चीन की आपत्ति के बाद मार्कोस ने स्पष्ट किया कि उनका मतलब सैन्य हस्तक्षेप का वादा करना नहीं था। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में फिलीपींस शायद “मजबूरी में, अनिच्छा से” यानी “kicking and screaming” हालात में उसमें खिंच सकता है।
मार्कोस के बयान पर चीन ने तुरंत कड़ी प्रतिक्रिया दी। बीजिंग ने मनीला पर “आग से खेलने” का आरोप लगाया और कहा कि ताइवान का सवाल पूरी तरह चीन का आंतरिक मामला है।
चीन के विदेश मंत्रालय ने यह भी दोहराया कि ताइवान का भविष्य तय करना केवल चीन का अधिकार है और इसमें बाहरी देशों के हस्तक्षेप की कोई जगह नहीं है।
बीजिंग ने इन टिप्पणियों के खिलाफ आधिकारिक कूटनीतिक विरोध भी दर्ज कराया। चीन का मानना है कि इस तरह के बयान वन‑चाइना सिद्धांत को कमजोर करते हैं, जिसके अनुसार ताइवान चीन का हिस्सा है और उसे अलग राजनीतिक इकाई के रूप में मान्यता नहीं दी जानी चाहिए।
तनाव के बावजूद फिलीपींस आधिकारिक रूप से वन‑चाइना नीति का पालन करता है। इसका मतलब है कि वह पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना को चीन की वैध सरकार मानता है और ताइवान को अलग देश के रूप में मान्यता नहीं देता।
फिलीपींस के विदेश मंत्रालय ने कई बार दोहराया है कि मनीला इस नीति के प्रति प्रतिबद्ध है, भले ही ताइवान के साथ व्यापार और कामगारों के कल्याण जैसे व्यावहारिक संबंध बने रहें।
यही वजह है कि मार्कोस के बयान एक तरह की वास्तविकता को सामने लाते हैं: कूटनीतिक नीति कुछ और कहती है, लेकिन सुरक्षा और भूगोल की स्थिति कुछ और। ताइवान में संकट होने पर उसका असर फिलीपींस पर पड़ सकता है।
यह पहली बार नहीं है जब मार्कोस के ताइवान से जुड़े बयान पर चीन नाराज हुआ हो।
जनवरी 2024 में मार्कोस ने ताइवान के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति लाइ चिंग‑ते को चुनाव जीतने पर बधाई दी थी। इस कदम पर चीन ने कड़ी आपत्ति जताई और फिलीपींस के राजदूत को तलब किया।
फिलीपींस सरकार ने बाद में कहा कि यह संदेश मुख्य रूप से शिष्टाचार और ताइवान में काम कर रहे लगभग 2 लाख फिलिपीनो कामगारों के प्रति आभार का संकेत था।
ताइवान को लेकर यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब फिलीपींस और चीन के संबंध पहले से ही तनावपूर्ण हैं।
मार्कोस के नेतृत्व में फिलीपींस ने दक्षिण चीन सागर में चीन की गतिविधियों के खिलाफ अधिक सख्त रुख अपनाया है। वहां तटरक्षक जहाजों और नौसेना के बीच कई बार टकराव जैसी घटनाएं भी हुई हैं।
साथ ही, मनीला ने अमेरिका और अन्य इंडो‑पैसिफिक सहयोगियों के साथ रक्षा सहयोग भी बढ़ाया है—जिसे चीन अक्सर बीजिंग के खिलाफ रणनीतिक संरेखण के रूप में देखता है।
पूरी स्थिति फिलीपींस के लिए एक जटिल संतुलन को दिखाती है:
इसलिए मनीला की चुनौती साफ है: वह खुले संघर्ष से बचना चाहता है, लेकिन उसके पड़ोस में होने वाली किसी बड़ी भू‑राजनीतिक घटना से पूरी तरह दूर रह पाना उसके लिए बेहद मुश्किल हो सकता है।
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