधन की सुरक्षा भूमिका की प्रासंगिकता दिखाती हैं।
अब यह टकराव केवल यूक्रेन या नाटो की पूर्वी सीमा तक सीमित नहीं बताया जा रहा। इसमें आर्कटिक में सैन्य मुद्रा, यूरोपीय हवाई क्षेत्र, महत्वपूर्ण ढांचा और कथित हाइब्रिड हमलों के आरोप शामिल हो चुके हैं—जिससे दोनों पक्षों के परस्पर विरोधी खतरे वाले दावों का महत्व और बढ़ गया है। 1
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Studio Global AI
इस पृष्ठ में एक स्रोत-समर्थित उत्तर शामिल है जिसे आप Studio Global के अंदर जारी रख सकते हैं।
पूर्वी आर्थिक मंच में सर्गेई लावरोव ने कहा कि सोवियत संघ के विघटन के बाद नाटो को वारसा संधि की तरह खुद को भंग कर देना चाहिए था; उनके अनुसार गठबंधन अपने “कृत्रिम अस्तित्व” को बढ़ाने के नए बहाने खोज रहा है। [4]
पूर्वी आर्थिक मंच में सर्गेई लावरोव ने कहा कि सोवियत संघ के विघटन के बाद नाटो को वारसा संधि की तरह खुद को भंग कर देना चाहिए था; उनके अनुसार गठबंधन अपने “कृत्रिम अस्तित्व” को बढ़ाने के नए बहाने खोज रहा है। [4] लावरोव ने फरवरी 2026 में शुरू हुए नाटो के आर्कटिक सेंट्री मिशन को रूस की सुरक्षा के लिए सीधा खतरा बताया और कहा कि सुदूर उत्तरी क्षेत्र में सैन्य तैयारियां सीधे सशस्त्र टकराव का जोखिम बढ़ाती हैं। [1]
जर्मनी द्वारा लाइपज़िग/हाले हवाईअड्डे पर अगस्त में कथित ड्रोन हमले के लिए रूस को जिम्मेदार ठहराना ब्रसेल्स की प्रतिक्रिया का प्रमुख मुद्दा बना। रूस ने आरोप से इनकार किया है। [20][34]