दक्षिण कोरिया के कोरिया एडवांस्ड इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (KAIST) का चार पैरों वाला रोबोट RAIBO2, 17 नवंबर 2024 को इंसानी धावकों के साथ सांगजू ड्राइड पर्सिमन मैराथन में उतरा। उसने बिना बैटरी बदले या दोबारा चार्ज किए 42.195 किलोमीटर का रास्ता 4 घंटे, 19 मिनट और 52 सेकंड में पूरा किया। KAIST के अनुसार, पूरी मैराथन खत्म करने वाला वह पहला चार पैरों वाला रोबोट है। यह रफ़्तार से ज़्यादा टिकाऊ ढंग से चलने की उपलब्धि थी।
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एक चार्ज इतना लंबा कैसे चला?
टीम ने केवल रोबोट की चाल बदलने पर भरोसा नहीं किया। RAIBO2 के पैर हल्के किए गए, मोटर चलाने वाले इलेक्ट्रॉनिक सर्किट को कम ऊर्जा गंवाने के लिए बेहतर बनाया गया और उसकी चाल नियंत्रित करने की नीति में मशीन लर्निंग का इस्तेमाल हुआ। इन बदलावों का साझा उद्देश्य हर कदम पर ऊर्जा की खपत घटाना था।
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हल्के पैरों को बार-बार आगे बढ़ाने में कम ऊर्जा लगती है। बेहतर मोटर सर्किट में कम बिजली गर्मी के रूप में व्यर्थ जाती है। रोबोट की चाल विकसित करने में सिमुलेशन-आधारित रीइन्फोर्समेंट लर्निंग—यानी अभ्यास के नतीजों से सीखने की तकनीक—ने भी भूमिका निभाई। उपलब्ध विवरण यह नहीं बताते कि इनमें से हर बदलाव ने कुल बचत में कितना योगदान दिया; इसलिए नतीजे को पूरे सिस्टम की बेहतरी के रूप में समझना चाहिए।
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ऊर्जा के आंकड़े क्या बताते हैं?
मैराथन के दौरान RAIBO2 ने लगभग 1,280 वाट-घंटे (Wh) ऊर्जा इस्तेमाल की, यानी करीब 30.3 Wh प्रति किलोमीटर। उसका औसत ‘परिवहन लागत’ मान 0.25 बताया गया, जबकि तुलना के लिए दिया गया मानव मान 0.37 है। यह माप वजन और तय दूरी को ध्यान में रखता है; इस पैमाने पर रोबोट का मान लगभग 32% कम है। इसका मतलब न तो यह है कि वह इंसानी धावकों से तेज़ था, न ही यह कि बैटरी की ऊर्जा और मनुष्य की शारीरिक ऊर्जा की हर तरह से सीधी तुलना की जा सकती है।
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रिपोर्टों में एक चार्ज पर उसकी संभावित दूरी लगभग 65 किलोमीटर बताई गई है—पुराने तुलनीय रोबोटों के लिए बताई गई प्रति-चार्ज दूरी से करीब तीन गुना। लेकिन उस दिन साबित हुई दूरी 42.195 किलोमीटर ही थी; बाकी संभावित दूरी एक अनुमान है।
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13 बैटरी क्षमता के आंकड़ों में भी अंतर है: दौड़ से जुड़ा 2,016 Wh का आंकड़ा मानें तो 1,280 Wh खर्च होने के बाद 736 Wh बचते, जबकि एक रिपोर्ट कुल क्षमता 1,930 Wh बताती है। इसलिए बची हुई ऊर्जा की सटीक मात्रा को लेकर सावधानी ज़रूरी है।
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फ़िनिश लाइन के आगे इसका महत्व
टीम ने दौड़ के दौरान बिजली की खपत और रोबोट की चाल के वास्तविक परिस्थितियों वाले आंकड़े जुटाए। इस लिहाज़ से यह सिर्फ़ फ़िनिश लाइन तक पहुंचने का प्रदर्शन नहीं, लंबी दूरी के संचालन की परीक्षा भी थी। KAIST के विवरण में संचालन टीम के एक कंट्रोलर, कैमरा ऑपरेटर और भीड़ में मदद करने वाले कर्मियों का ज़िक्र है। उपलब्ध स्रोतों से पूरी दौड़ के लिए एक साथ दर्ज GPS, बिजली और तापमान का संपूर्ण रिकॉर्ड या हर हिस्से की लगातार फ़िल्मिंग पुष्ट नहीं होती।
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इस काम के निष्कर्ष दौड़ के लगभग दो साल बाद, 23 सितंबर 2026 को Nature में प्रकाशित हुए। रिपोर्टों के अनुसार, यह पत्रिका के मुख्य संस्करण में प्रकाशित किसी कोरियाई संस्थान का पहला रोबोटिक्स शोध था।
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5 KAIST से जुड़ा स्टार्टअप Raion Robotics निरीक्षण और आपदा-प्रतिक्रिया जैसे उपयोगों की दिशा में काम कर रहा है, जहां चार्ज के बीच अधिक समय तक चल पाना उपयोगी हो सकता है। हालांकि एक मैराथन से यह साबित नहीं होता कि रोबोट उपकरण लेकर भी उतनी दूर जाएगा, खतरनाक जगहों पर स्वायत्त रूप से काम करेगा या कई रोबोटों के साथ तैनाती में भरोसेमंद रहेगा।
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