पीटर थील की पोप लियो XIV पर तीखी टिप्पणी के पीछे एक सवाल है: अगर कुछ देश कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर सख्त नियम अपनाएं और उनके प्रतिस्पर्धी न अपनाएं, तो फायदा किसे होगा? थील के मुताबिक, पोप की नियमन की अपील अमेरिका और उसके सहयोगियों की रफ्तार घटा सकती है, जबकि चीन आगे बढ़ता रहेगा। पोप का जोर उन जोखिमों पर है जिनका असर किसी एक देश तक सीमित नहीं रहता। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों चिंताओं को साथ लेकर चलने वाले वैश्विक नियम कैसे बनेंगे।
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थील ने क्या कहा—और क्यों?
24 सितंबर को बर्लिन में मीडिया कंपनी एक्सेल स्प्रिंगर के मुख्य कार्यकारी माथियास डॉप्फनर से बातचीत में थील ने पोप को चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का “यूज़फुल इडियट” कहा। उनका तर्क था कि चीन पोप की बात नहीं मानेगा, लेकिन अमेरिका में लोग उससे प्रभावित हो सकते हैं। इस तरह, थील के अनुसार, पश्चिम पर लगने वाली रोक उसके प्रतिद्वंद्वी के काम आ सकती है। यह नियमों के संभावित असर को लेकर थील का आरोप था—इस बात का प्रमाण नहीं कि पोप चीन की ओर से काम कर रहे हैं।
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थील की आलोचना पोप के मई में जारी परिपत्र मैग्निफिका ह्यूमैनिटास और AI पर निगरानी की उनकी व्यापक अपील से जुड़ी थी। यह स्थापित नहीं है कि उनकी टिप्पणी खास तौर पर गुरुवार को वेटिकन में पोप की कही बातों के जवाब में थी। थील गर्मियों में भी पोप के इस रुख की आलोचना कर चुके थे।
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पोप का रुख क्या है?
लियो AI को पूरी तरह खारिज करने की बात नहीं कर रहे। 21 सितंबर को उन्होंने ऐसे AI सिस्टम विकसित करने का आग्रह किया जो समाज में विभाजन बढ़ाने के बजाय शांति को मजबूत करें और हर व्यक्ति की गरिमा का सम्मान करें। मई में उन्होंने इस उद्योग की निगरानी के लिए वैश्विक नियमों की मांग की थी। रॉयटर्स के मुताबिक, उन्होंने 24 सितंबर को वेटिकन की एक बैठक में AI को लेकर अपनी चेतावनी दोहराई; उपलब्ध रिपोर्टिंग उस संबोधन के सटीक शब्दों की पुष्टि नहीं करती।
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वेटिकन की चिंता भी नई नहीं है। रॉयटर्स के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में उस सप्ताह बड़ी अमेरिकी तकनीकी कंपनियों द्वारा खतरे उठाए जाने से वर्षों पहले वेटिकन AI के गंभीर जोखिमों पर चेतावनी दे चुका था। वेटिकन के AI सलाहकार पादरी पाओलो बेनांती ने भी कहा कि यह संस्था इस मुद्दे से पहली बार नहीं जूझ रही। पोप ने मई का अपना परिपत्र AI कंपनी एंथ्रोपिक के सह-संस्थापक क्रिस्टोफर ओलाह के साथ प्रस्तुत किया था—जो तकनीक के निर्माताओं से संवाद का संकेत है, न कि उससे दूरी बनाने का।
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असली पेच: नियम सब पर कैसे लागू हों?
थील की दलील राष्ट्रीय नियमों की एक मुश्किल दिखाती है: एक देश में लगी पाबंदी उसके प्रतिस्पर्धी देश पर लागू नहीं होती। पोप की अंतरराष्ट्रीय निगरानी की मांग दूसरी मुश्किल से शुरू होती है: गरिमा और शांति से जुड़े जोखिम सीमाएं नहीं मानते। क्या सरकारें ऐसे साझा सुरक्षा उपाय तय कर सकती हैं जो जोखिम घटाएं, लेकिन प्रतिस्पर्धा में असमान बोझ न डालें? फिलहाल यह सवाल खुला है।
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25 सितंबर को पेरिस स्थित यूनेस्को—संयुक्त राष्ट्र की शिक्षा, विज्ञान और संस्कृति संस्था—में पोप का संबोधन निर्धारित है। घोषित कार्यक्रम में AI के साथ शिक्षा, सूचना की विश्वसनीयता और शांति पर चर्चा शामिल है। यूनेस्को के मुताबिक, चार दशक से अधिक समय में यह वहां किसी पोप की पहली यात्रा होगी। कार्यक्रम की घोषणा से यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि लियो पहली बार फ्रांस जा रहे हैं, या देशों में साझा AI नियमों पर सहमति बन चुकी है।
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