लाई ने कहा कि डिजिटल तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) स्वास्थ्य सेवाओं का भविष्य तेजी से बदल रही हैं। ताइवान इन तकनीकों के लिए ऐसे नियामक ढाँचे विकसित कर रहा है जिनसे मेडिकल एआई सुरक्षित, प्रभावी और भरोसेमंद बने।
ताइवान जिन क्षेत्रों में काम कर रहा है, उनमें शामिल हैं:
राष्ट्रपति लाई के अनुसार, मजबूत नियमन के साथ इन तकनीकों का उपयोग बेहतर निदान, सटीक उपचार और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ा सकता है। WHO में भागीदारी मिलने पर ताइवान इन अनुभवों को वैश्विक स्तर पर साझा कर सकता है।
कैंसर आज दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक है। ताइवान ने इससे निपटने के लिए कई रणनीतियाँ शुरू की हैं।
मुख्य कदमों में शामिल हैं:
इन उपायों का उद्देश्य कैंसर से मृत्यु दर घटाना और साथ‑साथ चिकित्सा नवाचार को तेज करना है।
ताइवान की सबसे उल्लेखनीय सार्वजनिक‑स्वास्थ्य उपलब्धियों में से एक हेपेटाइटिस‑C के उन्मूलन में प्रगति है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार ताइवान ने WHO के 2030 लक्ष्य से पाँच वर्ष पहले यह उपलब्धि हासिल कर ली। इसके पीछे व्यापक स्क्रीनिंग, इलाज तक आसान पहुँच और रोकथाम कार्यक्रमों का एकीकृत राष्ट्रीय स्वास्थ्य ढाँचा था।
ताइवान के अधिकारी इस उपलब्धि को इस बात का उदाहरण बताते हैं कि मजबूत स्वास्थ्य प्रशासन और सार्वभौमिक स्वास्थ्य बीमा प्रणाली संक्रामक रोगों से लड़ाई को तेज कर सकती है।
राष्ट्रपति लाई ने ताइवान की राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा प्रणाली (National Health Insurance – NHI) को भी एक सफल मॉडल बताया। यह प्रणाली व्यापक कवरेज प्रदान करती है और स्वास्थ्य डेटा, रोकथाम कार्यक्रमों और उपचार सेवाओं को एकीकृत करती है।
उनका कहना है कि सफल स्वास्थ्य नीतियाँ तब बनती हैं जब सरकार, विश्वविद्यालय, निजी उद्योग और समाज मिलकर काम करें। ऐसे सहयोग से ही भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने वाली मजबूत प्रणाली बनाई जा सकती है।
इन पहलों के बावजूद ताइवान अभी भी WHO और उसके नीति‑निर्माण मंच विश्व स्वास्थ्य सभा (WHA) से बाहर है।
ताइवान 2009 से 2016 तक WHA में पर्यवेक्षक (observer) के रूप में शामिल हुआ था, लेकिन उसके बाद से उसे निमंत्रण नहीं मिला। 2026 में भी उसे लगातार दसवें वर्ष आमंत्रित नहीं किया गया।
चीन का कहना है कि “वन‑चाइना” सिद्धांत के तहत ताइवान अंतरराष्ट्रीय संगठनों में उसकी अनुमति के बिना भाग नहीं ले सकता, और यही रुख WHA में उसकी भागीदारी को रोकता है।
राष्ट्रपति लाई का तर्क है कि वैश्विक स्वास्थ्य तब मजबूत होता है जब अधिक देशों और विशेषज्ञताओं को सहयोग का मौका मिले। डिजिटल हेल्थ, रोग‑उन्मूलन, सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज और चिकित्सा नवाचार में ताइवान का अनुभव—उनके अनुसार—WHO की पहलों के लिए व्यावहारिक ज्ञान जोड़ सकता है।
हालाँकि भविष्य में ताइवान को WHO मंचों पर भूमिका मिलेगी या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है। लेकिन यह मुद्दा एक बड़ी बहस को उजागर करता है—जहाँ भू‑राजनीति और वैश्विक स्वास्थ्य सहयोग अक्सर एक‑दूसरे से टकराते दिखाई देते हैं।